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हड़बड़ाएं नहीं, जल्द खुलेंगे नए प्रदूषण जांच केंद्र, फिलहाल नहीं की जा रही वाहनों की चेकिंग

Thu, 19 Sep 2019 06:12 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Thu, 19 Sep 2019 06:12 PM IST
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Amar ujala Samvad on Mv Act 2019
संवाद में मौजूद लोग - फोटो : अमर उजाला

केंद्र सरकार की ओर से नया मोटर व्हीकल एक्ट - 2019 लागू कर दिया गया है। लेकिन नए मोटर व्हीकल एक्ट में जो प्रावधान तक किए गए हैं उसे लेकर पूरे देश में हायतौबा की स्थिति बनी हुई है। 

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देश में एक तबका जहां नए मोटर व्हीकल एक्ट में किए गए प्रावधानों को ठीक बता रहा है तो वहीं एक वर्ग ऐसा भी है जो इन एक्ट के प्रावधानों को हिटलरशाही फरमान बता रहा है। केंद्र सरकार की ओर से एक सितंबर से एक्ट लागू किए जाने के बाद उत्तराखंड समेत तमाम कई राज्य सरकारों ने जुर्माने की दरों में 50 से 75 फीसदी तक कमी का प्रस्ताव पारित कर आमजन को थोड़ी राहत देने की कोशिश की है, लेकिन राहत देने के बावजूद जुर्माने की दरें हजारों में होने की वजह से लोग इसे भी नाकाफी बता रहे हैं।
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नए ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने या फिर नवीनीकरण के साथ ही गाड़ियों के पंजीकरण को लेकर जहां परिवहन कार्यालयों में लोगों की लंबी कतारें हैं और उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ रहा हैं, वहीं गाड़ियों के प्रदूषण की जांच कराना किसी जंग से कम नही है। राजधानी में प्रदूषण जांच केंद्रों की संख्या महज 19 होने की वजह से जबरदस्त मारामारी है।
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आलम यह है कि एक अदद गाड़ी की जांच कराने को लेकर लोगों को भोर में तीन बजे उठकर न सिर्फ लाइन में लगना पड़ रहा हैं, वहीं कई कई घंटे का इंतजार करना पड़ रहा है। तमाम दस्तावेजों को जुटाने की जुगत में जुटे शहरियों को इस बात का डर सता रहा है कि यदि पकड़े गए तो हजारों की चपत लगते देर नहीं लगेगी। फजीहत अलग से झेलनी पड़ेगी। हालांकि पुलिस व परिवहन विभाग के अधिकारी इस बात का दिलासा दे रहे हैं कि अभी कोई जांच नही की जा रही है।

काफी समय है और दस्तावेजों को दुरुस्त करवा लें, लेकिन शहरियों पर मोटर व्हीकल एक्ट का डर इस कदर हावी है कि कोई किसी की कुछ भी सुनने को तैयार नही है। ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने या फिर गाड़ियों की प्रदूषण जांच कराने को लेकर लाइनों में लगे लोग सरकारी तंत्र की सुस्ती पर भी जमकर सवाल उठा रहे हैं। लोगों का मानना है कि सरकार व उनके मुलाजिमों को पहले अपना तंत्र सुधारना चाहिए था फिर एक्ट को लागू करना चाहिए था। अमर उजाला की ओर से आयोजित संवाद में परिवहन विभाग व पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में जब सार्वजनिक परिवहन से जुड़े कई यूनियनों के पदाधिकारियों और आम शहरियों से रायशुमारी की गई तो उन्होंने कुछ इस अंदाज में अपनी प्रतिक्रियाएं दी।

डरें नहीं, कानून का पालन करें

नया मोटर व्हीकल एक्ट लागू होने के बाद से ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए आरटीओ और प्रदूषण जांच के लिए केंद्रों पर वाहनों की लंबी कतारें लगी हुई हैं। एक सितंबर से लोग फजीहत झेल रहे हैं। इन सबके बीच बृहस्पतिवार को अमर उजाला संवाद में शहरियों के सवालों का सामना करने पहुंचे परिवहन और पुलिस अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि फिलहाल प्रदूषण व इंश्योरेंस जैसे दस्तावेजों को लेकर अभियान नहीं चलाया जा रहा है। ऐसे में किसी को हड़बड़ाने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है। जल्द नए प्रदूषण जांच केंद्र भी खोले जा रहे हैं।

