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एम्स बनेगा उत्तराखंड सरकार का संकटमोचन
नवीन नौटियाल / अमर उजाला, ऋषिकेश
Updated Fri, 14 Jul 2017 10:21 AM IST
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एसपीएस राजकीय चिकित्सालय ऋषिकेश में डॉक्टरों की कमी के कारण चारों तरफ से घिरी सरकार के लिए एम्स संकटमोचन का काम कर सकता है।
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एम्स चिकित्सालय में न सिर्फ डॉक्टरों की कमी को पूरा करेगा, बल्कि डॉक्टरों की कमी के कारण ब्लड बैंक में खून की कमी को पूरा करने में भी अपना सहयोग देगा। इसके लिए चिकित्सालय प्रशासन और एम्स के बीच बातचीत चल रही है। बात सिरे चढ़ती है तो सरकार की सिरदर्दी कुछ हद तक कम हो सकती है। अस्पताल की मौजूदा स्थिति इस समय बहुत ही दयनीय है। चारधाम और कांवड़ यात्रा के लिहाज से चिकित्सालय में जितने डॉक्टराें की संख्या होनी चाहिए, उससे काफी कम है।
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एक मुश्त नौ चिकित्सकों के तबादले होने के बाद उनके सापेक्ष छह डॉक्टरों की तैनाती हो चुकी है। उनमें चार चिकित्सक फिजिशियन डा. सुरेश कोठियाल, स्त्री रोग विशेषज्ञ डा. रीना कोठियाल, ऑर्थोपैडिक सर्जन डा. एमपी सिंह और वरिष्ठ सर्जन डा. विजयेश भारद्वाज हैं। तैनात किए गए डाक्टरों में से डा. सुरेश कोठियाल व डा. रीना कोठियाल ज्वाइनिंग के बाद छुट्टी पर चले गए। वहीं दो डॉक्टर एम्स से अस्थायी तौर पर लिए गए हैं।
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एम्स प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराए गए चिकित्सकों में पैथोलॉजिस्ट व बाल रोग विशेषज्ञ शामिल हैं। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक वर्तमान में रिक्त चल रहे पदों पर डाक्टरों की नियुक्ति के लिए वैकल्पिक व्यवस्था के बाबत एम्स प्रशासन से बातचीत चल रही है। वर्तमान में अस्पताल में एनस्थेटिस्ट व रेडियोलॉजिस्ट की व्यवस्था होनी बाकी है।
अस्पताल में मरीजों के बेहतर इलाज के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। इस वक्त चिकित्सालय में कुल छह डाक्टरों की नियुक्ति हो चुुकी है। जिनमें से चार शासन स्तर से स्थायी और दो डाक्टरों की वैकल्पिक व्यवस्था एम्स संस्थान से की गई है। अन्य रिक्त पदों पर चिकित्सकों के बाबत एम्स निदेशक से बातचीत चल रही है। साथ ही एम्स प्रशासन ने ब्लड की आवश्यकता पड़ने पर मदद का पूरा भरोसा दिया है।
- डा. एके गैरोला, सीएमएस, राजकीय चिकित्सालय, ऋषिकेश