फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Amar ujala Samvad on dengue in dehradun

अमर उजाला संवाद: डेंगू के खात्मे को सरकारी प्रयास नाकाफी, जन सहभागिता की दरकार 

Thu, 19 Sep 2019 09:48 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Thu, 19 Sep 2019 09:48 AM IST
विज्ञापन
Amar ujala Samvad on dengue in dehradun
अमर उजाला संवाद - फोटो : अमर उजाला

डेंगू बुखार का प्रकोप विकराल होता जा रहा है। हजारों की संख्या में मरीज निजी और सरकारी अस्पतालों में भर्ती हैं। डेंगू से मौतें भी हो रही हैं। डेंगू को लेकर हाहाकार की स्थिति है। एक चम्मच पानी भी अगर ज्यादा दिन तक कहीं जमा हो तो वह डेंगू मच्छर के लार्वा को पनपने के लिए काफी है।

विज्ञापन


यह पानी फ्रिज की ट्रे-कूलर आदि से लेकर सड़क के गड्ढों तक में जमा हो सकता है। सरकारी विभाग जागरुकता और फॉगिंग के दावे तो कर रहे हैं लेकिन धरातल पर कुछ असर नहीं दिख रहा है।
विज्ञापन


सामाजिक क्षेत्र से जुड़े तमाम लोगों का कहना है कि डेंगू फैलाने वाले मच्छर को नियंत्रित करने के सरकारी प्रयास नाकाफी है। आरोप-प्रत्यारोप तो इसका समाधान नहीं। फिर क्या किया जाए? जो डेंगू जैसे बुखार की रोकथाम और लोगों में इसे लेकर व्याप्त भ्रम और खौफ को दूर किया जाए। इसके लिए अमर उजाला की ओर से पटेलनगर स्थित कार्यालय में संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें कई महत्वपूर्ण बातें निकलकर सामने आईं।... 

विज्ञापन
विज्ञापन

डेंगू कोई नया तो हुआ नहीं, बल्कि हर साल हो रहा है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम समेत अन्य संबंधित बरसात शुरू हो से पहले अलर्ट क्यों नहीं हो जाते हैं। सड़कों पर गड्ढे हैं, जिनमें पानी जमा हो जाता है। यहां भी मच्छर का लार्वा पनपने का भय रहता है। शुरुआत में जरूरी प्रयास हो जाएं तो इतनी खतरनाक स्थिति ही न बने। 
- डॉ. महेश भंडारी, अध्यक्ष दून रेजीडेंट वेलफेयर फ्रंट

इस बार डेंगू पीड़ितों की संख्या दोगुनी हो गई है। रायपुर क्षेत्र से जब मरीज आने शुरू हुए तो उस क्षेत्र विशेष में क्यों नहीं सरकारी विभागों ने विशेष सघन अभियान चलाया, ताकि लार्वा को नष्ट कर मच्छर पनपने नहीं दिया जाता और मच्छर को वहां से आगे जाने से रोका जाता। सरकार नहीं चाहती कि असल आंकड़े सामने आएं, इसलिए निजी लैब की रिपोर्ट को नहीं मानती।
- डॉ. विनय राय, चिकित्सा अधीक्षक श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल

सरकार और सरकारी विभागों को मालूम है कि डेंगू कब शुरू होता है। वर्ष 2016 में डेंगू कम था। तब भी कुछ मौतें हुई थी। इसके बावजूद अब की आर सरकार की ओर से कोई तैयारी नहीं की गई। सरकार सिर्फ सरकारी अस्पतालों के आंकड़े ही प्रस्तुत कर रही है। इस समय प्रदेश में 50 हजार से अधिक लोग डेंगू से पीड़ित हैं। इसमें भी सर्वाधिक संख्या देहरादून में है। 
- सूर्यकांत धस्माना, वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष, कांग्रेस

विभागों को पता है कि डेंगू कब फैलता है। शासन इससे निपटने के लिए पूरी तरह नाकाम है। विभाग ने जरूर तैयारी की होगी, लेकिन आबादी के अनुपात में यह तैयारी ऊंट के मुंह में जीरा के समान है। सरकारी से लेकर निजी अस्पताल फुल हैं। मरीज बेंच पर लेटकर इलाज कराने को मजबूर हैं। ऐसे में देहरादून में स्थित 43 केंद्रीय संस्थानों की अस्पताल और डिस्पेंसरी में सरकार आमजन को उपचार के लिए पहल कराएं।
- रविंद्र जुगरान, भाजपा नेता

