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डेंगू मलेरिया को लेकर बरतें एहतियात, प्रशासन कर रहा सतर्क
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डेंगू-मलेरिया के सीजन को देखते हुए डीएम डॉ. आर. राजेश कुमार ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को लोगों को लक्षण और बचाव के बारे में लोगों को जागरूक करने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद सीएमओ डॉ. मनोज उप्रेती ने डेंगू के बारे में विस्तृत जानकारी भी जारी की है।
सीएमओ ने बताया कि डेंगू बुखार एक प्रकार के मच्छर के काटने से फैलने वाला वायरल बुखार है। डेंगू सभी मच्छरों के काटने से नहीं फैलता है। संक्रमित एडीज इजीप्टाई और एडीज एल्बोपिक्टस मादा मच्छर के काटने से यह फैलता है। डेंगू मच्छर के शरीर पर काले व सफेद रंग की पट्टियां होती हैं। इसे टाइगर मच्छर भी कहते हैं। यह मच्छर ज्यादातर दिन के समय ही काटते हैं। एडीज मच्छर एकत्रित साफ व स्थिर पानी में पनपता है।
एडीज मच्छर बर्तन, पानी की टंकी, रूम कूलर, फूल दान, टूटी फूटी बोतलों, नारियल के खोल, गमले, टंकी के ढक्कन के किनारे, पुराने टायर, डिब्बे आदि और यहां तक कि पत्तियों में भी अगर एक सप्ताह तक पानी ठहरा हो तो आसानी से पनप सकता है, इसलिए ज्यादा दिनों तक ऐसी जगहों पर पानी एकत्र न होने दें। मलेरिया से बचाव के लिए भी मच्छर को न पनपने दें।
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डेंगू बुखार के लक्षण
साधारण डेंगू बुखार : ठंड लगने के साथ अचानक तेज बुखार आना, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द होना। आंखों के पिछलेे भाग में दर्द होना जो आंखों को दबाने या हिलाने से और भी बढ़ जाता है। अत्यधिक कमजोरी लगना, भूख न लगना, गले में दर्द होना, शरीर पर लाल चकत्ते आना, साधारण डेंगू बुखार की अवधि लगभग 5-7 दिन तक रहती है और रोगी स्वयं ठीक हो जाता है।
हैमरेजिक डेंगू बुखार : साधारण डेंगू बुखार के लक्षणों के साथ-साथ त्वचा पर गहरे नीले काले रंग के छोटे या बड़े चकत्ते पड़ना, नाक मसूड़ों से खून आना आदि रक्तस्राव के लक्षण हैं।
डेंगू शॉक सिंड्रोम : इस प्रकार के बुखार में हैमरेजिक बुखार के लक्षणों के साथ कुछ और लक्षण भी प्रकट हो जाते हैं। जैसे रोगी अत्यधिक बेचैन हो जाता है और तेज बुखार के बावजूद उसकी त्वचा ठंडी महसूस होती है। रोगी धीरे-धीरे होश खोने लगता है। यदि रोगी की नाड़ी देखी जाए तो वह तेज और कमजोर महसूस होती हैं। रोगी का रक्तचाप कम होने लगता है।
ऐसे करें उपचार
साधारण डेंगू बुखार स्वयं ठीक होने वाला रोग है। इसका उपचार लक्षणों के आधार पर ही किया जाता है। बुखार के लिए पैरासिटामॉल की गोली ही सुरक्षित है। रोगी को डिस्प्रिन/एस्प्रिन बिल्कुल नहीं लेनी चाहिए। सामान्य रूप से भोजन देना जारी रखें व अधिक पानी पिलाएं, रोगी को आराम करने देें, यदि रोगी में डेंगू हैमरेजिक बुखार, डेंगू शॉक सिंड्रोम की ओर संकेत करने वाला एक भी लक्षण प्रकट होता नजर आए, तो शीघ्र निकटतम अस्पताल में ले जाकर योग्य डॉक्टर को दिखाएं। बिना डॉक्टर की सलाह के दवा बिल्कुल न लें। डेंगू मलेरिया की जांच सरकारी अस्पतालों में निशुल्क है।
