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अमर उजाला अपनत्व अभियान: कोरोना के मारे, 'जमीं के तारे', ढूंढ रहे सहारे
Tue, 01 Jun 2021 06:51 PM IST
अलका त्यागी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: अलका त्यागी
Updated Tue, 01 Jun 2021 06:51 PM IST
सार
उत्तराखंड में कोरोना महामारी ने जिन बच्चों से उनके माता-पिता को छीन लिया है। अमर उजाला ने उनकी पहचान के लिए यह अभियान शुरू किया है। ऐसे बच्चों के बारे में जानकारी हो तो हमें 7617566171 पर व्हाट्सअप के जरिए या ddn-cityreporter@amarujala.com पर मेल करें।
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करण के भाई के कंधों पर आई परिवार की जिम्मेदारी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कोरोना ने प्रदेश में कई परिवारों को तबाह कर दिया। कई परिवारों में कमाने वाले ही नहीं बचे तो कई के माता-पिता संक्रमण के कारण जान गंवा बैठे। ऐसे परिवारों में बचे बच्चे फिल्हाल रिश्तेदारों के रहमोकरम पर हैं। सरकार की वात्सल्य योजना का अध्यादेश अभी तक नहीं आया है, लेकिन जिंदगी की जद्दोजहद में अब इन परिवारों को सरकार से उम्मीद है। हालांकि सरकार ने अब तक 137 अनाथ बच्चों को तलाशा है, लेकिन प्रदेश में ऐसे बच्चों की संख्या अधिक है। अमर उजाला का अपनत्व अभियान सरकार तक इनकी जानकारी पहुंचाता रहेगा।
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अमर उजाला अपनत्व अभियान : घोषणा को जमीं पर उतारें, बच्चों का जीवन संवारें
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ऋषिकेश: रिया और आरव से छिना पिता का प्यार
20 बीघा, गली नंबर-3 नजदीक अशुदीप पब्लिक स्कूल, बापूग्राम, वीरभद्र, ऋषिकेश निवासी अमरीश कुमार (40) का कोरोना संक्रमण से निधन हो गया है। अमरीश राजस्थान के एक होटल में सेफ थे। कोरोनाकाल के चलते वह अपने परिवार के साथ घर ऋषिकेश में थे। कोरोना संक्रमित होने के चलते बीते 8 मई को परिजनों ने उन्हें हरिद्वार स्थित मेला अस्पताल में भर्ती किया था। जहां उनका उपचार शुरू हुआ। 16 मई को वे जिंदगी की जंग हार गए। वे अपने पीछे अपनी पत्नी नेहा झा (32), छह वर्षीय मासूम बेटी रिया झा और दो वर्षीय मासूम बेटा आरव झा को छोड़ गए हैं। उनके जाने से उनकी पत्नी का रो-रोकर बुुरा हाल है। वही अपने परिवार का सहारा थे। उनके जाने के बाद अब कैसे इन मासूमों की परवरिश होगी।
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हरिद्वार: करण के सिर से उठ गया बाप का साया
कोरोना संक्रमण काल में करण के सिर से बाप का साया उठ चुका है। ऐसे में अब उनके भाई के कंधों पर परिवार का जिम्मा आ गया है। परिवार में एक मात्र कमाने वाले पिता की मौत होने से परिवार आर्थिक समस्या से जूझ रहा है। ऐसे में परिवार के सदस्यों को मदद की दरकार है। लाल मंदिर कॉलोनी आर्य नगर ज्वालापुर निवासी 17 वर्षीय करण ने बताया कि उनके पिता बलराम सिंह फल बेचकर परिवार का गुजारा करते थे। पिता के साथ परिवार हंसी-खुशी के साथ रह रहा था। उनकी बहन की दो साल पहले शादी हो चुकी है। भाई उमेश कुमार पॉलीटेक्निक किए हुए है, लेकिन पिछले साल 23 सितंबर को बीमारी के चलते पिता का निधन हो गया था। इससे परिवार को