अफ्रीकन स्वाइन फीवर: उत्तराखंड के दुगड्डा में 10 सुअरों की मौत, हल्द्वानी में 15 दिन में 25 सुअरों की गई जान
दुगड्डा क्षेत्र में संक्रमण के कारण अभी तक 10 पालतू सुअरों की मौत हो चुकी है जबकि 15 संक्रमित सुअरों का सैंपल लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है।
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कोटद्वार की दुगड्डा नगर पालिका क्षेत्र में अफ्रीकन स्वाइन फीवर से अभी तक 10 पालतू सुअरों की मौत हो चुकी है जबकि अन्य कई पालतू सूअर संक्रमण की चपेट में हैं। पशुपालन विभाग की ओर से 15 संक्रमित सुअरों के सैंपल लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला में भेज दिए गए हैं।
नगर क्षेत्र के अंतर्गत धनीराम बाजार व सुभाष बाजार वार्ड में सूअर पालन का कार्य किया जाता है। सभासद दीपक ध्यानी ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से अफ्रीकन स्वाइन फीवर के कारण सुअरों की मौत हो रही है जबकि कई पालतू सूअर संक्रमण की चपेट में है। पशु चिकित्सक डॉ. एपी रेडे ने बताया कि क्षेत्र में संक्रमण के कारण अभी तक 10 पालतू सुअरों की मौत हो चुकी है जबकि 15 संक्रमित सुअरों का सैंपल लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है।
उन्होंने बताया कि पालिका प्रशासन को पत्र लिखकर सूअर पालकों को पालतू सुअरों को खुले में छोड़ने के बजाय बाड़ों में रखने के लिए निर्देशित करने के लिए कहा है। उन्होंने सूअर पालकों से अपने बाड़ों में कीटनाशक का छिड़काव करने, सूअर के बीमार होने पर इसकी सूचना पशुपालन विभाग को देने की अपील भी की।
15 दिनों के भीतर 25 सुअरों की मौत
हल्द्वानी में 15 दिनों के भीतर 25 सुअरों की मौत होने से पशुपालन विभाग में खलबली मच गई है। अफ्रीकन स्वाइन फीवर की आशंका को देखते हुए रुद्रपुर लैब से पशु चिकित्सकों की टीम हल्द्वानी पहुंची। टीम ने मंगलवार को गांधीनगर, काठगोदाम और राजपुरा क्षेत्र का दौरा किया और मृत सुअरों के सैंपल लिए।
टीम में शामिल डॉ. मीना चंद और डॉ. सुधा कृपाल ने बताया कि सैंपल जांच के लिए राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशुरोग संस्थान भोपाल भेजे जा रहे हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही बीमारी की पुष्टि हो पाएगी। वहीं इससे पूर्व पशु चिकित्साधिकारी डॉ. रजनीश पाठक ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर जांच रिपोर्ट मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को भेज दी है।
क्या है अफ्रीकन स्वाइन फीवर
अफ्रीकन स्वाइन फीवर अफ्रीकी देशों से आया है। यह एक वायरल बीमारी है। इस बीमारी में तेज बुखार के बाद दिमाग की नस फटने से सुअरों की मौत हो जाती है। इस रोग से सुअरों के बचने का प्रतिशत काफी कम होता है। यह रोग एक से दूसरे सुअर के संपर्क में आने से फैलता है। अगर संक्रमित सुअर ने कुछ खाकर छोड़ दिया और उसे दूसरे स्वस्थ सुअर खा ले तो यह रोग उसे भी हो जाता है। यह बीमारी सुअरों के लिए बेहद खतरनाक है। यह बीमारी जानवरों से इंसानों में नहीं फैलती है।
बचाव के लिए नही है कोई वैक्सीन या दवा
अफ्रीकन स्वाइन फीवर से बचाव के लिए कोई वैक्सीन या दवा नहीं है। इससे बचाव के लिए जानवरों को खुले में न छोड़ें। गोबर और मृत जानवरों को गड्ढे में दफनाएं। इसके अलावा ब्लीचिंग या डीडीटी का छिड़काव करें।
हल्द्वानी के गांधीनगर, काठगोदाम और राजपुरा क्षेत्र में बीते 15 दिन के भीतर 25 सुअरों की मौत हो गई हैं। रुद्रपुर लैब से डॉक्टरों की टीम ने मंगलवार को प्रभावित स्थलों का दौरा किया। मृत सुअरों के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे जाएंगे।
- डॉ. रजनीश पाठक, पशु चिकित्साधिकारी