आसाराम बापू की बढ़ेगी मुसीबत, हाइकोर्ट ने फिर दिया बड़ा झटका
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दुष्कर्म के मामले में सजा काट रहे आसाराम बापू को उत्तराखंड हाईकोर्ट ने फिर झटका दिया है। हाईकोर्ट ने आसाराम बापू के ऋषिकेश स्थित आश्रम को वन भूमि पर अतिक्रमण कर बनाया हुआ मानते हुए वन विभाग को अतिक्रमित जमीन पर कब्जा लेने और अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया है।
मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ ने इसी के साथ आसाराम बापू की विशेष याचिका भी खारिज कर दी है। कोर्ट ने माना कि आश्रम ने वन भूमि पर कब्जा किया हुआ है।
ऋषिकेश में ब्रह्मपुरी स्थित आसाराम बापू के आश्रम के खिलाफ वन विभाग की लीज 59 की जमीन पर कब्जा करने की शिकायत ऋषिकेश के ही रेन फारेस्ट हाउस निवासी स्टीफन और तृप्ति ने की थी।
बताया गया कि पूरा आश्रम ही इस लीज भूमि पर अतिक्रमण कर बनाया गया है। इसके बाद 23 फरवरी 2013 को अपर मुख्य वन संरक्षक राजेंद्र कुमार ने शिकायती पत्र के आधार पर नरेंद्र नगर डीएफओ को कार्रवाई के आदेश दिए थे। नौ सितंबर को वन विभाग की ओर से वन भूमि खाली करने का नोटिस आश्रम को दिया गया जिसे आशाराम आश्रम ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
17 सितंबर 2013 को हाईकोर्ट ने वन विभाग के नोटिस पर रोक लगा दी थी। इसके बाद वन विभाग ने इंटरवेंशन प्रार्थना पत्र दायर किया था। वन विभाग की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया था कि लीज 59 लक्ष्मण दस के नाम थी।
लीज 1970 में समाप्त हो चुकी है और कानूनी रूप से लीज ट्रांसफर नहीं हो सकती। पूर्व में एकल पीठ ने सुनवाई के बाद मामले पर लगी रोक को निरस्त कर दिया था। एकल पीठ के इस आदेश को आसाराम आश्रम की ओर से विशेष अपील दायर कर चुनौती दी गई थी।
पक्षकार स्टीफन के अधिवक्ता कार्तिकेय हरि गुप्ता ने कहा कि लीज 59 पर कब्जा करने वालों के खिलाफ स्टीफन ने मंगलवार को ही एक नई शिकायत वन विभाग में दर्ज कराई है। 2013 से ये लोग स्टीफन को परेशान करते आ रहे हैं और फिर उसे परेशान किया गया। अधिवक्ता कार्तिकेय के मुताबिक यह पूरा आश्रम ही लीज 59 पर अतिक्रमण कर बनाया गया है।