पहाड़ के लाल ने माटी के लिए किया ऐसा काम, करेंगे सलाम
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पहाड़ों से पलायन की चिंता के बीच पौड़ी जनपद के छोटे से गांव तिमली के रहनेवाले आशीष डबराल पहाड़ी युवाओं के लिए मिसाल हैं। गुड़गांव की एक नामी टेलीकॉम कंपनी में ऊंचे ओहदे पर तैनात आशीष हर वीकेंड गांव पहुंचते हैं और बच्चों को प्रोत्साहित करते हुए उन्हें पढ़ाते हैं।
गांव में उनका ट्रस्ट बच्चों के लिए अंग्रेजी माध्यम का स्कूल और निशुल्क कंप्यूटर सेंटर चला रहा है। यह पहाड़ के प्रति आशीष का लगाव ही है कि हर हफ्ते साढ़े 600 किलोमीटर का लंबा सफर उन्हें थकान नहीं, बल्कि बच्चों के खिले चेहरों को देख सुकून देता है।
इस समर्पण के मद्देनजर उनकी कंपनी ब्रिटिश टेलीकॉम ने आशीष को दुनिया के शीर्ष दस सामाजिक लोगों में चुना है। इसके लिए 29 फरवरी को लंदन में आयोजितसमारोह में उन्हें सम्मानित किया जाएगा।
अच्छी नौकरी और ऊंचा ओहदा, दिल में बसती है माटी
33 वर्षीय आशीष डबराल गुडगांव में ब्रिटिश टेलीकॉम कंपनी में प्रोजेक्ट मैनेजर हैं। कंपनी में अच्छा पैकेज और विदेशों में नौकरी के तमाम अवसर होने के बावजूद अपनी जड़ों से जुड़े आशीष पहाड़ से हो रहे पलायन पर खासे चिंतित हैं। शिक्षा के अभाव को वे इसकी सबसे बड़ी वजह मानते हैं।
इसीलिए सबसे ज्यादा पलायन प्रभावित पौड़ी जनपद के बच्चों और युवाओं के भविष्य के लिए उन्होंने काम करने की ठानी और तिमली गांव के प्राइमरी स्कूल को वर्ष 2014 में तिमली विद्यापीठ (द यूनिवर्सल गुरुकुल) के रूप में विकसित किया। यहां आज 31 छात्र-छात्राएं अंग्रेजी माध्यम में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। विद्यापीठ में एक वर्षीय निशुल्क कंप्यूटर कोर्स भी चलाया जा रहा है।
आशीष बताते हैं कि उनको यह प्रेरणा अपने परदादा स्वर्गीय बद्रीदत्त डबराल से मिली। उनके परदादा ने वर्ष 1882 में गांव में संस्कृत स्कूल की स्थापना की थी। जिसमें संस्कृत के साथ हिंदी और गढ़वाली शिक्षा भी दी जाती थी। वर्ष 1969 में सरकार ने इस स्कूल को अपने अधीन लेकर प्राइमरी स्कूल बना दिया।
हर वीकेंड गुड़गांव से पहुंचते हैं पहाड़
शिक्षा और रोजगार की स्थिति बदतर होने से बढ़ रहे पलायन से दुखी आशीष ने वर्ष 2009 में ओम सोहम ह्यूमन वेलफेयर चैरिटेबल ट्रस्ट बनाकर गांव के इस प्राइमरी स्कूल को तिमली विद्यापीठ (द यूनिवर्सल गुरुकुल) का नाम दिया।
अब यहां उच्च शिक्षा प्राप्त शिक्षक-शिक्षिकाएं बच्चों को हिंदी, गढ़वाली और अंग्रेजी भाषा की शिक्षा दे रही हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं और स्किल डेवलपमेंट के लिए भी समय-समय पर यहां सेमीनार का आयोजन किया जाता है।
बड़ी बात यह है कि हर शुक्रवार को गुड़गांव से चलकर आशीष बस द्वारा ऋषिकेश पहुंचते हैं और यहां पर रह रहे परिवार के साथ शनिवार को कार से तिमली गांव जाते हैं। इस तरह वे विद्यापीठ में अध्ययनरत बच्चों और वहां की शिक्षक-शिक्षिकाओं को प्रोत्साहित करते हैं और रविवार को फिर गुड़गांव निकल जाते हैं। उनका लक्ष्य पहाड़ में बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाकर उन्हें रोजगार मुहैया कराना है। ताकि शिक्षा व रोजगार को लेकर पहाड़ से अब पलायन न हों।
डॉक्यूमेंट्री आई पसंद तो मिलेंगे चार लाख
आशीष ने बताया कि 29 फरवरी 2016 को लंदन में होने वाले समारोह में उनके द्वारा किए गए सामाजिक कार्यों पर बनी एक डॉक्यूमेंट्री प्रदर्शित की जाएगी। इसमें सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली डॉक्यूमेंट्री को चार लाख रुपये का नगद पुरस्कार मिलेगा।
पत्नी और बचपन के मित्र कर रहे सहयोग
उनके इस सामाजिक समर्पण में उनकी पत्नी मेहा और बचपन के मित्र अशोक घिल्डियाल का खासा सहयोग है। उनके दोस्त ही विद्यापीठ की सारी देखरेख करते हैं। शिक्षिका सुमन नेगी, जुयाल मैडम और हेमराज असवाल भी अपना सराहनीय योगदान दे रही हैं। पत्नी मेहा की राय पर ही उन्होंने अपने बेटे सोहम के नाम पर ओम सोहम ह्यूमन वेलफेयर चैरिटेबल ट्रस्ट बनाया है।
दुबई व मुंबई में नौकरी, फिर गांव का रुख
शिक्षा में सच्ची आस्था रखने वाले आशीष ने सबसे पहले मुंबई की आदित्य बिरला कंपनी में काम किया। पांच साल तक वे दुबई की एक कंपनी में भी उच्च पद पर कार्यरत रहे। अच्छा मुकाम हासिल करने के बाद भी उनका गांव से जुड़ाव कम नहीं हुआ और उन्होंने दो साल पहले गुड़गांव में ब्रिटिश टेलीकॉम कंपनी ज्वाइन कर ली।
कंप्यूटर सीख युवा बने जनता की जरूरत
विद्यापीठ के निशुल्क कंप्यूटर सेंटर में शिक्षक सुरेश ममगाई के सानिध्य में एक वर्ष का कंप्यूटर कोर्स करने वाले युवा करणपाल सिंह व अजय कुमार अब गांववालों की जरूरत बन गए हैं। उन्होंने देवीखेत में कामन सर्विस सेंटर की शुरूआत की है। जहां पर ग्रामीण आसानी से ऑनलाइन जाति, निवास, पेंशन, जन्म मृत्यु प्रमाण-पत्र बनवाते हुए टिकट आदि भी बुक करा सकते हैं।