घर में पुताई और ट्यूशन पढ़ाकर अर्जुन अवॉर्ड तक पहुंचा ये पैरा शटलर, रैकेट खरीदने तक के नहीं थे पैसे
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पैरा बैडमिंटन खिलाड़ी मनोज सरकार ने गरीबी और शारीरिक अक्षमता को मात देते हुए अपने हौसलों के दम पर अर्जुन अवॉर्डी होने का हक हासिल किया है। पैरा बैडमिंटन की विश्व रैंकिंग में नंबर एक शटलर मनोज के इस मुकाम तक पहुंचने की कहानी हर किसी के लिए प्रेरणादायक है।
रुद्रपुर की बंगाली कालोनी में मनोज सरकार का बचपन बेहद गरीबी में बीता। मां जमुना सरकार ने बताया कि मनोज जब डेढ़ साल का था, तो उसे तेज बुखार आया था। आर्थिक दशा ठीक नहीं होने के कारण एक झोलाछाप से इलाज कराया।
मगर दवा खाने के बाद से उसके एक पैर में कमजोरी आ गई। दिन यूं ही बीतते गए, गरीबी इतनी थी कि स्कूल की छुट्टी के दिन उसने पिता के साथ घरों में पुताई का काम भी किया। थोड़ा बड़ा होने पर ट्यूशन से अपने खर्चे पूरे करने लगा।
रैकेट खरीदने तक के नहीं थे पैसे
लोगों को बैडमिंटन खेलता देख उसने भी रैकेट की जिद की, लेकिन रैकेट खरीदने की हमारी हैसियत नहीं थी। मां जमुना सरकार ने भावुक होते हुए बताया कि खेतों में काम करके जुटाये पैसों से बेटे के लिए बैडमिंटन का रैकेट खरीदा था।
इंटरमीडिएट तक उसने एक सामान्य खिलाड़ी के तौर पर तीन राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में भाग लिया। उसे अच्छा खेलता देख बैडमिंटन खिलाड़ी डीके सेन ने पैरा बैडमिंटन टीम में खेलने की सलाह दी।
अपने प्रदर्शन के बल पर उसने जल्द ही नेशनल फिर इंटरनेशनल पैरा बैडमिंटन टीम में जगह बनाई। वर्ष 2017 में पिता मनिंदर सरकार के निधन के बाद मनोज काफी टूट गए, लेकिन उन्होंने हौंसला नहीं हारा और वर्तमान में पैरा एशियन गेम्स की तैयारियों में जुटे हुए हैं।
छोटे भाई मनमोहन ने बताया कि दो भाई और दो बहनों में मनोज दूसरे नंबर के हैं। दोनों बड़ी बहनों ललिता और सबिता की शादी हो चुकी है। उन्होंने बताया कि मनोज को अर्जुन अवॉर्ड मिलना रुद्रपुर और कुमाऊं समेत पूरे राज्य के लिए गर्व की बात है।