आसाराम के अवतरण दिवस पर ये क्या हुआ?
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देहरादून के सहस्त्रधारा रोड स्थित आश्रम में आसाराम के 74वें अवतरण दिवस पर रविवार को पूजन आदि कार्यक्रम हुए, लेकिन पुरानी रंगत नदारद रही।
हर बार जैसी रौनक नहीं दिखी
कार्यक्रम में बेहद कम श्रद्घालु पहुंचे और हर बार जैसी सजावट भी नहीं दिखी। बोर्ड गेट पर अवतरण दिवस का न बोर्ड था, न भजनों की गूंज सुनाई दी। हालांकि समर्थकों का कहना था कि उनकी आज भी आसाराम में पूरी श्रद्घा है।
बस खुले तौर पर सामने नहीं आ रहे हैं। जुटे श्रद्धालुओं ने स्वस्थ रहे गुरुदेव जी, आयु लंबी हो, ऐसी भक्ति कीजिए जो दिन-दिन बढ़ती जाए... जैसी लाइनों के साथ आसाराम की लंबी आयु की कामना की।
आसाराम पर हमारी श्रद्घा बनी रहेगी
आश्रम के एक कोने में बैठी जप कर रही चकराता रोड की रानी श्रीवास्तव ने कहा, मैं ही नहीं, सभी समर्थक आज भी उन्हें पूजते हैं, तभी तो घर पर उनकी तस्वीर आज भी टंगी है।
बस खुले तौर पर सामने नहीं आ रहे, लेकिन जल्द आएंगे। कई लोगों ने मुझसे बापू की किताब लेने से मना कर दिया, लेकिन कोई नहीं, हमारी श्रद्धा अपनी जगह है, जो बनी रहेगी।
आरोपों पर जरा भी भरोसा नहीं
चंदरनगर निवासी बसंती बेटियों कविता, जाह्नवी और बेटे नारायण संग आश्रम में पहुंचीं। इनके पूरे परिवार ने दीक्षा ले रखी है।
बड़ी बेटी कविता ने कहा कि मुझे बापू पर लगे आरोपों पर जरा भी भरोसा नहीं।
बापू खुद हमें इंद्रियों पर नियंत्रण रखने की शिक्षा देते हैं। वो भला ऐसा कैसे कर सकते हैं। बसंती ने बताया कि आश्रम पहुंचने पर ही बेटे का नाम नारायण रखा। बापू के आशीर्वाद से ही नारायण की सेहत सुधरी है।
गुरु में दोष नहीं देखा जाता
करनपुर निवासी विपिन भी सात वर्षों से लगातार आश्रम आ रहे हैं। विपिन के मुताबिक गुरु में कभी दोष नहीं देखते।
उनके अच्छे काम देख उनसे सीखा जाता है। श्रद्धा में वैसे भी व्यक्ति को किसी में बुराई नहीं दिखती। हमें गुरुदेव से अच्छी बातें सीखनी चाहिए।