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उत्तराखंड में संघर्ष का मापदंड होगी भाजपा की नई टीम
अजित सिंह राठी/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 04 Jan 2016 03:31 PM IST
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उत्तराखंड भाजपा के नए अध्यक्ष को वैसे तो कई इम्तिहान से गुजरना है, लेकिन उनके सांगठनिक और रणनीतिक कौशल का मूल्यांकन प्रदेश की नई टीम के गठन में होगा।
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यूं कहिए कि नई टीम से यह तय होगा कि वह सरकार के खिलाफ कितनी आक्रामकता रखेंगे। जैसा कि उनकी बातों से लगता है कि वर्तमान टीम के बड़े धुरंधरों की वापसी होगी, तो यह मामला फिर नई बोतल में पुरानी शराब जैसा ही होगा। उनकी नई टीम के स्वरूप को आगामी विधानसभा चुनाव के आगाज के तौर पर देखा जाएगा।
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सबसे ज्यादा मशक्कत नई टीम के महामंत्रियों को लेकर करनी होगी। एक बात तो फिलहाल तय मानी जा रही है कि अजय भट्ट के अध्यक्ष बनने के बाद संगठन महामंत्री संजय कुमार की कुर्सी सुरक्षित हो गई है। शेष तीन महामंत्रियों को लेकर थोड़ा बहुत रस्साकशी हो सकती है।
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नरेश बंसल का महामंत्री बनना भी तय माना जा रहा है। एक महामंत्री कुमाऊं से किसी राजपूत नेता को बनाया जा सकता है। भगतदा के खासमखास होने के कारण खटीमा विधायक पुष्कर सिंह धामी सशक्त दावेदार हैं। गढ़वाल से यदि ठाकुर को लेने की बात आई तो भाजयुमो के राष्ट्रीय मंत्री विनोद कंडारी को लिया जा सकता है।
हालांकि धन सिंह रावत के भी महामंत्री बनने का शोर मचा है। अभी वह उपाध्यक्ष हैं। वह संगठन महामंत्री भी रह चुके हैं।
दूसरा नाम मुन्ना सिंह चौहान का है, वह बगैर किसी पद के पार्टी के साथ निरंतर काम कर रहे हैं और यूपी के समय से विधायक निर्वाचित होते रहे हैं।
इसके अलावा आगामी चुनाव को देखते हुए किसी दलित चेहरे को तवज्जो देना जरूरी हो जाएगा। इसके लिए पूर्व मंत्री खजानदास को भी प्रदेश की टीम में महत्वपूर्ण स्थान मिल सकता है। या फिर हरिद्वार के जिलाध्यक्ष सुरेश राठौर को जिले से कार्यमुक्त कर प्रदेश महामंत्री बनाकर दलितों में संदेश देने की कोशिश हो सकती है।