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Dehradun News: खाकी पर हमले के आरोपियों की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज
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कैंट थाना क्षेत्र में सिपाही पर ट्रैक्टर चढ़ाने के तीन आरोपियों की कोर्ट ने अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी है। इससे पहले उन्हें निश्चित समयावधि के लिए अंतरिम जमानत मिल चुकी थी। अब पुलिस आरोपियों को गिरफ्तार कर सकती है। इस मामले में एक आरोपी को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है।
गौरतलब है कि गत 26 फरवरी को जैंतनवाला पुल के पास सिपाही मनोज कुमार अवैध खनन की सूचना पर गया था। वहां पर सामने से आ रहे ट्रैक्टर को उसने रोका तो चालक ने उस पर ट्रैक्टर चढ़ा दिया। घायल सिपाही का अब भी अस्पताल में इलाज चल रहा है। इस मामले में पुलिस ने समीम नाम के आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था। जबकि, वसीम उर्फ गाघड़, असेलॉन और सोहेल फरार चल रहे थे। बीते दिनों इन आरोपियों ने न्यायालय से अंतरिम जमानत मांगी थी। न्यायालय ने अंतरिम जमानत मंजूर करते हुए पुलिस को निर्देशित किया था कि यदि इन्हें हिरासत में लिया जाता है तो सभी को मुचलके पर रिहा कर दिया जाए।
अब अंतरिम जमानत समयावधि समाप्त होने के बाद तीनों आरोपियों ने एडीजे चतुर्थ आशुतोष मिश्र की अदालत में अग्रिम जमानत के लिए अर्जी लगाई थी। इस पर अभियोजन की ओर से इसका विरोध किया गया। अभियोजन का तर्क था कि ये तीनों पुलिस की कार्रवाई को बाधित कर सकते हैं। तथ्यों के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं। अभियोजन के इस तर्क को सही ठहराते हुए अदालत ने तीनों की अग्रिम जमानत अर्जी को खारिज कर दिया।
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गौरतलब है कि गत 26 फरवरी को जैंतनवाला पुल के पास सिपाही मनोज कुमार अवैध खनन की सूचना पर गया था। वहां पर सामने से आ रहे ट्रैक्टर को उसने रोका तो चालक ने उस पर ट्रैक्टर चढ़ा दिया। घायल सिपाही का अब भी अस्पताल में इलाज चल रहा है। इस मामले में पुलिस ने समीम नाम के आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था। जबकि, वसीम उर्फ गाघड़, असेलॉन और सोहेल फरार चल रहे थे। बीते दिनों इन आरोपियों ने न्यायालय से अंतरिम जमानत मांगी थी। न्यायालय ने अंतरिम जमानत मंजूर करते हुए पुलिस को निर्देशित किया था कि यदि इन्हें हिरासत में लिया जाता है तो सभी को मुचलके पर रिहा कर दिया जाए।
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अब अंतरिम जमानत समयावधि समाप्त होने के बाद तीनों आरोपियों ने एडीजे चतुर्थ आशुतोष मिश्र की अदालत में अग्रिम जमानत के लिए अर्जी लगाई थी। इस पर अभियोजन की ओर से इसका विरोध किया गया। अभियोजन का तर्क था कि ये तीनों पुलिस की कार्रवाई को बाधित कर सकते हैं। तथ्यों के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं। अभियोजन के इस तर्क को सही ठहराते हुए अदालत ने तीनों की अग्रिम जमानत अर्जी को खारिज कर दिया।
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