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एंबुलेंस है, चालक नहीं, चली गई जान
अमर उजाला, साहिया
Updated Fri, 15 Nov 2013 08:41 PM IST
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राजधानी देहरादून से सटे साहिया में समय पर 108 (एंबुलेंस) के न पहुंचने पर धारिया निवासी 50 वर्षीय संवारी देवी की जान चली गई। परिजनों का आरोप है कि यदि समय रहते एंबुलेंस पहुंच जाती तो महिला को जान नहीं गंवानी पड़ती।
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चकराता से रवाना किया गया
कालसी तहसील के धारिया निवासी तौलाराम की पत्नी संवारी देवी अपने मायके बोहा गांव आई हुई थी। शुक्रवार सुबह अचानक उनकी तबियत बिगड़ गई। अस्पताल ले जाने के लिए परिजनों ने सुबह 5:20 बजे 108 को कॉल किया गया, लेकिन उन्हें बताया कि पायलेट के न होने के कारण साहिया के बजाय चकराता की 108 को मौके लिए रवाना किया गया है।
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पहुंचने में डेढ़ घंटे लग गए
चकराता से रवाना हुई 108 को गांव तक पहुंचने में करीब डेढ़ घंटे लग गए। तब तक महिला ने दम तोड़ दिया, जबकि साहिया से गांव की दूरी महज आधा घंटे की है। महिला के पति का कहना है कि यदि समय पर एंबुलेंस के पहुंचने पर ऑक्सीजन मिल जाती तो उनकी पत्नी की जान नहीं जाती। 108 के पीआरओ मोहन सिंह राणा का कहना है कि पायलेट की कमी के चलते चकराता से एंबुलेंस भेजनी पड़ी। जल्द ही दो अन्य पायलेट की नियुक्ति की जाएगी।
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एक पायलेट के भरोसे 108
साहिया स्थित 108 एक सप्ताह से महज एक पायलेट के भरोसे है, जबकि प्रत्येक एंबुलेंस में तीन पायलेट और इतने ही फार्मासिस्ट होते हैं। पायलेट की कमी के चलते ही 108 लोगों को चौबीस घंटे की सेवाएं नहीं दे पा रही हैं।