बृहस्पतिवार को अमर उजाला संवाद में शिरकत करने पहुंचे परिवहन सेवा से जुड़े विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों, पेट्रोल पंप मालिकों, प्रदूषण जांच केंद्र संचालकों और शहरियों ने एआरटीओ अरविंद पांडे और पुलिस अधीक्षक यातायात प्रकाश चंद्र आर्य को अपनी-अपनी समस्याओं से अवगत कराया। दोनों अधिकारियों ने साफ शब्दों में कहा कि नए एक्ट को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है। गाड़ी से संबंधित तमाम दस्तावेजोें को साथ रखने के साथ ही कानूनों का पालन करने वालों को कोई परेशानी नहीं होगी। अधिकारियाें ने दावा किया कि नया एक्ट आमजन की जिंदगी बचाने के लिए बनाया गया है। आने वाले समय में इसके सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे। 

10 लाख वाहन, 19 प्रदूषण जांच केंद्र, कैसे बनेगी बात
देहरादून जिले में 10 लाख के करीब छोटे-बड़े वाहन हैं। इनकी प्रदूषण जांच के लिए राजधानी में महज 19 केंद्र संचालित हैं। इनके संचालकों की मानें तो पेट्रोल गाड़ी की जांच के लिए औसतन डेढ़ मिनट और डीजल गाड़ी की जांच के लिए औसतन आठ मिनट का समय लगता है। आंकड़ों के मुताबिक पिछले 18 दिन के भीतर महज 60 हजार वाहनों की जांच हो पाई है। ऐसे में सभी वाहनों की जांच के लिए कई माह लगेंगे।

जुर्माने की जो दरें तय की है वे बहुत अधिक है

नए मोटर व्हीकल एक्ट में सरकार ने जुर्माने की जो दरें तय की है वे बहुत अधिक है। जुर्माने की दरों में एक साथ 10 गुना से अधिक की वृद्धि को किसी भी सूरत में जायज नहीं ठहराया जा सकता है। हालांकि राज्य सरकार ने कैबिनेट में प्रस्ताव पारित कर जुर्माने की दरों में 50 से 75 फीसदी तक की कमी की है कि लेकिन इसके बावजूद दरें अभी भी बहुत ऊंची है। सरकार को जुर्माने की दरों को लेकर नए सिरे से विचार विमर्श करना चाहिए।
- विजयवर्धन डंडरियाल, अध्यक्ष, देहरादून सिटी बस सेवा महासंघ

सरकार ने जो नया मोटर व्हीकल एक्ट लागू किया है उसमें तमाम अच्छाइयां हैं। आने वाले समय में इसके सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे। लेकिन बेहतर होता कि सरकार पहले अपने इंफ्रास्ट्रक्चर को विकसित करती और फिर एक्ट को लागू करती। सरकार पहले नए प्रदूषण जांच केंद्र खोलने के साथ ही सड़कों की स्थिति सुधारती और फिर एक्ट को लागू करती तो बेहतर होता। राज्य सरकार को गोवा सरकार के उस फैसले से सबक लेना चाहिए, जिसने एक्ट लागू करने से पहले सड़कों की स्थिति सुधारने का फैसला किया है।
- सुशील कुमार सिंह, वरिष्ठ स्तंभकार एवं निदेशक, प्रयास आईएएस स्टडी सर्किल

गाड़ियों की प्रदूषण जांच को लेकर जो मारामारी मची है। उसे देखते हुए सरकार व परिवहन विभाग के अधिकारियों केा तत्काल राजधानी समेत पूरे राज्य में अधिक से अधिक प्रदूषण जांच केंद्र खोलने चाहिए। ताकि गाड़ियों के प्रदूषण की जांच तेजी से की जा सके। लेकिन सरकार व विभागीय अधिकारी नए प्रदूषण जांच केंद्रों को खोलने को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं। सरकारी तंत्र को और अधिक सक्रिय होना होगा।
- राम सिंह, अध्यक्ष आटो रिक्शा यूनियन

