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खुद नौकरी छोड़ी, अब दे रहे दूसरों को रोजगार
बिशन सिंह बोरा/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 25 Feb 2014 10:39 AM IST
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होटल मैनेजमेंट के बाद दर-दर भटकना मानो तकदीर बन चुकी थी। मगर दिल्ली में नौकरी छोड़ नैनीताल के अजय (31) घर लौटे तो किस्मत किनारे कर इरादों का दामन थाम लिया।
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युवाओं के लिए मिसाल
फूलों की खेती के जरिए 6 साल में तरक्की की वह इबारत गढ़ी, जो नौकरी के लिए सड़कों पर मारे फिर रहे युवाओं के लिए मिसाल बन गई। रविवार को राजभवन में कट फ्लावर कॉरनेशन प्रतियोगिता के दौरान अजय ने तीसरा स्थान हासिल किया।
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नैनीताल के सलकुली गांव के अजय जोशी गांव में 18 हजार वर्ग मीटर में एरिया में फूलों की खेती करते हैं। उनका सालाना टर्नओवर 18 लाख रुपए तक पहुंच चुका है। अजय ने बताया कि 2004 में होटल मैनेजमेंट कोर्स के बाद दिल्ली के एक होटल में नौकरी मिली।
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मगर पारिवारिक हालात देख घर लौटना पड़ा। गांव में संजय पांडे से संपर्क के बाद फूलों की खेती शुरू की। छोटे स्तर पर अकेले खेती करने से उत्पादन कम और भाड़ा अधिक ज्यादा रहा। कई बार पैसा मार्केट में भी फंसा।
बडे़ स्तर पर खेती ने बदली तकदीर
छोटे स्तर पर कम मुनाफा देख अजय ने गांव में दूसरों को भी साथ जोड़ा। बड़े एरिया में फूल उगाने के लिए संजय पांडे, मुरारी शाह, गणेश दरमवाल, राजेश हरनवाल, ममता शाह आगे आए। इसके बाद 18 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में फूल लगाए गए।
बड़े स्तर पर हुई खेती ने असर दिखाया और भरपूर मुनाफा मिला। पहले जहां पैसा बाजार में फंस जाता था, वहीं अब आढ़ती एडवांस देने लगे हैं। अजय बताते हैं कि अप्रैल महीने से फ्लावरिंग शुरू होनी है। फूल दिल्ली, लखनऊ, कानपुर और जयपुर तक भेजे जाते हैं।
वैन और ट्रेन से सप्लाई
अजय बताते हैं, छोटे स्तर पर खेती के दौरान फूलों को बस से भेजा जाता था। एक पेटी पर ढाई से तीन सौ रुपये खर्च था। मगर बडे़ स्तर पर खेती के बाद खुद की वैन ले ली।
अब सप्लाई वैन और ट्रेन से करते हैं। अजय बताते हैं कि इसमें संजय पांडे का अहम योगदान रहा। राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड से भी मदद मिली।