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बड़ा पर्दा पर फिल्म देखीतें मजा ऐगी आज...
अमर उजाला, देहरादून
Updated Sat, 29 Nov 2014 10:36 AM IST
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फिल्म देखीतें मजा ऐगी आज, वू बी इतरा बड़ा पर्दा पर। इन सुंदर फिल्म बणाला त आजा छोरा भी किले नी देखला गढ़वाली फिल्म.... (फिल्म देखकर मजा आ गया वह भी इतने बड़े पर्दे पर, ऐसी फिल्म बने तो युवा पीढ़ी क्यों नहीं गढ़वाली फिल्में देखेगी)। पहली बार मल्टीप्लेक्स में गढ़वाली फिल्म ‘अंजवाल’ देखने का अनुभव दर्शकों ने कुछ यूं बयां किया।
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दर्शकों को खूब हंसाया
शुक्रवार को रिलीज हुई गढ़वाली फिल्म अंजवाल की कहानी में नयापन नहीं था, लेकिन अपनापन जरूर था। फिल्म के किरदारों से लोगों ने खुद से जुड़ा पाया। शुरुआत में फिल्म ने दर्शकों को खूब हंसाया तो अंत में आंखें नम भी हुईं। फिल्म के गीत लोगों के दिलों को छू गए। खास ‘घास कटेणु भैंसी पलेणु छोड़ दगण्या खेती करलू’ पर लोग झूम उठे। नायक ने डायलॉग बोले तो तालियों के साथ सीटियों से हॉल गूंज उठा।
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दो घंटे की यह फिल्म शहर में एक साथ तीन मल्टीप्लेक्स में रिलीज हुई। फिल्म की शूटिंग देहरादून, मसूरी, चकराता और टिहरी में हुई है। फिल्म के चार गानों को गजेंद्र राणा, नीरेंद्र राजपूत, मीना राणा, मंजू सुद्रिंयाल, संतोष खेतवाल महेंद्र चौहान ने स्वर दिए हैं।
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राजपुर रोड स्थित सिलवर सिटी में फिल्म के प्रीमियर पर पहुंचे मेयर विनोद चमोली ने प्रसिद्ध लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी के अलावा फिल्म के कलाकार और गायकों को शॉल उढ़ाकर सम्मानित किया। इनमें प्रदीप भंडारी, राजेंद्र रावत, जसपाल, हेमंत बुटोला, संतोष खेतवाल, सीमा वर्मा, मुकेश शर्मा और मिन्नी उनियाल शामिल थे। मेयर ने कहा कि उत्तराखंड में फिल्म उद्योग के लिए अपार संभावनाएं हैं, बस जरूरी सरकार से प्रोत्साहन की है।
यहां रिलीज हुई फिल्म
ग्लीट्स, सिल्वर सिटी, बिग सिनेमा
कई गढ़वाली एलबम में काम किया है, लेकिन पहली बार लीड रोल मिला। इस फिल्म में काम करने के बाद कह सकता हूं कि गढ़वाली फिल्मों में बेहतर करियर बनाया जा सकता है। प्रतिभावान युवाओं को फिल्मों में आना चाहिए, लेकिन ग्लैमर देखकर नहीं। -मुकेश शर्मा, अभिनेता
यह मेरी दूसरी गढ़वाली फिल्म है, लेकिन पहला लीड रोल। इस बात की ज्यादा खुशी है कि यह पहली गढ़वाली फिल्म है जो मल्टीप्लेक्स में रिलीज हुई। दर्शकों की प्रतिक्रिया से अंदाजा लगाया जा सकता है गढ़वाली फिल्मों का भविष्य सुनहरा है। -मिन्नी उनियाल अभिनेत्री
मैंने देखा है कि गढ़वाल में कई परिवार बिना सोचे समझे लड़कियों की शादी शहर या विदेश में रहने वाले लड़कों से कर देते हैं। शादी के बाद लड़कियों की जिंदगी बदहाल हो जाती है। मुझे उम्मीद है कि इस फिल्म को देखने के बाद लोगों में जागरूकता आएगी। उत्तराखंड सरकार फिल्म नीति बनाती है तो आगे भी हम गढ़वाली फिल्मों पर बेहतर काम कर पाएंगे। -निर्देशक मनीष वर्मा
फिल्म तकनीकि रूप से बेहतरीन है। फिल्म देखने में मजा आया। इस तरह की गढ़वाली फिल्में बनें तो गढ़वाल की युवा पीढ़ी भी अपनी संस्कृति से जुड़ी रहेगी।-यश
इस फिल्म के साथ गढ़वाली सिनेमा को नया जन्म मिला है। गढ़वाली फिल्मों को इस तरह के बदलाव की सख्त आवश्कता थी।- जसपाल सिंह
फिल्म की कहानी
तू त मेरी अंजवाल च। फिल्म के इस डायलाग में पिता अपनी बेटी को अहसास कराते हैं कि वह किसी ओर की अमानत है। फिल्म में पिता का किरदार निभाने वाले कैलाश कंडवाल बेटी नैनी (अभिनेत्री मिन्नी भंडारी) की शादी के कई अरमान सजोते हैं। गांव में आए एक शहरी लड़के आकाश (विलन के रोल में किरन उनियाल) के ठाठबाट देख वे बेटी की शादी उससे कर देते हैं। शादी के बाद आकाश नैनी को शहर ले जाता है और उसे छोड़ देते है। नैनी शहर में बेसहारा हो जाती है। लेकिन वह हिम्मत से काम करती है। शहर में नर्स का काम सीखती है। इधर मन ही मन नैनी को चाहने वाला अर्जुन (मुकेश शर्मा) उसे ढूंढने शहर आता है। अर्जुन को नैनी को ढूंढकर गांव ले आता है, लेकिन इससे पहले ही उसके पिता की मौत हो जाती है। बाद में अर्जुन और नैनी शादी कर नई जिंदगी की शुरुआत करते हैं।