सरकार ने जो नया मोटर व्हीकल एक्ट लागू किया है वह ठीक है। भारी भरकम आर्थिक जुर्माने के डर से लोग कानून का पालन करेंगे। लेकिन ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने व गाड़ियों की प्रदूषण जांच कराने को लेकर लोगों को जिन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उसे देखते हुए यही लगता है कि सरकार की तैयारियां न के बराबर है। लोगों की मुसीबतों को देखते हुए अधिक से अधिक प्रदूषण जांच केंद्र खोलने की जरूरत है।
- डीएन श्रीवास्तव, निदेशक सागर मोटर्स

सरकार ने जो मोटर व्हीकल एक्ट लागू किया है उसमें तमाम प्रावधान सही है। यदि भारी भरकम जुर्मानों से बचना है तो गाड़ी से जुड़े तमाम दस्तावेजों को दुरुस्त करने के साथ ही परिवहन कानूनों का पालन करना ही होगा। अलबत्ता नए एक्ट को लागू करने से पहले यदि केंद्र व राज्य सरकारें इससे जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी ध्यान देती तो बेहतर होगा।
- गौरव अग्रवाल, प्रबंध निदेशक, शक्ति

गाड़ियों के प्रदूषण को लेकर मची मारामारी को देखते हुए राजधानी के साथ ही तमाम जगहों पर नए प्रदूषण जांच केंद्र खोलने की तत्काल जरूरत हैं। जिन लोगों ने जांच केंद्र खोलने के लिए अनुमति मांगी है, प्रक्रिया को शिथिल करते हुए उन्हें तत्काल अनुमति दी जाए। वरना शहरियों को गाड़ियों की जांच कराने को लेकर कमोवेश इसी स्थिति का सामना तीन चार माह करना पड़ सकता है।
- पंकज, संचालक

नए मोटर व्हीकल एक्ट में कई कड़े प्रावधान किए गए हैं जो उचित नहीं है। जुर्माने की दरों को कई गुना बढ़ा देना किसी भी तरह जायज नहीं है। परिचालकों के लिए शैक्षिक अनिवार्यता को भी सरकार खत्म करे। एक्ट के प्रावधानों को और अधिक शिथिल बनाने के लिए राज्य सरकार को अपने स्तर पर विचार करना चाहिए।
- भगवान सिंह पंवार, अध्यक्ष, मैक्सी कैब एसोसिएशन

केंद्र सरकार ने आधी अधूरी तैयारियों के साथ मोटर व्हीकल एक्ट लागू कर दिया। एक तरफ खराब सड़कों की वजह से आए दिन दुर्घटनाएं हो रही है और लोगों को जान गंवानी पड़ रही है। वहीं सरकार मोटर व्हीकल एक्ट की आड़ में लोगों पर भारी भरकम जुर्माना थोप रही है जो उचित नहीं है। सरकार को इंफ्रास्ट्रक्चर को विकसित करने के साथ ही एक्ट को लागू करना चाहिए था।
- संजय अरोड़ा, अध्यक्ष, विक्रम जन कल्याण समिति

सरकार ने काफी सोच विचार करने के उपरांत ही मोटर व्हीकल एक्ट को लागू किया है। इसके सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे। हां यह सच है कि ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने व प्रदूषण जांच कराने को लेकर कुछ दिक्कतें हो रही हैं जो आने वाले दिनों में सामान्य हो जाएगी। लोगों को नए मोटर व्हीकल एक्ट का पालन करने के लिए आगे आना चाहिए।
- विनय गोयल, भाजपा महानगर अध्यक्ष

यदि शहरों में प्रदूषण की बदहाल स्थिति पर काबू पाना है तो ई रिक्शा को बढ़ावा देना होगा। एक तरफ सरकार मोटर व्हीकल एक्ट लागू कर रही है। वहीं दूसरी ओर सड़कों की स्थिति खराब है। जिसके चलते आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। लोगों को जान गंवानी पड़ रही है। सरकार को एक्ट लागू करने के साथ ही सड़कों की स्थिति को सुधारना होगा।
- अनुज जैन, अध्यक्ष, ई रिक्शा डीलर्स एसोसिएशन 

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