फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   after eight year case file on officers.

शिक्षा मित्र के 'हत्यारे' अफसरों पर आठ साल बाद केस

Wed, 04 Feb 2015 10:52 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 04 Feb 2015 10:52 AM IST
विज्ञापन
after eight year case file on officers.

देहरादून के गांधी पार्क में आत्महत्या करने वाले शिक्षा मित्र रमेश कुमार के मामले में आरोपी अधिकारियों के खिलाफ करीब आठ साल बाद मुकदमा दर्ज हुआ है।

विज्ञापन


28 नवंबर 2006 को की थी गांधी पार्क में आत्महत्या
राज्य सूचना आयोग के दबाव में बीरोंखाल ब्लॉक के तत्कालीन खंड शिक्षा अधिकारी शेषमणि राव, तत्कालीन लिपिक विवेक रावत, खलधार के तत्कालीन प्रधानाचार्य उमेश चंद्र, बीआरसी के तत्कालीन समन्वयक मनोज सिंह रावत और प्राथमिक विद्यालय कंडोली के तत्कालीन प्रधानाध्यापक मानसिंह के खिलाफ पौड़ी कोतवाली में केस दर्ज किया गया है।
विज्ञापन


राज्य सूचना आयोग के मुताबिक धुमाकोट थाने के थानाध्यक्ष एमके बधकोटी ने मामले की विवेचना शुरू कर दी है। पौड़ी जिले के बीरोंखाल विकासखंड के चौरखिंडा गांव निवासी शिक्षा मित्र रमेश कुमार पुत्र फतेलाल ने 28 नवंबर 2006 को राजधानी देहरादून के गांधी पार्क में आत्महत्या की थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


सुसाइड नोट में रमेश कुमार ने उक्त अधिकारियों पर रिश्वत मांगने का आरोप लगाया था। सुसाइड नोट में यह भी कहा गया था कि उसका वेतन नहीं दिया जा रहा है और उससे नौकरी की एवज में 40 हजार रुपए की मांग की जा रही है।

आरटीआई क्लब उत्तराखंड के महासचिव अमर सिंह धुंता ने इस मामले में विद्यालयी शिक्षा से जानकारी मांगी तो कुछ और ही मामला सामने आया। शिक्षा विभाग ने बताया कि एसडीएम की जांच में जिन लोगों को दोषी बताया गया उनका सिर्फ तबादला ही हुआ है।


राज्य सूचना आयोग के निर्देश पर पौड़ी के जिला शिक्षा अधिकारी (बेसिक) ने जो जांच रिपोर्ट दी, उससे यह खुलासा हुआ कि आरोपी अधिकारियों ने रमेश कुमार के दस्तावेजों से छेड़छाड़ की। उनके अधिवास प्रमाण पत्र में उनके गांव का नाम भी बदला और रमेश कुमार से 40 हजार रुपए मांगे।

यह भी खुलासा हुआ कि रमेश कुमार ने पहले कई महीने तक शिक्षा मित्र के रूप में काम किया था, लेकिन उसे कुछ दिन का ही मानदेय दिया गया। इस मामले में राज्य सूचना आयुक्त राजेंद्र कोटियाल ने सचिव माध्यमिक शिक्षा व सचिव सामान्य प्रशासन को जांच करने के आदेश दिए थे। अब इस मामले की सुनवाई राज्य सूचना आयुक्त सुरेंद्र सिंह रावत कर रहे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed