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Dehradun News: धोखाधड़ी के 19 वर्ष पुराने मामले में आरोपी दोषमुक्त
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अपर न्यायिक मजिस्ट्रेट रवि शंकर मिश्रा की अदालत ने नौकरी लगाने के नाम पर धोखाधड़ी के 19 वर्ष पुराने मामले में सहसपुर के फतेहपुर निवासी आरोपी मनोज राणा को दोषमुक्त करार दिया है। 10 जून 2006 को संदीप कुमार ने कोतवाली में तहरीर दी थी। उन्होंने बताया था कि उनके मामा ने देहरादून के तिलक रोड निवासी इंद्रेश कुमार शर्मा से नौकरी की बात की है। इंद्रेश उन्हें अपने साथ हरर्बटपुर चौक ले गया। उसने उन्हें सहसपुर के फतेहपुर निवासी मनोज राणा से मिलाते हुए कहा कि ये एक बड़ी दवा कंपनी में प्रबंधक हैं। ये उनकी नौकरी लगाएंगे। मनोज राणा ने उनसे कहा कि अपने शैक्षणिक प्रमाणपत्र की फोटो कॉपी, फोटो और 30 हजार रुपये नकद ले आना। 27 अगस्त 2005 को उन्होंने इंद्रेश कुमार शर्मा के सामने मनोज राणा को ढालीपुर स्थित किराये के कमरे में 30 हजार रुपये, प्रमाणपत्र और फोटो दिए। जब कॉल लैटर नहीं आया तो मनोज राणा से संपर्क किया। इस दौरान आरोपी टाल-मटोल करने लगा। रुपये वापस मांगने पर जान से मारने की धमकी दी। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर न्यायालय के समक्ष पेश किया था। आरोपी ने स्वयं को निर्दोष बताया था। अभियोजन और बचाव पक्ष ने न्यायालय के समक्ष साक्ष्य और दलीलें पेश कीं। साक्ष्यों के अभाव और अभियोजन सिद्ध न होने पर अपर न्यायिक मजिस्ट्रेट रवि शंकर मिश्रा की अदालत ने आरोपी को दोषमुक्त करार दिया।