उत्तराखंड ऑलवेदर रोड परियोजना: लागत और समय बढ़ने के आसार
- काम ने तेजी नहीं पकड़ी तो 500 करोड़ तक बढ़ सकती है परियोजना की लागत
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अलग-अलग कारणों से चारधाम ऑलवेदर रोड परियोजना का कार्य तेजी नहीं पकड़ पा रहा है। 11700 करोड़ रुपये की इस योजना को 2019 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन, जिस तरह से इसकी तेजी प्रभावित हो रही है, परियोजना के न सिर्फ समय पर पूरा न हो पाने के आसार हैं, बल्कि इसकी लागत भी बढ़ने की संभावना है।
कार्यदायी एजेंसियों का अनुमान है कि मौजूदा हालातों के हिसाब से परियोजना की लागत में 4500 से 500 करोड़ तक का इजाफा हो सकता है। करीब 889 किमी की इस परियोजना के तहत भागीरथी इको सेंसिटिव जोन की परिधि में काम अभी शुरू नहीं हो पाया है। जिन इलाकों में कार्य शुरू हुआ है, वहां कभी मानसून तो कभी यात्रा सीजन के चलते काम प्रभावित हो रहा है।
परियोजना के तहत 12 बाईपास स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से कई बाईपास स्थानीय लोगों के विरोध व अन्य कारणों से लटके हैं।
कुछ पैकेज पर काम शुरू भी नहीं हो पाया है
परियोजना की 434.39 किमी की कार्यदायी एजेंसी प्रदेश के लोक निर्माण विभाग को बनाया गया है। लोनिवि को 26 सिविल कार्य करने हैं, जिनमें से 21 कार्यों पर अलग-अलग स्तर पर कार्य चल रहा है। आधिकारिक सूत्रों का मानना है कि परियोजना अपने निर्धारित लक्ष्य पर पूरी नहीं हो पाएगी, क्योंकि कुछ पैकेज पर तो काम शुरू भी नहीं हो पाया है।
इस पूरी परियोजना की राह में यदि कोई बड़ी बाधा नहीं आई, तब भी इसके 2021-22 तक ही पूरे होने की संभावना जताई जा रही है। यदि बाधाएं बरकरार रहती हैं, तब परियोजना को पूरा होने में और अधिक समय लगेगा। हालांकि प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और प्रदेश सरकार के स्तर पर परियोजना के कार्य में तेजी को लेकर लगातार समीक्षाएं के दौर चल रहे हैं।