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अमर उजाला देहरादून को केसीके अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Sat, 18 Feb 2017 11:29 AM IST
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नारी निकेतन में एक संवासिनी के साथ रेप, गर्भपात और कुछ अन्य से अमानवीय अत्याचार का खुलासा कर आरोपियों को सलाखों के पीछे भिजवाने वाली अमर उजाला की टीम को 2015 का अंतरराष्ट्रीय कर्पूर चंद्र कुलिश अवॉर्ड मिलेगा।
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11 हजार डॉलर का यह प्रतिष्ठित पुरस्कार राजस्थान पत्रिका समूह के संस्थापक कर्पूर चंद्र कुलिश की स्मृति में प्रतिवर्ष दिया जाता है। शुक्रवार को जयपुर में विजेताओं की आधिकारिक घोषणा की गई।
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विजेता टीम में अमर उजाला देहरादून के क्राइम रिपोर्टर राकेश शर्मा, नलिनी गुसाईं, अभिषेक सिंह और गौरव मिश्रा शामिल हैं। कैश प्राइज के अलावा टीम के सभी सदस्यों को मैडल और प्रशस्ति पत्र दिए जाएंगे। मार्च के दूसरे पखवाड़े में दिल्ली में एक भव्य आयोजन में यह पुरस्कार दिया जाना प्रस्तावित है।
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स्टिंग ऑपरेशन न्यूज शृंखला के जरिए नारी निकेतन में महिलाओं के साथ हो रहे शोषण का पर्दाफाश किया गया था। इस मामले में तत्कालीन नारी निकेतन अधीक्षक समेत नौ लोग जेल गए थे। लापरवाही के आरोप में कई निलंबित भी हुए थे। नतीजा, नारी निकेतन का कायाकल्प हो गया।
22 से अधिक संवासिनी के परिजनों को तलाश कर उन्हें घर भेजा गया। सत्ता के गलियारों में लंबे समय तक यह मामला सुर्खियों में छाया रहा था। इस विधानसभा चुनाव में संवासिनियों को वोट डालने के लिए पहली बार नारी निकेतन में आदर्श पोलिंग बूथ बनाया गया था।
इस पुरस्कार के लिए दुनिया भर से मिली प्रविष्टियों में से अमर उजाला देहरादून टीम के अभियान को पुरस्कार के लिए चुना गया है। हिंदी के किसी भारतीय अखबार को यह पुरस्कार पहली बार दिया गया। दैनिक अखबारों में पत्रकारों की टीम के बेहतरीन काम को प्रोत्साहित करने के लिए वर्ष 2007 में स्थापित यह अवॉर्ड, पुरस्कार राशि के लिहाज से दुनिया का सबसे बड़ा पुरस्कार है।
अब तक पुरस्कृत
वर्ष 2007 में शुरू इस पुरस्कार में पहले साल मानव विकास पर आमंत्रित प्रविष्टियों में हिन्दुस्तान टाइम्स और पाकिस्तान के डॉन अखबार की टीम को तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने पुरस्कृत किया था। वर्ष 2008 में हिन्दुस्तान टाइम्स टीम को तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने पुरस्कृत किया।
वर्ष 2009 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह ने घाना के एनास अरमियो एनास की टीम को तथा 2012 में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इंवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट (आईसीआईजे) की टीम को पुरस्कृत किया था। वर्ष 2013 में भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश आर.एम. लोढ़ा ने वाशिंगटन केआईसीआईजे और इंडियन एक्सप्रेस की टीम को संयुक्त रूप से ये पुरस्कार दिया था।
9 स्टोरी मेरिट में चयनित
देश और दुनिया भर से आई प्रविष्टियों में से चयनित वर्ष 2014 एवं 2015 में कुल 9 स्टोरी मेरिट के लिए चयन की गई है। इनमें 2014 की बंगलुरु की मैगजीन की मिनी पी. थॉमस को 'द कट एण्ड द हर्ट, कोलकाता के बर्तमान अखबार के रांतीदेव सेन गुप्ता को 'तालीबानी रूल्स इम्पोस्ड बाय इस्लामिक फंडामेंटलिस्ट इन मुर्शिदाबाद-वेस्ट बंगाल, केरल के देशाभिमानी डेली के आर.सम्बन को 'वेटिंग फॉर मर्सी, दैनिक जागरण दिल्ली के हरीकिशन शर्मा की स्टोरी गंगा जागरण को शामिल किया गया।
वर्ष 2015 की चयनित 5 मेरिट स्टोरी के लिए आज समाज चंडीगढ़ के कुनाल वर्मा को 'सरकारी धान खरीद में करोड़ों का घोटाला, छत्तीसगढ़ दुर्ग के सेन्ट्रल क्रॉनिकल के दिनेश कुमार को 'सिटिंग ओवर अ गोल्ड माइन विद अ बीपीएल कार्ड, मलयाला मनोरमा केरल के संतोष जॉन थूवल को 'लैट दीज फ्लावर्स ब्लूम, हिन्दुस्तान टाइम्स लखनऊ उमेश रघुवंशी को सीजे अपसेट, राइट टू गर्वनर: सीएम मीट्स हिम टू क्लेरीफाइ गर्वमेंट्स पाइंट, छत्तीसगढ़ दुर्ग के सेन्ट्रल क्रॉनिकल के दिनेश कुमार को 'र्यूमर ऑन सोशल मीडिया फ्लेयर अप कम्युनल टेंशन को शामिल किया गया है।
निर्णायक मंडल
इस वर्ष प्राप्त प्रविष्टियों के मूल्यांकन के लिए गठित निर्णायक मंडल में सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर, बीबीसी लंदन से जुड़े रहे वरिष्ठ पत्रकार विजय राणा और पत्रिका समूह के प्रधान सम्पादक गुलाब कोठारी शामिल थे।