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अमर उजाला संवाद : कानून है तो उसका दुरुपयोग भी है, लेकिन इसे रोकना पुलिस के हाथ में

Fri, 07 Feb 2020 10:58 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Fri, 07 Feb 2020 10:58 PM IST
सार

  • कानून के क्षेत्र में सबसे बड़ी जिम्मेदारी पुलिस की 
  • कानून है तो दुरुपयोग भी होगा, लेकिन इन्हें रोकना पुलिस की जिम्मेदारी

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amar ujala samvad : police can use misuse of law
Riddim Agarwal - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कानून है तो उसका दुरुपयोग भी होता है। लेकिन, इसे रोकना पुलिस के हाथ में होता है। क्योंकि, कानून के क्षेत्र में पुलिस की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है। किसी भी अपराध में सिर्फ पुलिस उसे नजदीक से देखती है, जिसके बाद सुबूतों और गवाहों का दौर चलता है। ऐसे में यदि अपराधी छूट जाते हैं तो इसमें चूक भी पुलिस की मानी जाती है।

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संवाद कार्यक्रम में चर्चा इस बात पर भी हुई कि महिला अपराध के मामलों में महिलाएं केवल हथियार के रूप में इस्तेमाल होती हैं। इसके लिए दहेज का कानून विवादों में रहा है। अब दुष्कर्म और छेड़छाड़ जैसे मामलों में ऐसा कुछ देखने को मिलता है। कुछ दिन पहले सिल्वर स्क्रीन पर फिल्म सेक्शन 375 में भी कुछ यही दिखाने का प्रयास किया था। वक्ताओं ने कहा कि ऐसे मामलों में पुलिस पर भी सवाल उठते हैं। 
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डीआईजी रिदिम अग्रवाल ने बताया ऐसे मामलों में पुलिस की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। अपराध की सूचना से अदालत में फैसले तक हर चीज पुलिस के सामने होती है। सही मायनों में पुलिस को प्राथमिक जांच के बाद पता चल जाता है कि वास्तव में गुनहगार कौन है? लिहाजा, पुलिस पहले से इस बात का फैसला अपने मन में बनाकर चलती है कि किसे सजा होनी चाहिए और कहां कानून का दुरुपयोग किया जा रहा है। इन्हीं मामलों को देखते हुए अब एफआईआर के नियम भी बदल दिए हैं। कई अपराधों की सूचना में एफआईआर से पहले जांच जरूरी होती है। 
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महिलाओं को खुद आना होगा सामने 

महिला अपराधों के मामलों में कई बार यह देखने में आता है कि मुकदमा विशेष किसी को फंसाने या रंजिशन दर्ज कराया गया था। इनमें भी ज्यादातर महिलाओं या बच्चियों को यह पता नहीं होता कि उन्हें हथियार बनाया जा रहा है। ताकि, कोई खुन्नस निकाल सके। ऐसे में अब यह जागरूकता के माध्यम से दूर किया जा सकता है। यदि इनमें जागरूकता आएगी तो वे इस तरह हथियार बनने से बच सकती हैं। 

डायल 112 एप है महिलाओं का ‘साथी’

महिलाएं अपनी समस्याएं किस प्लेटफार्म पर रखें जागरूकता के अभाव में उन्हें इसकी जानकारी नहीं होती। डायल 112 एप को महिलाओं का सच्चा साथी कहा जा सकता है। लेकिन, ज्यादातर महिलाओं को इसकी भी जानकारी नहीं है। 

जागरूकता की जब संवाद में बात हुई तो तमाम सवाल उठे। महिलाओं ने कहा ज्यादातर महिलाओं को यही पता नहीं होता कि उनके लिए क्या-क्या योजनाएं चलाई जा रही हैं? किस-किस योजना में उन्हें क्या-क्या मदद मिल सकती है? पुलिस उनके लिए क्या कर रही है? महिलाओं के इन सवालों का डीआईजी रिदिम अग्रवाल ने जवाब दिए। सबसे पहले उन्होंने डायल 112 एप के बारे में विस्तार से बताया।

कहा, डायल 112 मोबाइल एप में बहुत से एडवांस फीचर हैं। यदि कोई महिला अपने फोन पर एप के माध्यम से 112 का डायल पैड तीन बार टच करे तो उसकी लोकेशन कंट्रोल रूम में तुरंत चली जाती है। यह सूचना सिर्फ पुलिस तक ही नहीं बल्कि उस क्षेत्र में एक्टिव लगभग हर नंबर के पास पहुंच जाती है। इससे तत्काल यह पता चल जाता है कि किस क्षेत्र में कोई महिला परेशान है या उसे परेशान किया जा रहा है। महिला ही नहीं बल्कि ये किसी भी पीड़ित के लिए फीचर है। 

इन नंबरों की भी दी जानकारी 
- 181 वन स्टॉप सेंटर का कॉल सेंटर
- 1098 महिला हेल्पलाइन 
- डायल 112 

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