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आचार्य बालकृष्ण बन गए 'बिजनेस लीडर', मिला एक और अवॉर्ड
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
Updated Fri, 20 Apr 2018 10:57 AM IST
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balkrishna
पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण की उपलब्धियों में एक और उपलब्धि जुड़ गई।
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नई दिल्ली में आयोजित ऑल इंडिया मैनेजमेंट एसोसिएशन की ओर से आयोजित एआईएमए मैनेजिंग इंडिया अवार्ड समारोह में आचार्य बालकृष्ण को ट्रांसफोर्मेशनल बिजनेस लीडर ऑफ द इयर से सम्मानित किया गया। यह अवार्ड केंद्रीय मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर ने आचार्य बालकृष्ण को प्रदान किया।
इस दौरान राज्यवर्द्धन सिंह राठौर ने कहा कि आचार्य बालकृष्ण में प्रबंधन की प्रबल क्षमताएं हैं। पतंजलि योगपीठ की सफलता के पीछे उनका बहुत बड़ा योगदान है। उन्होंने कहा कि कई वर्षों से देश में बहुराष्ट्रीय कंपनियों का भ्रमजाल बढ़ता जा रहा था।
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बाबा रामदेव और लाखों कर्मयोगियों की तपस्या से पतंजलि ने पाया मुकाम
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कहा कि पतंजलि ने इस भ्रमजाल को तोड़कर केमिकल रहित उच्च गुणवत्तायुक्त उत्पादों का श्रेष्ठ विकल्प देश की जनता के सामने रखा। जिसे देश की जनता ने पूरे विश्वास के साथ अपनाया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि हमारी परंपरा, संस्कृति समृद्धशाली होते हुए भी इसकी स्वीकार्यता का अभाव विदेश के साथ-साथ देश में भी दिखाई पड़ रहा था।
पतंजलि किसी व्यवसाय के लिए शुरू किया संस्थान नहीं है बल्कि देश के लोगों की भावनाओं और आवश्यकताओं की पूर्ति व राष्ट्रनिर्माण के लिए शुरू किया गया अनुष्ठान है। पतंजलि की उत्पत्ति विदेशी उत्पादों से तंग आ चुके लोगों की पीड़ा से हुई है।
उन्होंने कहा कि आज पतंजलि एक बड़ा और विश्वसनीय ब्रांड बन चुका है। उन्होंने कहा कि पतंजलि बाबा रामदेव के पुरुषार्थ से और लाखों कर्मयोगी लोगों की तपस्या से इस मुकाम पर पहुंचा है। उन्होंने कहा कि हमने कभी बड़ा बनने का स्वप्न नहीं देखा, लेकिन बड़ा करने का स्वप्न जरूर देखा। यदि आप बड़ा काम करते हैं तो देश आपको स्वत: ही बड़ा बना देता है।
पतंजलि किसी व्यवसाय के लिए शुरू किया संस्थान नहीं है बल्कि देश के लोगों की भावनाओं और आवश्यकताओं की पूर्ति व राष्ट्रनिर्माण के लिए शुरू किया गया अनुष्ठान है। पतंजलि की उत्पत्ति विदेशी उत्पादों से तंग आ चुके लोगों की पीड़ा से हुई है।
उन्होंने कहा कि आज पतंजलि एक बड़ा और विश्वसनीय ब्रांड बन चुका है। उन्होंने कहा कि पतंजलि बाबा रामदेव के पुरुषार्थ से और लाखों कर्मयोगी लोगों की तपस्या से इस मुकाम पर पहुंचा है। उन्होंने कहा कि हमने कभी बड़ा बनने का स्वप्न नहीं देखा, लेकिन बड़ा करने का स्वप्न जरूर देखा। यदि आप बड़ा काम करते हैं तो देश आपको स्वत: ही बड़ा बना देता है।