पास हुई ‘एक्सीडेंट रिस्क रिडक्शन डिवाइस’
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राजधानी देहरादून के दो होनहारों हिमांशु चावला और विजय सिंह की ‘एक्सीडेंट रिस्क रिडक्शन डिवाइस’ पहली परीक्षा में पास हो गई है।
मंगलवार को छात्रों ने इस डिवाइस का डेमो ओएनजीसी ऑफिसर्स क्लब में किया। एआरटीओ आरपी राठौर ने जैसे ही बाइक की रेस बढ़ाई उनके मोबाइल पर ओवर स्पीड का संदेश आ गया। तीन बार स्पीड बढ़ाने के बाद मोबाइल पर कॉल आ गई कि आपकी बाइक ओवर स्पीड है।
माया इंस्टीट्यूट के छात्र हिमांशु चावला और इंजीनियरिंग के छात्र रहे विजय सिंह की इस डिवाइस की मदद से बाइक की स्पीड को नियंत्रण में रखा जा सकता है।
मोबाइल नंबर पर एसएमएस पहुंच जाएगा
इस डिवाइस में एक सिमकार्ड लगता है और स्पीड फिक्स कर दी जाती है। बाइक जैसे ही फिक्स स्पीड को क्रॉस करेगी तुरंत डिवाइस में दर्ज मोबाइल नंबर पर एसएमएस पहुंच जाएगा।
ओएनजीसी ऑफिसर्स क्लब में डिवाइस का डेमो देख एआरटीओ आरपी राठौर भी चकित रह गए। मोबाइल पर ओवर स्पीड का मैसेज आने के बाद उन्होंने जवाब में स्पीड को 60 से घटाकर 45 करने का संदेश भेजा तो बाइक की स्पीड अचानक कम हो गई।
इस प्रोजेक्ट से वह काफी खुश नजर आए। उन्होंने कहा वे इस प्रोजेक्ट को पास कर शासन को भेज रहे हैं। हिमांशु और विजय पेटेंट के लिए भी आवेदन भेज चुके हैं। डेमो देखने पहुंचे अभिभावकों ने भी इसकी प्रशंसा की।
उन्होंने कहा कि अब बच्चे बाइक पर हवा से बातें नहीं कर पाएंगे। इस अवसर पर योगेश, ओएनजीसी के पूर्व डीजीएम सुभिमल कर, एमआईएमटी निदेशक रवि जुयाल, श्रीश श्रीवास्तव, नुपुर शर्मा, अंशुल लखेड़ा, राहुृल राना, रिचा भारती, नेहा भट्ट, रोबिन, चरनपाल और सुमनलाल आदि मौजूद रहे।
ऐसे काम करती है डिवाइस
इस डिवाइस को चलाने के लिए बाइक में एक सेंसर वाली केबल लगाई जाती है, जोकि गाड़ी के आरपीएम के आधार पर स्पीड तय करती है।
यह केबल इस डिवाइस ‘एक्सीडेंट रिस्क रिडक्शन’ से कनेक्ट होती है। डिवाइस गाड़ी के कार्बोरेटर से जुड़ा होता है, जो कि खुद ही स्पीड कम कर देती है।