हल्द्वानी: बारिश-भूस्खलन से दो मासूमों समेत तीन की मौत, पिथौगराढ़ में 12 वीं तक के स्कूल रहेंगे बंद
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कुमाऊं में बुधवार देर रात तक आसमान से लगी झड़ी से पिथौरागढ़ जिले में जगह-जगह भूस्खलन हुए और पहाड़ से लेकर तराई तक में नदियां उफान पर आ गईं। बरम में बुधवार रात बादल फटने के बाद 60 बकरियां लापता हैं।
गोसी नदी का मोटर पुल समेत मल्ला जोहार को जोड़ने वाले दो पैदल पुल भी टूट गए हैं। गांव में खतरे से घिरे 21 परिवारों को अस्थायी राहत केंद्र में शिफ्ट कर दिया गया है। जिले में कई मकान ध्वस्त हुए हैं, मकानों-दुकानों, सड़कों और खेतों में मलबा पट गया है।
मुनस्यारी में बुधवार शाम मलबे की चपेट में आकर एक ग्रामीण की मौत हो गई तो बनबसा में बृहस्पतिवार को बारिश के पानी से भरे गड्ढे में डूबकर दो मासूम मौसेरे-ममेरे भाई-बहनों की जान चली गई। पिथौरागढ़ जिला प्रशासन ने शुक्रवार को जिले में इंटर तक के सभी सरकारी और निजी विद्यालयों में अवकाश घोषित कर दिया है। राज्य मौसम विज्ञान केंद्र ने राज्य के सात जिलों देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी, चंपावत, नैनीताल, पिथौरागढ़ और ऊधमसिंह नगर में अगले 48 घंटे में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।
तीन परिवारों की 60 बकरियां लापता
मुनस्यारी के सिरतोला निवासी श्याम सिंह (37) की बुधवार शाम उस वक्त पहाड़ी से गिरे मलबे की चपेट में आने से मौत हो गई जब वह जंगल से बकरियां चराकर लौट रहे थे। तल्ली नारगी गांव में मलबे की चपेट में आकर 62 वर्षीय विशुनी देवी घायल हो गई।
बनबसा की कैनाल कालोनी परिसर में रहने वाले पेंटर रामपाल के घर यूपी नवाबगंज निवासी उसके साले रमेश चंद्र शर्मा का 9 वर्षीय पुत्र अमित रक्षाबंधन पर आया था। बृहस्पतिवार को रामपाल की चार साल की बेटी अनन्या और अमित घर के आसपास ही खेल रहे थे कि वह बारिश के पानी से भरे गड्ढे में जा गिरे और उनकी मौत हो गई।
पिथौरागढ़ के बरम गांव में बुधवार रात बादल फटने से जनहानि होने से तो बच गई लेकिन तीन परिवारों की 60 बकरियां लापता हैं।
इन बकरियों के मलबे में दबने या पानी के साथ बहने की आशंका है। गोसी नदी के उफनाने से रात में दहशत का ऐसा मंजर था कि सभी परिवारों ने अपने मकान छोड़ दिए और ऊंचाई वाले सुरक्षित स्थानों पर चले गए। लोगों के खेत मलबे से पट गए हैं। जौलजीबी से मुनस्यारी जाने वाली सड़क पर बना बरम गोसी नदी का मोटर पुल बह गया है, इससे कई कस्बों और गांवों का संपर्क कट गया है।
पूरे इलाके को अलर्ट पर रखा
उद्यान विभाग की नर्सरी क्षतिग्रस्त हो गई है। प्रशासन ने एहतियातन गोसी तट पर बसे 21 परिवारों को राजकीय इंटर कॉलेज में बरम में बनाए गए अस्थायी राहत केंद्र में शिफ्ट कर दिया है। पूरे इलाके को अलर्ट पर रखा गया है। बरम से लेकर कनार तक करीब 20 किलोमीटर के दायरे में भूकटाव का खतरा पैदा हो गया है। उल्लेखनीय है कि चार सितंबर 2009 की रात की आपदा में बरम में 15 लोगों की मौत हो गई थी।
उधर, तोमिक गांव के रिखू तोक में गोशाला टूटने से 15 बकरियां मलबे में दब गईं। नाचनी के पास कोटा गांव में दो मकान ध्वस्त हो गए। धारचूला में भी एक मकान ध्वस्त हुआ है। मुनस्यारी में मल्लाजोहार को जोड़ने वाले दो पुल बहने से आवाजाही बंद हो गई है। इनमें एक चिलमधार के पास साईपोलू और दूसरा शिलिंग से सेरा को जोड़ने वाला पैदल पुल शामिल है। मुनस्यारी के मदकोट में कई दुकानों और मकानों में मलबा घुस गया। पिथौरागढ़-तवाघाट राष्ट्रीय राजमार्ग मलबा आने से दिन में 12 बजे तक बाधित रहा।
टनकपुर में किरोड़ा नाला और बाटनागाड़ के उफान में आने से पूर्णागिरि मार्ग घंटों बंद रहा। पहाड़ पर हुई बारिश के बाद शारदा नदी का जलस्तर 12 बजे 1,81,101 क्यूसेक पहुंच गया। इसके बाद बनबसा बैराज पर रेडअलर्ट घोषित कर वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है। टनकपुर में शारदा तट पर रेडअलर्ट जारी कर लोगों को सुरक्षित जगहों पर शरण लेने को कहा गया है। भीमताल के मंगोली के तोक भेवा में बुधवार शाम एक मकान क्षतिग्रस्त हो गया। नैनीताल-कालाढूंगी मोटर मार्ग मलबा आने से सुबह करीब एक घंटे तक बंद रहा। पहाड़ों पर बारिश से तराई में भी नदियां उफान पर हैं। सितारगंज में बैगुल और कैलाश नदीं के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने विभागीय कर्मियों को अलर्ट पर रखा है।