मलेथा आंदोलन की बड़ी जीत, सभी स्टोन क्रशरों के लाइसेंस रद्द
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क्रशरों के खिलाफ मलेथा में लंबे समय से चल रहा आंदोलन रंग लाया है। शासन ने मलेथा व चौरास के सभी सातों स्टोन क्रशरों के लाइसेंस शासन ने निरस्त कर दिए हैं। कमिश्नर गढ़वाल की रिपोर्ट पर अपर मुख्य सचिव राकेश शर्मा ने यह कार्रवाई की।
जिला प्रशासन को निर्देशित किया गया है कि तत्काल प्रभाव से क्रशरों को बंद कराना सुनिश्चित करे। क्रशर के खिलाफ मलेथा में 27 दिनों से अनशन पर बैठे समीर रतूड़ी ने शासन के फैसले पर बृहस्पतिवार की देर रात कहा कि लिखित आदेश की कॉपी देखने के बाद ही आंदोलन के बारे में निर्णय लिया जाएगा।
आंदोलनकारी क्रशरों के चलते कृषि और पर्यावरण को नुकसान पहुंचने की बात कहते रहे हैं। मलेथा और चौरास दोनों ही टिहरी जनपद में है। मलेथा श्रीनगर से पहले और चौरास बाद में पड़ता है। मलेथा में स्टोन क्रशरों के खिलाफ 11 महीनों से जनता आंदोलित है।
विरोध को देखते हुए शासन ने कमिश्नर गढ़वाल को जांच कर रिपोर्ट देने को कहा था। कमिश्नर ने क्रशरों को बंद करने की सिफारिश शासन से की। इसी रिपोर्ट को आधार बनाते हुए अपर मुख्य सचिव राकेश शर्मा ने सातों क्रशरों को बंद करने के आदेश दिए।
जानिए, क्रशरों के बंद होने से क्या होगा असर?
शासन ने सभी सातों क्रशरों के लाइसेंस निरस्त कर दिया है। टिहरी जिला प्रशासन को कहा गया है कि तत्काल प्रभाव से सभी स्टोन क्रशरों को बंद कराकर रिपोर्ट शासन को भेजे।
यह पड़ेगा फर्क
क्रशरों के बंद होने से अब सरकारी विभागों के अवस्थापना कार्यों में प्रयोग होने वाली सामग्री हरिद्वार व अन्य स्थानों से खरीदना होगा। शासन पहले भी कहता रहा है कि इससे पहाड़ में निर्माण सामग्री करीब दस प्रतिशत महंगी हो जाएगी।
गढ़वाल मंडल में चल रहे निर्माण कार्यों को इस फैसले से करोड़ों रुपए की चपत लगेगी। सरकार की जो परियोजनाएं निर्माणाधीन है उनका एस्टिमेट भी रिवाइज करना पड़ेगा।
इनका है कहना
दोनों स्थानों पर सात क्रशर थे। सभी के लाइसेंस निरस्त कर क्रशर बंद करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। कोई क्रशर चालू मिला तो स्थानीय प्रशासन को कानूनी कदम उठाने के लिए हिदायत दे दी गई है।
-राकेश शर्मा, अपर मुख्य सचिव