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केदारनाथः भक्तों के पांव पर सरकार का 'ब्रेक'
अमर उजाला, गुप्तकाशी/फाटा
Updated Wed, 11 Sep 2013 07:29 PM IST
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केदारनाथ मंदिर में शुरू हो रही दोबारा पूजा-अर्चना में शामिल होने के लिए मंगलवार को केदारघाटी और कालीमठ घाटी के सैकड़ों लोगों ने धाम को कूच किया लेकिन पुलिस प्रशासन ने उन्हें फाटा में ही रोक दिया।
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इससे आक्रोशित लोग फाटा बस अड्डे पर ही धरने पर बैठ गए। उन्होंने कहा कि धाम में न जाने देना लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ है।
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आराध्य देव की पूजा-अर्चना
एडीएम अशोक पांडे, एसडीएम डा. राकेश तिवारी ने 12 सितंबर को डीएम के साथ केदारनाथ धाम जाने की अनुमति देने संबंधी संयुक्त बैठक करने का आश्वासन दिया तब जाकर प्रदर्शनकारी माने। इसके बाद सभी ने बाबा केदार की पूजा के लिए लाई सामग्री फाटा में ही बाबा को अर्पित की।
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तस्वीरों में देखें...राजनीति के बीच केदारबाबा का 'महाभिषेक'
धरना स्थल पर आयोजित सभा में तीर्थ पुरोहित, स्थानीय लोग और विभिन्न राजनैतिक दलों के सैकड़ों कार्यकर्ता शामिल थे। पूर्व विधायक आशा नौटियाल ने कहा कि बुधवार को केदारघाटी के आराध्य देव की पूजा-अर्चना दोबारा शुरू की जा रही है, लेकिन इसमें स्थानीय लोगों के प्रवेश पर पाबंदी लगाना गलत है।
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पैदल मार्ग से केदारनाथ
तीर्थ पुरोहित सुरेंद्र बगवाड़ी ने कहा कि धाम में मौजूद सरकारी कर्मचारी और अधिकारी उनके आवासों में रह रहे हैं और उन्हें धाम नहीं जाने दिया जा रहा है।
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जब डीएम पैदल मार्ग से केदारनाथ जा सकते हैं, तो स्थानीय लोग क्यों नहीं। सभा का संचालन माधव कर्नाटकी ने किया। धरने पर ब्लाक प्रमुख ऊखीमठ फते सिंह रावत, गोविंद सिंह रावत, जयंती कुर्मांचली, दर्शनी पंवार, विपिन सेमवाल समेत सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित थे।
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कहा-सुनी हुई
पुलिस और धरना दे रहे लोगों के बीच कहा सुनी भी हुई। तीर्थ पुरोहितों ने आक्रोश जताया कि प्रशासन की देखरेख में होने के बावजूद धाम में उनके आवासीय और व्यावसायिक भवनों से चोरी हुई, लेकिन प्रशासन उन्हें धाम नहीं जाने दे रहा। इसी बात को लेकर कुछ देर तक पुलिस और लोगों के बीच कहासुनी होती रही।
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स्थितियां नहीं हुई सामान्य : एसडीएम
उपजिलाधिकारी ऊखीमठ डा. राकेश तिवारी ने बताया कि अभी केदारनाथ धाम में स्थितियां सामान्य नहीं हो पाई हैं। रहने के लिए उचित व्यवस्था नहीं है। फिलहाल केवल पूजा शुरू करवाई जा रही है। व्यवस्थाएं सही होने पर आम श्रद्धालुआें को भी धाम जाने दिया जाएगा।
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