बरसात शुरू होने पर भी विभागों ने डेंगू मच्छर और इसके प्रकोप को रोकने के लिए पूरी तैयारी नहीं की थी। समय रहते जागरूक करने की जरूरत थी। हमें भी खुद जागरूक रहने की जरूरत है ताकि मच्छर के लार्वा को पनपने की स्थिति न पैदा हो।
- एलआर कोठियाल, संस्थापक अध्यक्ष, रेजीडेंट वेलफेयर सोसायटी श्री बद्री केदार प्राचीन आराघर

पपीता, गिलोय आदि फलों में नेचुरल रूप से एंटी ऑक्सीडेंट होते हैं। एंटी ऑक्सीडेंट बॉडी के लिए डिफेंस का काम करते हैं। अगर कोई इन चीजों को खाता है तो उसमें डेंगू के वायरस से लड़ने की क्षमता बढ़ती है। वायरस शरीर में कम होगा तो प्लेटलेट्स अपने आप बढ़ जाएंगी। हालांकि क्लीनिकल रिसर्च इसे नकारता है।
- डॉ. नारायणजीत, एचओडी मेडिसन विभाग, दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल

डेंगू एक इमीन्योलॉजिकल डिजिज है। एक आम इन्फ्लुएंजा की बीमारी है। डेंगू वायरस शरीर में पांच दिन में खत्म हो जाता है। यह वायरस जब हमारी बाडी के अगेंस्ट रिएक्ट कर रहा हो तब जाकर डेंगू मरीज सीरियस होता है। एंटीबाडी वाला रिएक्शन होता है, तो हम डेंगू के वायरस को खत्म करने का प्रयास करते हैं। 
डॉ. एनएस बिष्ट, सीनियर फिजिशियन, कोरोनेशन अस्पताल

पूर्व के वर्षों में भी डेंगू होता रहा है। सरकार तब भी थी अब भी है। तब किसी और की रही होगी आज किसी और की। अधिकारी तो वे ही हैं। मंत्री विधायक क्यों नहीं व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने आगे आते हैं। डेंगू पर 70 फीसदी व्यवस्था निजी अस्पतालों ने संभाली हुई हैं। अगर इसे अलग कर दें तो कितनी हालत बदतर हो जाएगी। इसलिए सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं को दुरुस्त करने की जरूरत है। 
- कुंवर जपिंदर सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता

पपीता, गिलोय के इस्तेमाल और आयुर्वेद को लेकर जो भ्रांति फैलाई जा रही है वह पूरी तरह गलत है। अगर कोई चिकित्सक किसी बीमारी या इलाज के बारे में नहीं जानता तो उसे आप अवैज्ञानिक नहीं कह सकते हैं। आयुर्वेद बहुत पुरानी और आजमायी चिकित्सा पद्धति है। योग्य आयुर्वेद चिकित्सक से चैकअप कराकर डेंगू मरीज को इससे ठीक किया जा सकता है।
- डॉ. नवीन जोशी, एसोसिएट प्रोफेसर उत्तराखंड आयुर्वेद यूनिवर्सिटी

2016 में हमने पैशेंट ट्रीट किए। पहले गिलोय को डाइरेक्ट इस्तेमाल किया जाता था अब उसकी टैबलेट आ रही है। इसे करीब 50 कंपनियां बना रही हैं। 80 प्रतिशत देहरादून के एलोपैथिक डॉक्टर इस दवा को लिख रहे हैं।
- डॉ. जेएन नौटियाल, वरिष्ठ आयुर्वेद चिकित्सक दून अस्पताल 

हमने सरकारी स्कूलों में तो एडवाइजरी जारी कर दी लेकिन एजूकेशन हब कहे जाने वाले दून प्राइवेट स्कूलों में कुछ नहीं किया। सभी को इसमें प्रयास करने चाहिए। सभी को सभ्य नागरिक की जिम्मेदारी निभाई होगी। एसोसिएशन की तरफ से भी कुछ नहीं किया गया। सरकार को इसके लिए पूरी तरह से जिम्मेवार नहीं ठहरा सकते। 
- डॉ. परवेज, चेस्ट फिजिशियन एवं पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट

