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...तो एक तरफा फैसला लेते हैं उत्तराखंडी मतदाता

Sat, 17 May 2014 09:16 AM IST
अनूप वाजपेयी/अमर उजाला, देहरादून
अनूप वाजपेयी/अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 17 May 2014 09:16 AM IST
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after result analysis of uttarakhand

उत्तराखंड के मतदाताओं ने फिर साबित किया है कि देश से जुड़े फैसलों के समय सभी एक साथ खड़े होते हैं।

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उत्तराखंड की पांचों सीटें मतदाताओं ने ना सिर्फ भाजपा की झोली में डाली है बल्कि जीत का अंतर बताता है कि मतदाताओं का मूड सभी जगह पर लगभग एक जैसा ही रहा।

उत्तराखंड के मतदाताओं ने लोकसभा चुनावों में कभी खंडित जनादेश नहीं दिया।

उत्तराखंड बनने के बाद लोकसभा क्षेत्रों में व्यापक परिवर्तन हुआ है बावजूद यहां 1957 से 2014 तक लोकसभा चुनाव के नतीजों ने स्पष्ट जनादेश दिया है।

हमेशा किया है एकतरफा सपोर्ट

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कई मौकों पर कांग्रेस और भाजपा ने पांच की पांचों सीटें जीती हैं। 1984 में इंदिरा गांधी की मृत्यु के बाद कांग्रेस ने पांचों सीटों पर एकतरफा कब्जा जमाया।

1991 के चुनाव में मतदाताओं ने भाजपा पर विश्वास जता पांचों सीटे उसे सौंप दी। इसी प्रकार 1998 में सभी सीटों पर मतदाताओं का भरोसा भाजपा पर रहा।

2009 के लोकसभा चुनाव में मतदाताओं ने सभी सीटें कांग्रेस की झोली में डाली थीं। विजय बहुगुणा के सीट छोड़कर मुख्यमंत्री बनने पर उपचुनाव में टिहरी के लोगों ने लोकसभा का प्रतिनिधित्व भाजपा को सौंप दिया।

उत्तराखंड लोकसभा सीटों से संबंधित आंकड़ों में 1971, 1967, 1962 और 1957 में सभी सीटों पर कांग्रेस का ही कब्जा रहा है।

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बड़े उलटफेर में भी नहीं पड़ा असर

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देश में कितना भी उलटफेर हुआ उत्तराखंड ने फिर भी किसी एक दल को सर्वाधिक 3-2 का समर्थन दिया है।

उत्तराखंड गठन के बाद तीन लोकसभा चुनाव हुए हैं जिसमें 2004 में भाजपा ने तीन सीटें जीती थीं। जबकि एक-एक कांग्रेस(नैनीताल) व समाजवादी पार्टी (हरिद्वार) ने जीती थीं।

1980 में हरिद्वार के मतदाताओं ने चार सीटों से अलग फैसला ले लोकदल उम्मीदवार को जिताया था। अन्य चार सीटें कांग्रेस को मिली थीं।

1989 के चुनाव में भी कांग्रेस ने चार सीट जीतीं। उस समय पौड़ी की एक सीट जनता दल के खाते में गई थी।

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जानिए, कब-कब बंटे मतदाता

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1999 में हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा की एक सीट कम होकर चार रह गईं। तब नैनीताल सीट नारायण दत्त तिवारी ने जीती थी।

1996 में भी भाजपा ने 3-2 लोकसभा का चुनाव जीता। इस बार नैनीताल के मतदाताओं के साथ पौड़ी के लोगों ने भी कांग्रेस पर भरोसा जताया और दो सीटें भाजपा को कम मिलीं।

कांग्रेस-भाजपा के अलावा मतदाताओं ने 1977 में जनता पार्टी पर विश्वास जता उसे पांच में से तीन सीटें थमाई। जबकि अल्मोड़ा सीट भाजपा और टिहरी सीट कांग्रेस के पास गई।
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