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फाइलों के ढेर में गुम हुए 'रजिस्ट्रार'
देहरादून/शेषमणि शुक्ल
Updated Tue, 20 Aug 2013 09:25 AM IST
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उत्तराखंड के विश्वविद्यालयों की गतिविधि राजनीति और प्रशासनिक दखलअंदाजी के चलते चरमरा गई हैं। हालात यह हैं कि विश्वविद्यालयों में राजनीतिक दबाव के चलते रजिस्ट्रार की नियुक्ति संभव नहीं हो पा रही।
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राज्य के सरकारी विश्वविद्यालयों में रजिस्ट्रार की नियुक्ति सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है।
दून और आयुर्वेद यूनिवर्सिटी को छोड़ कोई भी स्टेट यूनिवर्सिटी नहीं है, जिसमें पात्रता और मानक को पूरा करने वाले पूर्णकालिक रजिस्ट्रार हों।
मुख्यमंत्री ही मंत्री
यह हाल तब है, जब मुख्यमंत्री ही उच्च शिक्षा महकमे के मंत्री हैं। सभी विश्वविद्यालयों में रजिस्ट्रारों की नियुक्ति की सीएम की छह महीने पुरानी घोषणा है। बावजूद इसके कई विश्वविद्यालय में जुगाड़ों से काम चल रहा है।
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कुलाधिपति राज्यपाल अजीज कुरैशी कुलपतियों की बैठक में उन्हें अपने स्तर पर विश्वविद्यालय का रजिस्ट्रार नियुक्त करने को अधिकृत किया था। लेकिन इसमें शासन अड़ंगा लगाता रहा।
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राजनीतिक दखल पड़ रहा भारी
दरअसल, विश्वविद्यालयों के रजिस्ट्रारों की नियुक्ति राजनीतिक और प्रशासनिक दखल के चलते नहीं हो पा रही है। सिफारिशों के दबाव में अधिकांश विश्वविद्यालयों में डाउन ग्रेड वाले शिक्षक रजिस्ट्रार बने हुए हैं।
इसी में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय भी है, जिसमें पालीटेक्निक के शिक्षक को रजिस्ट्रार का दायित्व दे रखा है। औद्यानिकी और श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय के लिए रजिस्ट्रार की तलाश की जा रही है।
फाइल अटकी
पंतनगर विश्वविद्यालय, संस्कृत विश्वविद्यालय और ओपन यूनिवर्सिटी में भी जुगाड़ से काम चल रहा है। सूत्रों के मुताबिक रजिस्ट्रारों की नियुक्ति के संबंध में उच्च शिक्षा विभाग की ओर से भेजी गई फाइल मुख्यमंत्री के पास से लौट आई।
बताया गया कि सिफारिशें आ जाने के चलते फाइल में लिखित नाम अब दरकिनार किए जा रहे हैं। जबकि नियम कहता है कि पैनल बना कर सेलेक्शन कमेटी के जरिए रजिस्ट्रारों की नियुक्ति की जानी चाहिए।