कोरोना में बिगड़े आर्थिक हालात: चौंकाने वाला बदलाव, सरकारी स्कूलों में करीब 44 हजार छात्रों की संख्या बढ़ी, प्राइवेट में घटी
कोरोना में बिगड़ी आर्थिक हालात से अभिभावकों ने बच्चों के स्कूल बदले। प्रदेश भर के सरकारी स्कूलों में 44 हजार बच्चों की संख्या बढ़ी। जबकि प्राइवेट स्कूलों में छात्रों की संख्या घटी है।
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दो साल पहले चीन के वुहान शहर से निकले कोरोना संक्रमण ने भारत में भी हर क्षेत्र को प्रभावित किया। लेकिन, शिक्षा जगत पर इसका प्रभाव कुछ ज्यादा ही देखने को मिला। वैश्विक महामारी की पहली और दूसरी लहर के बाद प्राइवेट स्कूलों की हालात खराब होती नजर आ रही है। ऐसे में अब एक और चौंका देने वाला बदलाव सामने आया है।
कोरोना से बिगड़ी आर्थिक हालात के बाद अभिभावक अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल से निकाल सरकारी स्कूलों में दाखिला करा रहे हैं। आलम यह है कि प्रदेश भर के सरकारी स्कूलों में करीब 44 हजार बच्चों की संख्या बढ़ी है। कोरोना आने के बाद से निजी स्कूलों की तुलना में सरकारी स्कूल लोगों की पहली पसंद बनते जा रहे हैं।
इसके चलते जहां एक ओर प्राइवेट स्कूलों में बच्चों की संख्या घट रही है तो वहीं सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या में इजाफा देखने को मिल रहा है। इसकी प्रमुख वजह महामारी के दौरान लोगों का पलायन, अभिभावकों की नौकरी-रोजगार जाना व उनकी आय में कमी है। प्राइवेट स्कूलों में भी मीडियम और छोटे स्कूलों पर अधिक असर पड़ा है। जिसके चलते कई जगहों पर निजी स्कूल बंद हो गए हैं।
हर सरकारी स्कूल में 8 से 10 प्रतिशत बच्चे प्राइवेट स्कूलों के आए
जिला मुख्य शिक्षा अधिकारी डॉ. मुकुल कुमार सती ने बताया कि प्रदेश भर के सरकारी स्कूलों छात्रों की संख्या में करीब 44 हजार का इजाफा हुआ है। देहरादून के सरकारी स्कूलों में भी बच्चों के नामांकन बढ़े हैं। करीब हर सरकारी स्कूल में 8 से 10 प्रतिशत बच्चे प्राइवेट स्कूलों के आए हैं। इसका कारण कई प्राइवेट स्कूलों का बंद होना और अभिभावकों की बिगड़ी आर्थिक स्थिति है।
स्कूलों में पढ़ाई का माहौल सुधारने के लिए हर संभव कार्य किए जा रहे हैँ। वहीं कुछ निजी स्कूलों के अधिकारियों ने बताया कि उनके यहां पहले प्रवेश के लिए होड़ मची रहती थी, इस बार कुछ सीटें खाली है। कोरोना काल में कई बच्चों ने टीसी भी ली है। जिससे स्कूलों में छात्रों की संख्या भी कम हुई है।
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बीते दो साल की फीस से बचने के लिए अभिभावक अपने बच्चों का सरकारी स्कूलों में दाखिला करा रहे हैं। ऐसे में अगर यह बच्चे बाद में पब्लिक स्कूलों में प्रवेश लेना चाहे तो उन्हें तिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। हालांकि कुछ ही पब्लिक स्कूलों में बच्चों की संख्या कम हुई है।
-प्रेम कश्यप, अध्यक्ष, प्रिंसिपल प्रोग्रेसिव स्कूल्स एसोसिएशन