खटीमा पेपर मिल पर गिरी NGT की गाज, दो प्लांट सील
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियम और शर्तें पूर्ण न कर पाने के चलते स्थानीय प्रशासन, राज्य प्रदूषण बोर्ड, जिला उद्योग केंद्र के अधिकारियों ने खटीमा फाइबर्स पेपर मिल के डिजास्टर और बायलर प्लांट को सील कर दिया। इसके अलावा प्लांट का बिजली कनेक्शन भी काट दिया गया है। बता दें कि सोमवार को एनजीटी की सख्ती के बाद काशीपुर की तीन फैक्ट्रियां सील की गई थीं, जिसमें एक फैक्ट्री की दो यूनिटें शामिल थीं।
राज्य प्रदूषण बोर्ड ने खटीमा फाइबर्स कारखाने में लगे डिजास्टर और बायलर प्लांट में केमिकल के इस्तेमाल पर केमिकल रिकवरी सिस्टम लगाने को कहा था। लेकिन खटीमा फाइबर्स प्रशासन ने कहा कि वह केमिकल का इस्तेमाल ही नहीं करते। यह मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में चला गया।
एनजीटी ने प्लांट की जांच कराई तो डिजास्टर और बायलर प्लांट में केमिकल का इस्तेमाल होना पाया गया। रिपोर्ट के आधार पर एनजीटी ने कारखाने के बायलर और डिजास्टर को सील करने के आदेश कर दिए। इसके साथ ही बीते 10 दिसंबर को कारखाने का बिजली कनेक्शन काटने के भी निर्देश दिए थे।
डीएम अक्षत गुप्ता ने एसडीएम ऋचा सिंह, महाप्रबंधक जिला उद्योग, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रक अधिकारी की टीम को मामले में जरूरी कार्यवाही के आदेश दिए थे। मंगलवार को एसडीएम के साथ मौके पर पहुंची टीम ने पाया कि बायलर और डिजास्टर चलाया जा रहा था। बिजली का कनेक्शन आदेश के बावजूद विद्युत विभाग द्वारा नहीं काटा था। टीम ने बायलर और डिजास्टर को सील करते हुए बिजली का कनेक्शन भी काट दिया।
20 अप्रैल 2015 को भी सीज हुआ था कारखाना
यह पहला मौका नहीं है जब खटीमा फाइबर्स कारखाने को सील किया गया हो। 20 अप्रैल 2015 को करीब तीन सौ करोड़ रुपये के बकाए के चलते कारखाने को सील किया गया था। बैंक ऑफ बड़ौदा और आईसीआई बैंक ने बकाया वसूली न होने पर डीएम के निर्देश पर सरफेसी अधिनियम धारा-14 के तहत अपना पजेशन कब्जा ले लिया था।
इस कार्रवाई में कारखाने के सीएमडी, मैनेजर, सिक्योरिटी सहित समस्त कर्मचारियों को बाहर कर कारखाने के प्रत्येक प्लांट के मुख्य एवं सह द्वारों में ताले जड़कर उसे सीज कर दिया था। लेकिन इस बार सिर्फ डिजास्टर और बायलर प्लांट सीज करने के अलावा बिजली का कनेक्शन काटा है। कारखाने का मुख्य द्वार खुला छोड़ा गया है।
हम केमिकल का इस्तेमाल नहीं करते: कारखाना प्रबंधन
खटीमा फाइबर्स के मैनेजर क्वालिटी कंट्रोल डॉ. मोहन ने बताया कि एनजीटी मानता है कि गन्ने की खोई, लकड़ी से चलने वाले डिजास्टर और बायलर केमिकल पल्पिंग करते हैं। इसके लिए केमिकल रिकवरी सिस्टम लगाया जाना चाहिए। अन्यथा केमिकल डिजास्टर सिस्टम यूज नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि हम केमिकल पल्पिंग नहीं करते। वेस्ट पेपर को ही बायल करते हैं और उसी को यूज करते हैं।