उत्तराखंड: सड़क दुर्घटना के दावे और बीमा को लेकर मोटरयान नियमावली में संशोधन, ये हैं नए नियम
- पुलिस को बनाया जिम्मेदार, खुद तैयार करनी होगी दावे की रिपोर्ट
- संशोधन पर सात दिन में मांगी आपत्तियां एवं सुझाव
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सड़क दुर्घटना के मामलों में अब पुलिस की भूमिका सिर्फ रिपोर्ट दर्ज करने तक नहीं रहेगी। अब उन्हें इन प्रकरणों में विस्तृत जांच करनी होगी और दावे की रिपोर्ट दुर्घटना दावा अधिकरण (ट्रिब्यूनल) को भेजनी होगी। परिवहन विभाग ने उत्तराखंड मोटरयान नियमावली में ऐसे कुछ और संशोधन किए हैं, जिनके संबंध में लोगों से सात दिन में आपत्ति एवं सुझाव मांगे हैं। ये सुझाव सचिव परिवहन को उत्तराखंड शासन के पते पर भेजे जा सकते हैं।
मोटरयान संशोधन नियमावली में सड़क दुर्घटना के मामलों में पुलिस को और अधिक जिम्मेदार बनाया गया है। मसलन सड़क दुर्घटना में व्यक्ति के घायल होने या मौत होने पर यदि क्षतिपूर्ति को लेकर कोई दावा नहीं होता है तो भी जांच अधिकारी (पुलिस अधिकारी) को जांच रिपोर्ट दुर्घटना दावा अधिकरण को देनी होगी।
अभी तक अधिकरण के मांगने पर रिपोर्ट दी जाती थी। नियमावली में पुलिस के दायित्व बढ़ाते हुए दुर्घटना के साक्ष्य जुटाने से लेकर दुर्घटना स्थल की योजना तैयार करने तक सारा काम विवेचना अधिकारी ही करेंगे। मार्ग की स्थिति से लेकर दुर्घटना स्थल की सभी कोणों से फोटोग्राफी भी करानी होगी।
मृत्यु के मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट व अन्य सत्यापित दस्तावेज अधिकरण के समक्ष प्रस्तुत करने होंगे। दुर्घटना में घायल व्यक्ति या मृतक के परिजनों के अनुरोध पर ऐसी सूचना जांच अधिकारी को बीमा कंपनी को भी उपलब्ध करानी होगी। ये सारी प्रक्रिया विवेचना अधिकारी को दुर्घटना की रिपोर्ट दर्ज करने के साथ ही शुरू करनी होगी।
न्यायालय के आदेश पर ही छूटेगा दुर्घटना वाहन
नियमावली में यह प्रावधान भी किया गया है कि जांच अधिकारी तब तक दुर्घटनाग्रस्त वाहन को नहीं छोड़ेगा। जब तक न्यायालय इस बारे आदेश नहीं देगा। दुर्घटना में मृत्यु व स्थायी विकलांगता के दावे के मामले में भुगतान के लिए जब तक वाहन का पंजीकृत स्वामी प्रतिभूति राशि जमा नहीं करेगा, तब तक कोई भी न्यायालय वाहन को अवमुक्त नहीं करेगा।
विशेषकर उस स्थिति में जब वाहन के पास तीसरे पक्ष की जोखिम उठाने की बीमा पॉलिसी न हो। जहां वाहन से संबंधित बीमा पॉलिसी में तीसरे पक्ष के लिए जोखिम का प्रावधान नहीं है या उसकी बीमा पॉलिसी नकली पाई जाती है तो ऐसी स्थिति में न्यायिक मजिस्ट्रेट सार्वजनिक नीलामी में जब्त वाहन को छह माह के भीतर बेचकर उस धनराशि से दावे की धनराशि का भुगतान करेंगे।
उच्च न्यायालय के आदेश पर हुआ संशोधन
परिवहन विभाग ने यह संशोधन उच्च न्यायालय में दायर एक याचिका पर आए आदेश के आलोक में किया। कोलकाता की दीपिका ने ये याचिका दायर की थी। उनके पति का नैनीताल में सड़क दुर्घटना में निधन हो गया था। पुलिस ने दुर्घटना के संबंध में फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी।
सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे ही मामले में आदेश दिया था कि पुलिस का जांच अधिकारी स्वत: दावे की रिपोर्ट तैयार कर दुर्घटना दावा अधिकरण को देगा। उत्तराखंड पुलिस ने मोटरयान अधिनियम की नियमावली के प्रावधान का हवाला दिया कि उसमें ये स्वत: रिपोर्ट देने का प्रावधान नहीं है। चूंकि इस मामले में केंद्रीय अधिनियम में खुद दावा रिपोर्ट तैयार करने का प्रावधान है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के आदेश देने के बाद मुख्य सचिव ने प्रति शपथ पत्र देकर नियमावली में संशोधन करने की बात कही थी।