सत्ता के फलक पर दशकों तक काबिज रहें PM मोदी, इसके लिए ये है BJP के 'चाणक्य' की नीति
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दो दिनी उत्तराखंड दौरे के पहले दिन मंगलवार को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने पार्टी की योजना को सामने रख दिया। पीएम मोदी को दशकों तक सत्ता के फलक पर काबिज रखने के लिए पार्टी के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह ने इसका प्लान बताया
पार्टी पदाधिकारियों से शाह ने कहा कि हमें मेहनत कर आगामी तीस साल के लिए पार्टी को अजेय बनाना है। यह पीएम नरेंद्र मोदी के अगुवाई में संभव है। हमें इसके लिए काम करना होगा।
उन्होंने कहा कि आजादी के बाद पंचायत से लेकर संसद तक की शासन व्यवस्था में 25 से 30 साल कांग्रेस को काम करने के लिए मिले। इसी तरह, अब बीजेपी को इतना समय मिलना चाहिए। यह संभव है। बस कार्यकर्ताओं को थोड़ी और मेहनत करनी होगी।
विभिन्न बैठकों में शाह ने कहा कि पंडित दीनदयाल जन्म शताब्दी वर्ष के दौरान पार्टी का एक ही संकल्प है। पूरे देश में कोई राज्य और बूथ न छूटे, जहां तक बीजेपी की पकड़ न बने। हमारी विचारधारा को घर-घर तक पहुंचाना है।
उन्होंने कहा कि अब भावनात्मक राजनीति से हम अपने साथ लोगों को जोड़ तो सकते हैं, लेकिन लक्षित राजनीति से ही हम उन्हें लंबे समय तक अपने साथ जोड़े रख सकते हैं। उन्होंने कहा कि अब लक्ष्य आधारित राजनीति का जमाना आ गया है।
उन्होंने कहा कि संगठनात्मक मजबूती के लिए जरूरी है कि 90 दिन के भीतर वे सारे मोर्चा और प्रकोष्ठ गठित हो जाएं, जो अभी तक नहीं बन पाए हैं। इसी तरह, 120 दिनों में जिला प्रभारियों को आज से ही हर मंडल में बैठक करनी होगी।
इस दौरान बीजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ अनिल जैन, सह महामंत्री संगठन शिवप्रकाश, विभाग व प्रकल्प के राष्ट्रीय समन्वयक अरविंद मेनन, आईटी प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय संयोजक अमित मालवीय, बीजेपी के प्रदेश प्रभारी और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्याम जाजू, प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट, सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत, उनकी कैबिनेट के सभी मंत्री, पांचों सांसद और कई विधायक मौजूद थे।
संगठन की मजबूती के उपाय तलाशते रहे
उत्तराखंड में अपने दो दिनी दौरे की शुरूआत में अमित शाह हर लिहाज से सरकार और संगठन की मजबूती के उपाय तलाशते दिखे। उन्होंने सुबह साढे़ नौ बजे जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर कदम रखने के बाद आठ कार्यक्रमों में भाग लिया।
पार्टी संगठन के विभिन्न पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से भेंट करने के अलावा, सामाजिक जीवन के अन्य क्षेत्रों के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की। इस दौरान, वह बीजेपी संगठन की मजबूती के लिए फीडबैक लेते और गाइड लाइन देते हुए ही दिखाई दिए। उन्होंने अपनी सबसे पहली बैठक में पदाधिकारियों की शिकायतें और सुझाव को सुना। इस दौरान 65 विषय उनके पास आए।