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नमामि गंगे में गंगा के साथ सहयोगी नदियों का भी उद्धार

Sat, 05 Dec 2015 03:52 PM IST
रजा शास्त्री/अमर उजाला, देहरादून
रजा शास्त्री/अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 05 Dec 2015 03:52 PM IST
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all Tributaries of ganges in namami gange.

गोमुख से गंगा सागर तक गंगा में मिलने वाली सभी सहयोगी नदियों को भी नमामि गंगे परियोजना में शामिल कर लिया गया है। अभी तक यह परियोजना सिर्फ गंगा पर ही आधारित थी। अब गंगा के साथ यूपी, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल की इन नदियों का भी विकास किया जाएगा।

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नमामि गंगे में उत्तराखंड के तो पूरे गंगा बेसिन को शामिल किया गया है और हरिद्वार के बाद गंगा के दोनों तरफ पांच किमी प्रभाव क्षेत्र परियोजना में शामिल है। गंगा से गोमुख तक परियोजना की साइटों की निगरानी जीपीएस के माध्यम से की जाएगी।
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नमामि गंगे परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) पूरी होने के बाद बृहस्पतिवार को दिल्ली में केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में पहली बैठक हुई। इसमें तय हुआ कि गंगा से गोमुख तक की साइटों को गूगल में डाला जाएगा। जीपीएस के माध्यम से गंगा साइटों की निगरानी होती रहेगी।
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इसके साथ ही राज्यों ने साइटों के संबंध में फॉरेस्ट कवर, वनस्पतियों आदि के संबंध में जो जानकारी दी है, उनका भौतिक सत्यापन किया जाएगा।

भारतीय वन सर्वेक्षण की रिपोर्ट से करेंगे क्रॉस चेक

all Tributaries of ganges in namami gange.

केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के स्पेशल सेक्रेटरी एवं महानिदेशक डॉ. एसएस नेगी ने भारतीय वन सर्वेक्षण की वर्ष 2015 की ताजा सर्वेक्षण रिपोर्ट से गोमुख से गंगा सागर तक फॉरेस्ट कवर को सत्यापित करने के भी निर्देश दिए हैं।

नमामि गंगे परियोजना में गंगा की सहयोगी नदियों को डीपीआर में शामिल करने संबंधी राज्यों के अनुरोध को मान लिया गया है। डीपीआर के संबंध में भारतीय वन अनुसंधान संस्थान में जून में हुई राज्यों की पहली बैठक में सहयोगी नदियों को शामिल करने का मामले को टाल दिया गया था। भारतीय वन अनुसंधान की निदेशक डॉ. सविता और नोडल अधिकारी वरिष्ठ विज्ञानी डॉ. ओमवीर सिंह ने नमामि गंगे की डीपीआर प्रस्तुत की।

डीपीआर में शामिल गंगा की सहयोगी नदियां
उत्तराखंड: भागीरथी, अलकनंदा, मंदाकिनी, असी गंगा, भिलंगना, धौली गंगा, पिंडर, न्यार, सौंग, बाल गंगा, नंदाकिनी

उत्तरप्रदेश: गोमती, गंडक और शारदा

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