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उत्तराखंड के सभी गैरपंजीकृत अस्पताल और क्लीनिक होंगे बंद, हाईकोर्ट ने जारी किया आदेश

Fri, 24 Aug 2018 09:43 PM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, नैनीताल
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, नैनीताल Updated Fri, 24 Aug 2018 09:43 PM IST
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All Non-registered hospital and clinics will close in uttarakhand after highcourt order

हाईकोर्ट ने राज्य में बगैर लाइसेंस तथा क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट (रजिस्ट्रीकरण एवं विनियमन) अधिनियम- 2010 के तहत गैरपंजीकृत सभी अस्पतालों और क्लीनिकों को तत्काल प्रभाव से सील करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने सरकारी अस्पतालों और अधिनियम में पंजीकृत सभी क्लीनिकों के डॉक्टरों को भी आदेश दिया है कि वे केवल जेनेरिक दवाएं लिखें और रोगियों पर ब्रांडेड दवाओं को खरीदने के लिए दबाव न बनाएं।

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बाजपुर निवासी अहमद नबी की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की खंडपीठ ने प्रावधानों को चिकित्सालयों में लागू नहीं करने पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने निर्देश दिए कि अस्पतालों और क्लीनिकों के संचालन के लिए मौजूदा प्रावधानों और कानून का सख्ती से पालन किया जाए।
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अदालत ने यह भी कहा कि सरकार निजी एवं सरकारी अस्पतालों में विभिन्न मेडिकल जांचों और परीक्षणों का शुल्क भी एक माह के भीतर तय करे। कोर्ट ने सभी चिकित्सालयों को आदेश दिया कि वे मरीजों की अनावश्यक जांच न करवाएं। कोर्ट ने कहा कि चिकित्सालयों में आईसीयू की एक दीवार शीशे से निर्मित की जाए जिससे मरीज के परिजन उसे देख सकें। कोर्ट ने कहा कि चिकित्सालय हर 12 घंटे में परिजनों को मरीज के स्वास्थ्य की जानकारी भी दें।
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इस बात पर कोर्ट भी हैरान हुआ

All Non-registered hospital and clinics will close in uttarakhand after highcourt order
हाईकोर्ट

यह थी याचिका
बाजपुर निवासी अहमद नबी ने जनहित याचिका दायर कर कहा था कि बाजपुर में दोराहा स्थित बीडी अस्पताल तथा पब्लिक अस्पताल केलाखेड़ा बगैर पंजीकरण के चल रहे हैं। मार्च 2016 में सीएमओ ने इन्हें नोटिस भी भेजा था।

कोर्ट भी हैरान हुआ
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस बात पर आश्चर्य जताया कि इन चिकित्सालयों में सर्जरी के लिए मरीज तो भर्ती पाए गए, लेकिन वहां एक भी डॉक्टर एमबीबीएस तथा सर्जरी करने की अधिकृत डिग्री वाला नहीं था। इनमें केवल होम्योपैथिक व यूनानी चिकित्सा डिग्रीधारी डाक्टर हैं, जो ऑपरेशन करने के लिए अधिकृत नहीं हैं। कोर्ट ने पाया कि मई 2018 में सीएमओ ने ऐसे चिकित्सालयों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए थे, लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।


इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने पंजीकरण आदेश स्थगित करने को कहा था
सरकार ने कोर्ट को बताया कि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने एक प्रत्यावेदन देकर कहा था कि क्लीनिकल एस्टेबलिशमेंट्स (रजिस्ट्रेशन एंड रेग्यूलेशंस) एक्ट 2010 के तहत पंजीकरण कराने से चिकित्सालयों में इलाज कराने का खर्चा पांच गुना तक बढ़ जाएगा। आईएमए ने इस आधार पर अनुरोध किया था कि पंजीकरण कराने का आदेश स्थगित कर दिया जाए। इस पर डीएम नैनीताल ने सचिव चिकित्सा से लाइसेंस बनाना पेंडिंग रखने को कहा था।


 

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