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सेवा का अधिकार अधिनियम में होगा संशोधन, जानिए फायदे
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 14 Aug 2016 01:01 AM IST
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हरीश रावत
- फोटो : file photo
सरकार राज्य में लागू सेवा का अधिकार अधिनियम-2011 में संशोधन करने की तैयारी में है। सूत्रों की मानें तो सरकार अब अपीलीय प्रक्रिया को शिथिल करते हुए द्वितीय अपील को समाप्त करने जा रही है। इस संबंध में प्रस्ताव तैयार कर न्याय विभाग को भेज दिया गया है, ताकि इसे कानूनी अमलीजामा पहनाया जा सके। यदि कानूनों में संशोधन कर द्वितीय अपील को समाप्त कर दिया जाता है तो इससे आम आदमी को न सिर्फ बेहद कम समय में न्याय मिलेगा, बल्कि प्रकरणों की सुनवाई में अफसरों का समय भी बर्बाद नहीं होगा।
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2011 से लागू है सेवा का अधिकार
उत्तराखंड देश के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हैं जहां सेवा का अधिकार कानून चार फरवरी 2011 से लागू है। वर्तमान खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, राजस्व, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, आवास, परिवहन, पेयजल, समाज कल्याण, शहरी विकास, शिक्षा और गृह विभाग समेत 10 बड़े सरकारी विभागों में सेवा का अधिकार कानून लागू है।
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इन विभागों में 200 सेवाओं को इस कानून के दायरे में लाया गया है। सेवा का अधिकार अधिनियम के तहत विभिन्न प्रकरणों की अपील की जाती है, जिसकी तीन स्तरों पर सुनवाई होती है। लेकिन अपीलीय प्रक्रिया त्रिस्तरीय होने की वजह से समय की बर्बादी होती है और अपीलकर्ता को बहुत अधिक भागदौड़ करनी होती है।
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इसके अलावा प्रकरणों के निस्तारण में भी लंबा वक्त लगता है। यानी, अपीलकर्ता को समय रहते न्याय नहीं मिल पाता है। ऐसे में अब सरकार त्रिस्तरीय प्रक्रिया को द्विस्तरीय करना चाह रही है। सूत्रों के मुताबिक सरकार द्वितीय अपील को समाप्त करने जा रही है, जिसका प्रस्ताव तैयार कर न्याय विभाग को भेजा जा चुका है।