सुप्रीम कोर्ट के रोक लगाने के बाद भी चलता रहेगा ऑलवेदर रोड का काम, क्यों जानिए यहां
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उत्तराखंड शासन का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट से चारधाम ऑलवेदर रोड परियोजना पर रोक नहीं लगाई है।
शासन का कहना है कि न्यायालय ने परियोजना के कार्यों पर नहीं बल्कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के आदेश पर रोक लगाई है।
शासन की मानें तो परियोजना के उन कार्यों में कोई व्यवधान नहीं है, जो सोलिंग और पेंटिंग के संबंधित है। परियोजना में जहां-जहां रोड कटिंग का कार्य पूरा हो रहा वहां-वहां सोलिंग और पेंटिंग का काम जारी रहेगा। अलबत्ता न्यायालय का निर्णय आने तक परियोजना क्षेत्र में चिन्हित कोई पेड़ नहीं काटा जाएगा।
ओम प्रकाश ने स्पष्ट किया कि न्यायालय ने परियोजना पर रोक नहीं लगाई
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने चारधाम ऑलवेदर रोड परियोजना पर रोक लगाने के साथ ही उत्तराखंड सरकार को नोटिस जारी करके जवाब तलब किया है। इस आदेश को परियोजना पर रोक के तौर पर देखा जा रहा है।
परियोजना के भविष्य को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। इन कयासबाजी से जुदा अपर मुख्य सचिव (लोनिवि) ओम प्रकाश ने स्पष्ट किया कि न्यायालय ने परियोजना पर रोक नहीं लगाई है।
मीडिया कर्मियों द्वारा पूछे गए प्रश्न के जवाब उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने एनजीटी के आदेश पर रोक लगाई है। इस तरह कानूनन देखा जाए तो परियोजना पर कोई रोक नहीं है।
कोई पेड़ नहीं काटा जाएगा
उन्होंने कहा कि क्योंकि यह मामला न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है, इसलिए जब तक न्यायालय का फैसला नहीं आ जाता, कोई पेड़ नहीं काटा जाएगा। बाकी काम चलते रहेंगे।
जहां रोड की कटिंग हो गई है, वहां सोलिंग और पेंटिंग (सड़क को पक्का करके तारकोल डालने) का काम जारी रहेगा। इस काम पर सुप्रीम कोर्ट ने कोई रोक नहीं लगाई है। उन्होंने कहा कि सरकार 15 नवंबर तक न्यायालय में अपना पक्ष रखेगी।
एनजीटी ने ये दिए हैं प्रमुख आदेश
- चारधाम यात्रा मार्ग पर यात्रियों के लिए पहाड़ी की ओर पैदल मार्ग बनाए जाए
- न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी की अध्यक्षता निगरानी कमेटी बनाई जाए
- मार्ग पर पार्किंग और अन्य सुविधाएं जुटाई जाएं
- रोड चौड़ीकरण के बाद चिन्हित स्थलों से हटकर कोई ढाबा या रेस्टोरेंट न बने
- 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों के संचालन पर रोक
- मलबे का योजनाबद्ध निस्तारण और सरकारी भूमि पर डंपिंग साइट बनाए जाए