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स्मृति शेष: फलों का बाग लेने उत्तराखंड आए थे दिलीप कुमार, पहाड़ों की रानी से भी था विशेष लगाव

Wed, 07 Jul 2021 10:36 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Wed, 07 Jul 2021 10:36 PM IST
सार

देशभर में बाग लेने का उनका पुस्तैनी काम था। हालांकि, 15 साल बाद दिलीप कुमार अपनी ब्लॉकबस्टर फिल्म मधुमती की शूटिंग के लिए उत्तराखंड आए।

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Actor dilip kumar passed away : dilip kumar connection with uttarakhand
मसूरी में अभिनेता दिलीप कुमार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता दिलीप कुमार फिल्मों में काम करने से पहले उत्तराखंड में फलों का बाग लेने के लिए आए थे। दिलीप कुमार पहाड़ चढ़े तो यहां की वादियों के कायल हो गए और साल 1958 में मधुमती फिल्म की शूटिंग के सिलसिले में पूरी टीम के साथ आए। 

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दिलीप कुमार के निधन से देशभर में शोक की लहर है। दून लाइब्रेरी के रिसर्च एसोसिएट मनोज पंजानी ने बताया कि आजादी से पहले जब दिलीप कुमार फिल्म इंडस्ट्री में नहीं आए थे तो वह उत्तराखंड में फलों का बाग लेने अपने परिवार के सदस्यों के साथ आए थे।
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देशभर में बाग लेने का उनका पुस्तैनी काम था। हालांकि, 15 साल बाद दिलीप कुमार अपनी ब्लॉकबस्टर फिल्म मधुमती की शूटिंग के लिए उत्तराखंड आए। फिल्म का अधिकतर भाग नैनीताल की वादियों में फिल्माया गया था। मनोज ने बताया कि दिलीप कुमार को पढ़ने का बहुत शौक था। वह अक्सर किताबें पढ़ते थे।  

60 के दशक में मसूरी आए थे दिलीप कुमार

बॉलीवुड अभिनेता दिलीप कुमार का ‘पहाड़ों की रानी’ मसूरी से भी विशेष लगाव था। वह 60 के दशक में मसूरी आए थे। उनकी पत्नी सायरो बानो का जन्म भी मसूरी के लंढौर में हुआ था। दिलीप कुमार के निधन से मसूरी में उनके प्रशंसकों में शोक की लहर है। 

बांग्ला और हिंदी फिल्मों के अभिनेता विक्टर बनर्जी ने भी गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा बॉलीवुड ने एक बेहतरीन कलाकार खोया है। वहीं, इतिहासकार गोपाल भारद्वाज कहते हैं कि अभिनेता दिलीप कुमार 1960 के दशक में मसूरी आए थे।

कहा कि उनकी पत्नी का जन्मस्थान मसूरी होने की वजह से दिलीप कुमार का मसूरी से विशेष लगाव था। 50 और 60 के दशक में दिलीप कुमार दोस्तों के साथ कई बार मसूरी आए। उस दौरान उन्होंने मसूरी में कई हिंदी फिल्मों की शूटिंग भी हिस्सा लिया। 

वहीं, मशहूर फोटोग्राफर और पालिका के नामित सभासद मदन मोहन शर्मा ने बताया कि जब वह 15 साल के थे तब सवाय होटल में दिलीप कुमार से मिलने का अवसर मिला। उनके साथ एक फोटो भी खिंचवाई थी, जो आज भी उनके पास मौजूद है। कहा कि देश ने एक शानदार व्यक्तित्व और उम्दा कलाकार खो दिया है। 

साथ काम न करने का आज भी मलाल : विक्टर 
बांग्ला और हिंदी फिल्मों के अभिनेता विक्टर बनर्जी का कहना है कि दिलीप कुमार से दो बार बंगलौर में मिला था, लेकिन उनके साथ काम न करने का आज भी मलाल है। कहा कि यूसुफ भाई एक महान कलाकार के साथ एक महान व्यक्ति भी थे। कहा कि उनके काम की जितनी तारीफ करें कम है। कहा कि दिलीप कुमार हमारे जमाने के देवदास थे।

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