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'एक्ट ऑफ गॉड' से आई भूखों मरने की नौबत
अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 29 Aug 2013 08:34 AM IST
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अगले छह महीने में उत्तराखंड में करीब 1.80 लाख लोगों को रोजगार से हाथ धोना पड़ेगा। आपदा के कारण पर्यटन और सेवा क्षेत्र को प्रतिवर्ष करीब 4170 करोड़ रुपये के नुकसान की आशंका है।
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उद्यमियों की संस्था एसोचैम ने उत्तराखंड में आई आपदा के बाद की भयावह तस्वीर को सामने रखते हुए रिजर्व बैंक से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है। द एसोसिएटेड चैंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया के महासचिव डीएस रावत ने केंद्र सरकार, केंद्रीय वित्त मंत्रालय और रिजर्व बैंक को इस मामले में पत्र लिखा है।
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उनका कहना है कि आपदा के बाद से उत्तराखंड में करीब पचास प्रतिशत बुकिंग निरस्त की जा चुकी हैं। जो क्षेत्र आपदा प्रभावित नहीं भी हैं वहां भी पर्यटक नहीं जा रहे हैं। उत्तराखंड की कुल कमाई की एक चौथाई आय पर्यटन से ही है।
हाल यह है कि पर्यटन 25 प्रतिशत रह जाने की आशंका है। चार धाम यात्रा जल्द शुरू होने की उम्मीद कम है। आपदा ने उत्तराखंड में होटल, रेस्टोरेंट आदि को ही केवल नुकसान नहीं पहुंचाया है, बल्कि पूरे पर्यटन क्षेत्र को पांच साल पीछे धकेल दिया है।
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अगर यही हाल रहा तो करीब 1.80 लाख लोगों को आने वाले छह माह में रोजगार से हाथ धोना पड़ेगा। रावत का कहना है कि आपदा की इस घड़ी में केंद्र सरकार विशेषकर रिजर्व बैंक को पर्यटन उद्योग को सहारा देना चाहिए।
खासकर होटल उद्योग को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यह सेक्टर बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थाओं से लिए गए कर्ज को वापस करने में इस समय अक्षम है।
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