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सीएमओ ने बताया कि डेंगू बुखार एक प्रकार के मच्छर के काटने से फैलने वाला वायरल बुखार है। डेंगू सभी मच्छरों के काटने से नहीं फैलता है। संक्रमित एडीज इजीप्टाई और एडीज एल्बोपिक्टस मादा मच्छर के काटने से यह फैलता है। डेंगू मच्छर के शरीर पर काले व सफेद रंग की पट्टियां होती हैं। इसे टाइगर मच्छर भी कहते हैं। यह मच्छर ज्यादातर दिन के समय ही काटते हैं। एडीज मच्छर एकत्रित साफ व स्थिर पानी में पनपता है।
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एडीज मच्छर बर्तन, पानी की टंकी, रूम कूलर, फूल दान, टूटी फूटी बोतलों, नारियल के खोल, गमले, टंकी के ढक्कन के किनारे, पुराने टायर, डिब्बे आदि और यहां तक कि पत्तियों में भी अगर एक सप्ताह तक पानी ठहरा हो तो आसानी से पनप सकता है, इसलिए ज्यादा दिनों तक ऐसी जगहों पर पानी एकत्र न होने दें। मलेरिया से बचाव के लिए भी मच्छर को न पनपने दें।
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डेंगू बुखार के लक्षण
साधारण डेंगू बुखार : ठंड लगने के साथ अचानक तेज बुखार आना, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द होना। आंखों के पिछलेे भाग में दर्द होना जो आंखों को दबाने या हिलाने से और भी बढ़ जाता है। अत्यधिक कमजोरी लगना, भूख न लगना, गले में दर्द होना, शरीर पर लाल चकत्ते आना, साधारण डेंगू बुखार की अवधि लगभग 5-7 दिन तक रहती है और रोगी स्वयं ठीक हो जाता है।
हैमरेजिक डेंगू बुखार : साधारण डेंगू बुखार के लक्षणों के साथ-साथ त्वचा पर गहरे नीले काले रंग के छोटे या बड़े चकत्ते पड़ना, नाक मसूड़ों से खून आना आदि रक्तस्राव के लक्षण हैं।
डेंगू शॉक सिंड्रोम : इस प्रकार के बुखार में हैमरेजिक बुखार के लक्षणों के साथ कुछ और लक्षण भी प्रकट हो जाते हैं। जैसे रोगी अत्यधिक बेचैन हो जाता है और तेज बुखार के बावजूद उसकी त्वचा ठंडी महसूस होती है। रोगी धीरे-धीरे होश खोने लगता है। यदि रोगी की नाड़ी देखी जाए तो वह तेज और कमजोर महसूस होती हैं। रोगी का रक्तचाप कम होने लगता है।
ऐसे करें उपचार
साधारण डेंगू बुखार स्वयं ठीक होने वाला रोग है। इसका उपचार लक्षणों के आधार पर ही किया जाता है। बुखार के लिए पैरासिटामॉल की गोली ही सुरक्षित है। रोगी को डिस्प्रिन/एस्प्रिन बिल्कुल नहीं लेनी चाहिए। सामान्य रूप से भोजन देना जारी रखें व अधिक पानी पिलाएं, रोगी को आराम करने देें, यदि रोगी में डेंगू हैमरेजिक बुखार, डेंगू शॉक सिंड्रोम की ओर संकेत करने वाला एक भी लक्षण प्रकट होता नजर आए, तो शीघ्र निकटतम अस्पताल में ले जाकर योग्य डॉक्टर को दिखाएं। बिना डॉक्टर की सलाह के दवा बिल्कुल न लें। डेंगू मलेरिया की जांच सरकारी अस्पतालों में निशुल्क है।