अमर उजाला की जांच ने खोली पुलिस की पोल
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देहरादून में रात एक से सुबह चार बजे तक गश्त का दावा हो या सीओ से लेकर एडीजी स्तर तक जवानों को सुरक्षा व्यवस्था चौकस रखने का निर्देश।
मित्र पुलिस की बातें सिर्फ कहने भर की होती हैं, जमीन पर करनी बिल्कुल अलग नजर आती है।
अमर उजाला ‘रात का रिपोर्टर’ ने शुक्रवार रात 11:45 बजे से रात डेढ़ बजे तक राजधानी में पुलिस के दावों की हकीकत जानी तो साफ हो गया कि चोरों के हौसले बुलंद क्यों हैं।
चौराहों पर पुलिस जवान नहीं
यही वह समय है, जब रात को सबसे अधिक अपराध होने की आशंका होती है। लेकिन पूरे शहर में कहीं किसी गश्ती दल से रात का रिपोर्टर का सामना नहीं हुआ। यही नहीं, प्रमुख चौराहों पर पुलिस जवान भी नजर नहीं आए।
एकाध जगह दिखे भी तो वे खुद में खोए रहे। दूसरी ओर, कहीं किसी पुलिस अधिकारी को निरीक्षण करते भी नहीं देखा गया।
साफ है कि जवानों को मुस्तैद रखने का जिम्मा संभालने वाले अफसर खुद गहरी नींद में हैं तो जवान भी मौज उठाने से गुरेज क्यों करें। और जब व्यवस्था ही इस कदर सुस्त हो तो भला शहर कैसे चोरियों से बचे?
किस काम के ये प्वाइंट
रात का रिपोर्टर ने 11:45 बजे पटेलनगर से सफर शुरू किया। दस मिनट बाद सहारनपुर चौक पर पहुंचा, लेकिन यहां कोई सिपाही नहीं दिखा। कुछ देर रुककर इंतजार किया गया, लेकिन गश्ती टीम का कोई अता-पता नहीं था।
यहां से आढ़त बाजार, प्रिंस चौक होते हुए रिपोर्टर तहसील चौक तक पहुंचा। तीनों चौराहे संवेदनशील हैं, लेकिन कहीं कोई जवान नहीं नजर आया। अब तक 12:45 बज चुके थे। ठीक एक बजे रिपोर्टर घंटाघर से आगे चकराता रोड पर बढ़ा।
बिंदाल पुल, यमुना कालोनी और बल्लूपुर चौक सब से खाकी नदारद थी। कहीं गश्ती जीप भी नहीं मिली, न ही कहीं कोई चौकीदार दिखा।
कुर्सी पर बैठ बजाते रहे ड्यूटी
घंटाघर और सर्वे चौक पर पुलिसकर्मी ड्यूटी पर तो थे, लेकि न उन्होंने कुर्सी से उठने की जहमत तक नहीं की। सर्वे चौक पर चार में से दो सिपाही कानों पर मोबाइल फोन चिपकाए घूम रहे थे।
उन्हें या तो रात की ड्यूटी के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों की जानकारी नहीं है या फिर उन्हें इसमें दिलचस्पी नहीं है। इस दौरान कई बाइकों में युवक ट्रिपलिंग करते हुए निकले, लेकिन उन्हें रोकने की कोशिश तक नहीं की गई।
चौकीदारी के लिए झिकझिक
चकराता रोड पर एक चौकीदार मिला। नाम गोपाल बताया। बातचीत हुई तो गोपाल अपना दर्द बयां करने लगा। कहा, कोई घटना होने पर उन्हें पुलिस की डांट सुननी पड़ती है।
जबकि रात-रातभर जागकर चौकीदारी करने के बाद महीने के आखिर में रुपये मांगने पर लोगों से झिकझिक करनी पड़ती है। कुछ लोग तो रुपये देने के लिए कई दिन तक घुमाते रहते हैं।
वारदात से नहीं सबक
कैपरी ट्रेड सेंटर के पास मोबाइल शोरूम में हुई चोरी की वारदात से न तो पुलिस, न ही दुकानदारों ने सबक सीखा है।
रात को यहां कोई चौकीदार नहीं था। अमर उजाला रिपोर्टर ने सेंटर में जाकर काफी आवाजें दीं, लेकिन कोई नहीं आया।
वीवीआईपी सुरक्षा रामभरोसे
वीवीआईपी यमुना कालोनी की सुरक्षा भी रामभरोसे है। रात डेढ़ बजे रिपोर्टर यहां सुरक्षा का हाल जानने पहुंचा। पूरी कालोनी में सन्नाटा पसरा था।
सुरक्षा के नाम पर न तो कोई सिपाही और न ही कोई चौकीदार यहां नजर आया। विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल के आवास पर जरूर एक सिपाही बैठा था।
सचिवालय का जवान मुस्तैद
रात 12:30 बजे पुलिस मुख्यालय का दरवाजा बंद था, लेकिन बाहर की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए कोई जवान तैनात नहीं था।
थोड़ा आगे बढ़े तो सचिवालय गेट का जवान उम्मीद से ज्यादा सतर्क नजर आया।
रिपोर्टर गेट के पास पहुंचा तो पेड़ की आड़ में बैठे जवान ने आवाज लगाई ‘इतनी रात को यहां क्या कर रहे हो आप, कोई बात है क्या?’ रिपोर्टर ने परिचय दिया तो वह फिर ड्यूटी पर चला गया।
चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद फिर से अपराध और अपराधियों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। मतगणना ड्यूटी की वजह से थानों में सिपाही कम है। रात में पुलिस मौजूदगी सुनिश्चित कराई जाएगी। चेकिंग में नदारद पाए जाने पर पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
- अजय रौतेला, एसएसपी