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Dehradun News: पांच नवंबर को होगा अहोई माता का व्रत
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अहोई अष्टमी का व्रत पांच नवंबर को रखा जाएगा। महिलाओं ने इसके लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। बाजारों में चहल-पहल है और माता के कैलेंडर बिकने लगे हैं। वहीं, चांदी से तैयार अहोई माता के लॉकेट की मांग भी बढ़ रही है। चांदी के मोतियों के साथ लॉकेट पिरोकर पूजा के समय गले में पहना जाता है। सराफा और सुनारों के यहां अलग-अलग तीन तरह के चांदी के मोतियों की अधिक मांग है। इनकी कीमत 200 से 1000 रुपये तक है। महिलाओं ने बताया कि त्योहार पर दीवार पर गेरू से भी अहोई माता का चित्र बनाया जाता है।
क्या है अहोई माता व्रत
अहोई माता का व्रत बच्चों की तरक्की और दीर्घायु के लिए रखा जाता है। माताएं अपने बच्चों के सुखी जीवन, खुशहाली, लंबी आयु और धन-धान्य के लिए यह व्रत करती हैं। यह व्रत हर साल कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को होता है। महिलाएं पूरा दिन व्रत करने के बाद शाम के समय तारों को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करती हैं। वहीं, कुछ लोग चंद्रमा को अर्घ्य देकर भी व्रत खोलती हैं।
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क्या है अहोई माता व्रत
अहोई माता का व्रत बच्चों की तरक्की और दीर्घायु के लिए रखा जाता है। माताएं अपने बच्चों के सुखी जीवन, खुशहाली, लंबी आयु और धन-धान्य के लिए यह व्रत करती हैं। यह व्रत हर साल कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को होता है। महिलाएं पूरा दिन व्रत करने के बाद शाम के समय तारों को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करती हैं। वहीं, कुछ लोग चंद्रमा को अर्घ्य देकर भी व्रत खोलती हैं।
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