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अकारण अनुपस्थित होने पर उपनल कर्मियों की सेवाएं होगी समाप्त
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विकासनगर। जन संघर्ष मोर्चा अध्यक्ष और जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने सरकार पर उपनल कर्मियों के आंदोलन को दबाने का आरोप लगाया है। इसके लिए प्रदेश के सभी विभागों को पत्र लिखा गया है।
जन संघर्ष मोर्चा अध्यक्ष और जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने कहा कि प्रदेश सरकार उपनल कर्मियों के आंदोलन को दबाने की पुरजोर कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि कर्मचारी आंदोलन में शामिल न हों, इसके लिए उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम लिमिटेड (उपनल) के उप महाप्रबंधक कर्नल (सेवानिवृत्त) मनोज रावत ने प्रदेश के समस्त विभागों को पत्र लिखा है। इसमें कहा गया है कि अकारण पांच दिनों से अधिक अनुपस्थित रहने वाले उपनल कर्मियों की सेवा समाप्त कर उनके स्थान पर उपनल को मांगें प्रेषित की जाएं। इसकी प्रतिलिपि अपर मुख्य सचिव सैनिक कल्याण अनुभाग को भी भेजी है। उन्होंने कहा कि ऐसा सिर्फ उपनल कर्मियों पर दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है। नेगी ने कहा कि हजारों उपनल कर्मी अपने नियमितीकरण एवं समान कार्य समान वेतन को लेकर आंदोलनरत हैं, लेकिन सरकार समाधान ढूंढने के बजाय आंदोलन को कुचलने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2018 में उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने इन कर्मियों के नियमितीकरण, न्यूनतम पे-स्केल महंगाई भत्ता सहित देने एवं जीएसटी न काटने के निर्देश सरकार को दिए थे, लेकिन सरकार ने हाईकोर्ट में एसएलपी दे दी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी। रघुनाथ सिंह नेगी ने कहा कि सरकार को सर्वोच्च न्यायालय में योजित एसएलपी को वापस लेकर उपनल कर्मियों के आंदोलन का समाधान करना चाहिए। इस मौके पर जिला मीडिया प्रभारी प्रवीण शर्मा पिन्नी और मोहम्मद असद मौजूद रहे।
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जन संघर्ष मोर्चा अध्यक्ष और जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने कहा कि प्रदेश सरकार उपनल कर्मियों के आंदोलन को दबाने की पुरजोर कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि कर्मचारी आंदोलन में शामिल न हों, इसके लिए उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम लिमिटेड (उपनल) के उप महाप्रबंधक कर्नल (सेवानिवृत्त) मनोज रावत ने प्रदेश के समस्त विभागों को पत्र लिखा है। इसमें कहा गया है कि अकारण पांच दिनों से अधिक अनुपस्थित रहने वाले उपनल कर्मियों की सेवा समाप्त कर उनके स्थान पर उपनल को मांगें प्रेषित की जाएं। इसकी प्रतिलिपि अपर मुख्य सचिव सैनिक कल्याण अनुभाग को भी भेजी है। उन्होंने कहा कि ऐसा सिर्फ उपनल कर्मियों पर दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है। नेगी ने कहा कि हजारों उपनल कर्मी अपने नियमितीकरण एवं समान कार्य समान वेतन को लेकर आंदोलनरत हैं, लेकिन सरकार समाधान ढूंढने के बजाय आंदोलन को कुचलने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2018 में उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने इन कर्मियों के नियमितीकरण, न्यूनतम पे-स्केल महंगाई भत्ता सहित देने एवं जीएसटी न काटने के निर्देश सरकार को दिए थे, लेकिन सरकार ने हाईकोर्ट में एसएलपी दे दी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी। रघुनाथ सिंह नेगी ने कहा कि सरकार को सर्वोच्च न्यायालय में योजित एसएलपी को वापस लेकर उपनल कर्मियों के आंदोलन का समाधान करना चाहिए। इस मौके पर जिला मीडिया प्रभारी प्रवीण शर्मा पिन्नी और मोहम्मद असद मौजूद रहे।
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