बड़ा झटका लगा था। उनकी मां उषा देवी गृहिणी हैं। बताया कि वह 12वीं में पढ़ रहे हैं। पिता के चले जाने के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति बड़ी खराब है। इसके कारण उनके बड़े भाई को पॉलीटेक्निक करने के बावजूद भी मजबूरी में परिवार का गुजारा करने के लिए एक मॉल में नौकरी करनी पड़ रही है। तब जाकर किसी तरह से उनके परिवार का पालन-पोषण चल रहा है। अगर उन्हें सरकार की ओर से थोड़ी राहत मिल जाए तो उन्हें पढ़ाई लिखाई में मदद मिल जाएगी ताकि वह अपना बेहतर कॅरियर बना सकें।
उत्तरकाशी: लता देवी की तीन मासूम बेटियों से कोरोना ने छीना पिता का साया
नौगांव ब्लाक के डख्याटगांव निवासी लता देवी और उसकी तीन मासूम बेटियों पर कोरोना महामारी कहर बनकर टूटी है। इस महामारी में लता देवी के पति चमन दास की मौत हो गई। जिसके कारण तीन बेटियों के भरण-पोषण की जिम्मेदारी लता के कंधों पर ही आ पड़ी है। ठकराल पट्टी के डख्याटगांव का चमन दास रोजी रोटी कमाने के लिए हरिद्वार नारसन की एक पेपर मिल में काम करता था। बुखार, खांसी और ऑक्सीजन की कमी होने पर उसे सिविल अस्पताल रूड़की में भर्ती कराया गया। बाद में तबियत बिगड़ने पर रूड़की के ही एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां इलाज के दौरान बीते 21 जून को उसकी मौत हो गई। आर्थिक रुप से बेहद कमजोर परिवार पर एकमात्र कमाऊ सदस्य की मौत के बाद 34 वर्षीय पत्नी लता देवी और उसकी पुत्री 11 साल की पुत्री शिवांगी, 9 साल की अनु व 6 साल की एक अन्य पुत्री के भरण-पोषण का संकट खड़ा हो गया है। पूर्व ग्राम प्रधान जयवीर जयाड़ा ने सरकार से इस परिवार की आर्थिक सहायता करने की मांग की है।
नई टिहरी: मां की मौत के बाद मुफलिसी में जी रहे अनाथ बच्चे
जौनुपर ब्लॉक के बिच्छु गांव में किसान रामकिशन की मौत से उसके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। खेतीबाड़ी कर परिवार भरण-पोषण कर रहे परिवार के मुखिया रामकिशन को अप्रैल माह में बुखार आया था, उपचार के लिए उसे देहरादून एक निजी अस्पताल में ले गए, लेकिन उपचार के दौरान उसका निधन हो गया। जिससे अब नाबालिग सुहाना (11), प्राची (8),साक्षी (5), कनक (3) और दो बूढ़ी सास की जिम्मेदारी वासु देवी के कंधों पर आ गई है। परिवार में कोई अन्य मददगार नहीं होने से वासु देवी के सामने चार बेटियों और दो बूढ़ी सास का पालन-पोषण करना आसान नहीं है। क्षेत्र के सुरेंद्र सिंह रावत ने बताया कि इस परिवार की आर्थिक स्थिति काफी नाजुक है। उन्होंने सरकार से पीड़ित परिवार की मदद करने की गुहार लगाई है।
रामनगर: कोरोना से पिता की मौत के बाद बेसहारा हुए बच्चे
पीरूमदारा निवासी मुकेश बिष्ट की कोरोना संक्रमण से दस मई की मौत हो गई। पिता की मौत के बाद उनकी सात वर्षीय बेटी सनाया और चार वर्षीय बेटा शौर्य बेसहारा हो गए हैं। मां रिया बिष्ट, सास सुरेखा और देवर अभिषेक बच्चों का लालन-पालन कर रहे हैं। मां रिया बिष्ट ने बताया कि पति एक स्टोर में काम करते थे, लेकिन लॉकडाउन होने की वजह से उनकी नौकरी चली गई थी। इसी दौरान कोरोना संक्रमण के चलते उनकी मौत हो गई। रिया बताती हैं कि पति की मौत के बाद अब बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी उस पर आ गई है।