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बदरीनाथ और केदारनाथ धाम में बढ़ेंगी यात्रा सुविधाएं, प्राचीन कुंडों को फिर मिलेगी पहचान

Tue, 17 Sep 2019 08:28 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोपेश्वर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोपेश्वर Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 17 Sep 2019 08:28 AM IST
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Ancient Kund will built Again in kedarnath and badrinath dham for pilgrims
- फोटो : फाइल फोटो

बदरीनाथ धाम और केदारनाथ में यात्रा सुविधाएं जल्द ही बढ़ाई जाएंगी। वर्ष 2013 की आपदा में अपना अस्तित्व खो चुके प्राचीन कुंड, बीकेटीसी की धर्मशालाएं, पुजारी व कर्मचारी आवास का दोबारा निर्माण होगा।

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दिल्ली स्थित उत्तराखंड भवन में पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज की अध्यक्षता में आयोजित हुई उच्च स्तरीय बैठक में बदरीनाथ व केदारनाथ में यात्रा सुविधाएं बढ़ाए जाने पर चर्चा हुई। इस दौरान बीकेटीसी के अध्यक्ष की ओर से यात्रियों की सुविधा संबंधी योजनाएं मास्टर प्लान में शामिल करने के लिए कहा गया। 
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 बीकेटीसी के अध्यक्ष मोहन प्रसाद थपलियाल ने पीएमओ से नामित अहमदाबाद के आर्किटेक्ट नकुल शाह के सम्मुख केदारनाथ में हंस कुंड, उदक कुंड, रेतस कुंड, आदिगुरू शंकराचार्य समाधि स्थल, गौरीकुंड, यात्री वेटिंग शेड, वेटिंग रूम, भोग मंडी निर्माण, मंदिर समिति कार्यालय, प्रशासनिक भवन, पुजारी निवास एवं कर्मचारी आवास के कार्य एवं बदरीनाथ में यात्रियों की सुविधा संबंधी योजनाएं मास्टर प्लान में शामिल करने के लिए कहा।

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इस दौरान पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि सरकार बदरीनाथ धाम, केदारनाथ के साथ ही अन्य पौराणिक मंदिरों व तीर्थस्थलों के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। इसलिए जिस प्रकार से केदारनाथ में कायाकल्प की गई, अन्य तीर्थस्थलों को भी प्राथमिकता से सुविधाएं दी जाएंगी।

बीकेटीसी के मीडिया प्रभारी डा. हरीश गौड़ ने बताया कि बैठक में बदरीनाथ धाम और केदारनाथ में यात्रा सुविधाएं बढ़ाने पर जोर दिया गया। बीकेटीसी के सीईओ बीडी सिंह ने बताया कि केदारनाथ में और अधिक त्वरित गति से विकास एवं पुनर्निर्माण कार्यों के लिए बैठक में व्यापक चर्चा हुई है।

जबकि बीकेटीसी के मीडिया प्रभारी डा. हरीश गौड़ ने बताया कि आपदा में केदारनाथ में बीकेटीसी के कई निर्माण कार्य बह गए थे, जिन्हें अभी तक मास्टर प्लान में शामिल नहीं किया गया था। अब पौराणिक कुंडों को फिर से पहचान मिलने की उम्मीद जगी है। इस मौके पर समिति के ईई अनिल ध्यानी के साथ ही चमोली, रुद्रप्रयाग व उत्तरकाशी के जिला पर्यटन अधिकारी मौजूद थे। 

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