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स्वामी सांनद की तपस्या को आगे बढ़ाते हुए हरिद्वार में फिर शुरू हुआ अनशन, आंदोलन पर बैठे दो संत

Thu, 25 Oct 2018 08:21 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार Updated Thu, 25 Oct 2018 08:21 AM IST
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After Swami sanand ansan for ganga start again in matri sadan
स्वामी आत्मबोधानंद - फोटो : अमर उजाला

अविरल और निर्मल गंगा की मांग के समर्थन में अब मातृ सदन के ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद और स्वामी पुण्यानंद महाराज ने अनशन शुरू कर दिया है। उन्होंने जीडी अग्रवाल उर्फ स्वामी सानंद की गंगा एक्ट, गंगा पर निर्माणाधीन जल विद्युत परियोजनाओं को बंद करने, पेड़ों के कटान बंद करने आदि मांगों के समर्थन में अनशन शुरू किया है। मांगें नहीं माने जाने पर दोनों संतों ने प्राण त्यागने तक अनशन जारी रखने की चेतावनी दी है।

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संत गोपालदास के बाद बुधवार को मातृ सदन के दो और संतों ने अनशन शुरू किया है। उनका कहना है कि गंगा के लिए अपना सर्वस्व त्याग चुके स्वामी सानंद के अभियान को आगे बढ़ाते हुए बलिदान देने की श्रृंखला को आगे बढ़ाया जाएगा। अनशन पर बैठे ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद ने कहा कि गंगा के लिए दिए गए बलिदानों को हम निरर्थक नहीं जाने देंगे। जब तक मांगों पर कार्रवाई नहीं होती है, अनशन जारी रहेगा।
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उन्होंने कहा कि गंगा के लिए वे अपने प्राण त्यागने को तैयार हैं। आत्मबोधानंद अनशन के पहले दिन से केवल नींबू पानी, शहद और नमक का सेवन करेंगे। जबकि उनके साथ अनशन पर बैठे स्वामी पुण्यानंद फिलहाल फलाहार लेते रहेंगे।
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स्वामी पुण्यानंद ने कहा कि जरूरत पड़ी तो स्वामी सानंद के अभियान को आगे बढ़ाते हुए फलाहार का भी त्याग कर दिया जाएगा। वहीं, मातृ सदन के परामाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि स्वामी सानंद ने गंगा के लिए विशेष एक्ट बनाने और उत्तराखंड की छह नदियों पर चल रही परियोजनाओं को बंद करने की मांग पर 11 अक्तूबर को अपना सर्वस्व त्याग दिया था।

सीबीआई पर मामला रफा-दफा करने का आरोप

इसके बावजूद सरकार उनकी मांगों को भूल गई। उन्होंने कहा कि आठ अक्तूबर को स्वामी सानंद का स्वास्थ्य डॉक्टरी जांच में ठीक था, लेकिन प्रशासन ने उन्हें उठाकर एम्स में भर्ती कर दिया और अगले दिन ही उनकी हत्या करवा दी। उन्होंने कहा कि सरकारों ने एक जीवन को समाप्त कर दिया।  

सीबीआई के एक शीर्ष अधिकारी के घूसखोरी में संलिप्त होने का मामला सामने आने पर मातृ सदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद ने स्वामी निगमानंद की मृत्यु के मामले में भी सीबीआई पर दस करोड़ लेकर मामला रफादफा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वह लंबे समय से सीबीआई की भूमिका पर सवाल उठा रहे थे, लेकिन कोई नहीं मानता था।

अब घूसखोरी सामने आने पर साफ हो गया कि अधिकारी रिश्वत लेकर रिपोर्ट बदलने का काम करते आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्वामी निगमानंद की मृत्यु की जांच फिर से होनी चाहिए।

सानंद देहावसान के लिए सरकारें जिम्मेदार: प्रमोद कृष्णन      

मातृसदन में स्वामी शिवानंद सरस्वती और अनशनकारी संत आत्मबोधानंद से मिलने पहुंचे स्वामी प्रमोद कृष्णन ने केंद्र और राज्य सरकार को आडे़ हाथ लिया। उन्होंने कहा कि स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद देहावसान के लिए पूरी तरह से दोनों सरकारें जिम्मेदार हैं।

112 दिन तक देश और दुनिया के जानेमाने पर्यावरणविद और एक संत गंगा स्वच्छता के लिए अनशन पर बैठे रहे और केंद्र सरकार ने उनकी मांगों पर कभी भी गंभीरता से विचार नहीं किया। वे संत गंगा की रक्षा की पुकार करते हुए अपने प्राणों की आहुति तक दे बैठे। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य की सत्ता में बैठे लोगों को एक मिनट भी सत्ता में बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं है।    
   
इस दौरान पत्रकारों से बात करते हुए स्वामी प्रमोद कृष्णन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गंगा की स्वच्छता के नाम पर देश से बड़ा छल किया है। उन्होंने कहा कि स्वामी सानंद का बलिदान केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और राज्य की भाजपा सरकार को सबसे महंगा पडे़गा। कहा कि आज मातृसदन की उस पवित्र भूमि की माटी को अपने माथे पर लगाने और नमन करने के लिए आए हैं, जिस भूमि पर तप करते हुए गंगा रक्षा के लिए दो तपस्वी संतों स्वामी निगमानंद और स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद ने अपने प्राणों की बलि दे दी।

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