होम्योपैथी डेंगू में प्रीवेंटिव है। दूसरे डाक्टर इनकार करते हैं, जो गलत है। समय पर सतर्क हो जाएं। डेंगू होने से पहले ही बचाव के लिए होम्योपैथी दवा बहुत कारगर हैं। 99.99 प्रतिशत मरीजों को इसका फायदा होता है। डेंगू होने के बाद भी होम्योपैथी में इसका इलाज संभव है। इसके लिए अलग-अलग लक्षणों के आधार पर अलग दवाएं हैं। विशेषज्ञ होम्योपैथी डाक्टर को दिखाकर ही दवा लें।
- डॉ. ममता बंसल, होम्योपैथिक क्लीनिक

सिर्फ सिस्टम को कोसने से ही कुछ नहीं होगा। हम भी सिस्टम का हिस्सा ही हैं। शिवसेना ने खुद फॉगिंग मशीनें खरीदी हैं। हम खुद ही जनता के बीच जा रहे हैं। सरकार को भी इस तरह के संवाद कराने चाहिए। सड़कों पर गड्ढे हैं वहां पानी जमा है, इससे भी मच्छर के लार्वा पैदा हो रहे हैं। सभी को अपने-अपने स्तर पर मिलकर डेंगू को भगाने के लिए प्रयास करने होंगे।
- गौरव कुमार, प्रदेश प्रमुख शिवसेना

डेंगू के सीजन को देखते हमने शुरुआत से ही ब्लड डोनेशन के कैंप लगाने शुरू कर दिए थे। इसके लेकर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में बैठक भी हुई थी। ब्लड डोनेशन के लिए आनलाइन रजिस्ट्रेशन भी किए गए। ताकि डेंगू के चलते ब्लड के लिए लोगों को ज्यादा भटकना न पड़े।
- डॉ. एमएस अंसारी, महासचिव, इंडियन रेडक्रास उत्तराखंड

बरसात की शुरुआत में ही डेंगू को लेकर एडवाइजरी जारी कर दी गई थी। जागरुकता अभियान के तहत इस सीजन में 1.25 लाख घरों में आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से हमारी टीमें अब तक पहुंच चुकी हैं। जहां लार्वा सर्वे किया गया और जागरुकता के लिए ढाई लाख पम्फलेट भी बांटे गए। नगर निगम के सहयोग से लार्वा को नष्ट भी किया गया। लोग अपने फ्रिज कूलर तक में जमा पानी नहीं बदल रहे हैं। लोगों को भी जागरूक होना होगा।
- सुभाष जोशी, जिला वैक्टर जनित रोग नियंत्रण अधिकारी  

नौ मई को डेंगू से संबंधित एडवाइजरी जारी कर दी गई थी। जिला शिक्षाधिकारियों के माध्यम से सभी सरकारी स्कूल को भी अलर्ट किया गया। बच्चों को होमवर्क कार्ड में डेंगू को लेकर लिख दिया गया कि क्या करना है क्या नहीं। 18 जून को आरटीओ को जागरूकता के पम्पलेट दिए गए, जिन्हें सभी वाहनों में चस्पा कराने का अनुरोध किया गया। नगर निगम के साथ मिलकर लगातार अभियान चलाया जा रहा है।
- डॉ. नरेंद्र कुमार त्यागी, एडिशनल सीएमओ
 
बरसात शुरू होते ही विभाग ने एडवाइजरी जारी कर दी थी। लगातार जागरुकता और लार्वा को नष्ट करने का अभियान चलाया जा रहा है। लोगों को भी जागरूक होने की जरूरत है। यह साफ पानी में हो रहा है। हालात यह है कि बहुत सारे नौकरशाह से लेकर राजनीतिक लोगों के घरों में भी मच्छर के लार्वा मिले हैं। डेंगू को लेकर निगेटिव पब्लिसिटी बहुत हो जाती है। जबकि इसे लेकर जागरूक होने की जरूरत है।
- डॉ. दिनेश चौहान, एडिशनल सीएमओ

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed