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अब आपदा प्रभावित घर पर बनाएंगे गैस

Sun, 23 Mar 2014 01:14 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 23 Mar 2014 01:14 PM IST
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amar ujala foundation trainined disaster victims

आपदा में रोजी-रोटी का जरिया गवां चुके ग्रामीणों के लिए बायोगैस प्लांट आजीविका का माध्यम बनेंगे।

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अमर उजाला फाउंडेशन, हेस्को और जैव प्रौद्योगिकी विभाग नई दिल्ली ने आपदा प्रभावित जिलों के ग्रामीणों को बायोगैस प्लांट लगाने का प्रशिक्षण दिया।

प्रशिक्षण कार्यशाला में पहुंचे आपदा प्रभावित ग्रामीण

शनिवार को बांदल घाटी के घंतू सेरा गांव में आयोजित प्रशिक्षण कार्यशाला में उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, गुप्तकाशी और बांदल घाटी के घंतू सेरा, ताछिला, सरखेत, सीतापुर के आपदा प्रभावित ग्रामीण पहुंचे।

पहले दिन डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर यूनिवर्सिटी से आए प्रशिक्षक डॉ. बीबी वेकर ने ग्रामीणों के सहयोग से बायोगैस प्लांट बनाया। डॉ. वेकर ने बताया कि प्लांट बनाने के लिए जगह का चुनाव सबसे महत्वपूर्ण है।
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जगह की उपलब्धता और जरूरत के अनुरूप प्लांट छोटा-बड़ा हो सकता है। यह अधिक खर्चीला भी नहीं है। डा. वेकर ने बताया कि तीन लोग सिर्फ एक घंटे में प्लांट तैयार कर सकते हैं। प्लांट बनने के बाद घर से निकलने वाला वेस्ट मेटीरियल हर रोज इस प्लांट में डालना होता है।
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इस दौरान डॉ. दीप्ति पांडे, जय सिंह कैंतुरा, संजीव सिंह, अनमोल बिष्ट, उर्मिला देवी, दीपा, नीलम, किरन, प्रीति, अखिल, दिनेश आदि मौजूद रहे।

बायोगैस प्लांट के लिए सामग्री

सौ ईंट या पत्थर, प्लास्टिक टैंक, पच्चीस किलो सीमेंट, पीवीसी पाइप, एल्बो (मेटल), चेक नेट, रब वाशर, बैरल, आरी (दो छोटी, दो बड़ी)

केले के तने का करें प्रयोग
डॉ. बीबी वेकर ने बताया कि जिस स्थान पर खाना बनाया जाता है, वहां से 15 फुट की दूरी पर प्लांट लगाया जाना चाहिए। इससे तापमान अधिक बना रहता है।

सर्दियों में उत्पादन बढ़ाने के लिए स्टार्च मेटीरियल का प्रयोग करना चाहिए। दो किलो वर्मी कंपोस्ट (केंचुआ खाद) डालने से भी गैस का उत्पादन बढ़ सकता है।

बायोगैस प्लांट में मीथेन गैस की जरूरत होती है, जिसके लिए केले के तने का प्रयोग करना चाहिए। जिन क्षेत्रों केला अधिक होता है, वहां बायोगैस अधिक मात्रा में बनाई जा सकती है।

बायोगैस प्लांट पर्यावरण के लिहाज से लाभदायक है। गैस सिलेंडरों की लगातार बढ़ती कीमतों को देखते हुए भी ये प्लांट कारगर हो सकता है।

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