अमर उजाला संवाद में बोले युवा नागरिक, बस अब हद हो गई, कहीं और बना लो नया देहरादून
- अमर उजाला के बेस संवाद में युवा नागरिकों ने की दून की सबसे बड़ी चुनौतियों पर की चर्चा
- किसी ने यातायात, किसी ने संकरी सड़क को बताया बड़ी समस्या, सिस्टम की लापरवाहियां भी की उजागर
- समस्याएं दूर करने के लिए कई के पास नए दून का सपना, हर के मन में टीस अब मत छेड़ो पुराने दून को
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
किसी पत्थर को मूर्ति बनाने के लिए उस पर निश्चित बल और संख्या में हथौड़े मारे जा सकते हैं। इससे ज्यादा में वह टूट जाएगा। उसके बाद वह न मूर्ति बनेगी और न पत्थर बचेगा। रह जाएंगे तो कुछ कंकर। ऐसा ही हाल दून का हो चुका है। सहूलियत और स्मार्ट बनाने के नाम पर इसमें अब तराशने की गुंजाइश नहीं बची।
दून का यही दर्द बुधवार को इससे प्रेम करने वाले वाशिंदों ने अमर उजाला के बेस संवाद कार्यक्रम में बयां किया। युवा नागरिकों ने न सिर्फ समस्याएं गिनाईं, बल्कि हल करने के उपाए भी बताए। लेकिन, लगभग सभी ने इस बात पर जोर दिया कि अब यहां छेड़छाड़ करने की बजाय नए दून को कहीं और बसाया जाए।
कार्यक्रम का विषय था ‘बेहतर दून की सबसे बड़ी चुनौतियां’। इसमें चार मुद्दों को रखा गया। जिनमें पहला ‘संकरी सड़कें’, दूसरा ‘जल स्रोतों का वास्तविक स्वरूप बिगड़ना’, तीसरा ‘बेतहाशा अतिक्र्रमण’ और चौथा ‘पब्लिक ट्रांसपोर्ट की बदहाली’ रहा। अलग-अलग क्षेत्रों से पहुंचे युवा नागरिकों ने इन सब पर बेबाकी से राय रखी। चर्चा में कुछ और भी ऐसी समस्याएं सामने आईं, जो अब इतनी बड़ी हो गईं हैं, जिनका इलाज मुश्किल है।
इनमें सबसे बड़ी समस्या के रूप में यातायात, ड्रेनेज सिस्टम, कूड़ा निस्तारण आदि सामने आई। कई युवाओं ने इन सबके लिए सरकार को दोषी ठहराया। युवा नागरिकों की हर बात में सलाह तो थी, दून का दर्द भी था। हर व्यक्ति ने इस बात पर जोर दिया कि दून अब और प्रयोगों को सहन नहीं कर सकता। न यहां की सड़कें चौड़ी हो सकती हैं और न लोगों को बेघर बनाने की गुंजाइश बची है। यदि सरकार इसका हल निकालना है तो उसे नए दून को कहीं और बसाना होगा।
पहले ही हालत भांप जाते तो न होता यह हाल
वकील, शिक्षक, डॉक्टर, आर्किटेक्ट की चर्चा में अतिक्रमण को भी समस्याओं के केंद्र में रखा। सरकार को अब अतिक्रमण दिख रहा है, लेकिन जब हो रहा था तब कहां थी? नदियों और नहरों को ढकने की बात हो रही है, लेकिन इन पर अतिक्रमण किसने कराया? क्या इसके लिए सिस्टम को दोषी नहीं ठहराया जा सकता? यदि इसे 20 साल पहले भांप लिया जाता तो दून का ऐसा हाल न होता।
सिटी तो स्मार्ट हो जाएगी, दूनवासी कब स्मार्ट होंगे
युवा नागरिकों ने कई समस्याओं को गिनाते हुए खुद की जिम्मेदारी भी तय की। कहा यहां-वहां बड़े-बड़े पार्क, भवन आदि बनाकर इस दून को तो स्मार्ट बना देंगे। यह काम तो सरकार और विभाग कर देंगे। लेकिन, यहां के लोग स्मार्ट कब होंगे? इन्हें स्मार्ट बनाने के लिए कोई सरकार काम नहीं करेगी। यह काम खुद करने होंगे।
बोले जागरूक शहरी
-रिचा कुकरेती, डाइटिशियन
राजधानी में बदहाल यातायात व्यवस्था बड़ी समस्या है। इसमें सुधार की गुंजाइश है। यदि शहर को चुनिंदा शहरों में शामिल कराना है तो यातायात व्यवस्था में परिवर्तन करना होगा।
-अर्चना सिंगल शिक्षिका
नदियों के किनारे अतिक्रमण बहुत बड़ी समस्या है। शहर की यातायात व्यवस्था का भी बुरा हाल है। दोनों समस्याओं के निराकरण के लिए सरकार को तत्काल कदम उठाने चाहिए।
-मोहम्मद यूनुस, एडवोकेट
दून की सड़कों पर जगह-जगह पार्किंग होने से यातायात व्यवस्था चरमरा गई है। शहर में पेयजल किल्लत न हो इसके लिए सरकार को रेन वाटर हार्वेस्टिंग को बढ़ावा देना चाहिए।
-अभय गोयल
जिस तरीके से राजधानी में जनसंख्या बढ़ रही है इसके लिए सरकार को नई नीतियां जल्द बनानी होंगी। दून से थोड़ा हटकर एक और शहर बनाने की योजना तैयार करनी चाहिए।
-स्वप्निल सिन्हा, सामाजिक कार्यकर्ता एवं एनजीओ संचालक
राजधानी में पानी की निकासी और अतिक्रमण सबसे बड़ी समस्या है। इसके निराकरण के लिए ठोस नीतियां बनानी होंगी। साथ ही इस संबंध में शहरियों को भी जागरूक करना होगा।
-शिवा वर्मा, एडवोकेट
अतिक्रमण व बदहाल यातायात व्यवस्था बड़ी समस्या है। इसके लिए ठोस कदम उठाने होंगे। योजनाएं तो लागू की जा रही हैं लेकिन मॉनिटरिंग न होने से यह धरातल पर नहीं उतर पा रही।
-त्रिशला मलिक, एडवोकेट
टूटी सड़कें व बदहाल ड्रेनेज सिस्टम बड़ी समस्या है। मुख्य मार्गों पर बने गड्ढों तक की मरम्मत नहीं हो रही है। इसके लिए सरकार व संबंधित विभागों को तत्काल कदम उठाने चाहिए।
-रवीना खुराना, होटल मैनेजर
इन्होंने भी रखे सुझाव
-सौरभ नेगी, होटल प्रबंधक
शहर में जिस गति से आबादी बढ़ रही है उसकी तुलना में बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। सरकार को राजधानी दून से हटकर एक और दून शहर बसाना होगा।
-डॉ. मानसी रस्तोगी, फैशन डिजाइनर एवं सामाजिक कार्यकर्ता
यातायात व्यवस्था दून की सबसे बड़ी समस्या है। अतिक्रमण दूसरे नंबर की समस्या है। इनके निराकरण के लिए सरकार, शासन व प्रशासन को नई नीति बनाकर धरातल पर उतारना होगा।
-प्रिया गुलाटी
शहर का कोई ऐसा कोना नहीं जहां अतिक्रमण की समस्या न हो। जाम की समस्या भी बड़ी है। इनके निराकरण की जरूरत है, वरना वह दिन दूर नहीं जब यहां रहना दूभर हो जाएगा।
-नलिनी तनेजा, इवेंट मैनेजमेंट मैनेजर एवं एनजीओ संचालिका
दून व ऋषिकेश में यातायात व्यवस्था बड़ी समस्या है। दोनों को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं, लेकिन इन्हें धरातल पर उतारने की गति धीमी है।
-अंकिता गुप्ता, आर्किटेक्ट
कुछ साल से दून के विकास मेें तेजी आई है। आबादी भी तेजी से बढ़ी है। इसके चलते यातायात, अतिक्रमण की समस्याएं बढ़ी। इसके लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है। -रॉबिन विन्सन।
दून में अतिक्रमण और यातायात व्यवस्था सबसे बड़ी समस्या हैं। लेकिन सरकार, शासन-प्रशासन के भरोसे नहीं रहा जा सकता। इसके लिए सबको जागरूक बनाना होगा।
-अनुकृति गुसाईं, सॉफ्टवेयर इंजीनियर