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यहां सालों से ताले में बंद हैं 'भगवान'

Sat, 28 Sep 2013 05:25 PM IST
अमर उजाला, ऋषिकेश
अमर उजाला, ऋषिकेश Updated Sat, 28 Sep 2013 05:25 PM IST
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abuses of religious freedom Rights

ऋषिकेश में प्राचीन मान्यता वाले कुछ मंदिर, संतों की गुफाएं, साधना स्थल अभी भी अंधेरी खोह में हैं।

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लोगों ने इसे संविधान के मूल अधिकारों के तहत धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकारों का हनन बताया है। उनका कहना है कि पौराणिक महात्म्य के इन स्थलों की अनदेखी नहीं की जा सकती।

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अंग्रेजी हुकूमत के समय 1864 में वन विभाग की स्थापना की गई, जबकि 12 अगस्त 1983 को राजाजी नेशनल पार्क के प्रारंभिक नोटिफिकेशन के तहत इन प्राचीन स्थलों वाले वन क्षेत्रों को इसकी परिधि में लिया गया।
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साधकों को बेदखल कर दिया
मणिकूट पर्वत श्रृंखलाओं पर स्थापित प्राचीन मंदिर सदियों पुराने हैं। इनमें स्थापित गुफाओं में सदियों से ऋषि-मुनि, तपस्वी, साधु-संत साधनारत रहे हैं। मगर पार्क के प्रारंभिक नोटिफिकेशन के बाद इन स्थलों को सील कर दिया गया और इनमें पूजा-पाठ को प्रतिबंधित करते हुए यहां रह रहे साधकों को बेदखल कर दिया गया।

इनमें से कई मंदिर, गुफाएं लोक मानस में अत्यधिक प्रचलित हैं और लोग इनमें दर्शन-पूजन के लिए आते-जाते हैं। मगर पार्क परिधि में आने के बाद से इनमें भक्तों, श्रद्धालुओं का आवागमन प्रतिबंधित है।

क्या कहता है संविधान
संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत किसी भी व्यक्ति को कहीं भी आने-जाने का अधिकार प्राप्त है, जबकि अनुच्छेद 25 के तहत धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार प्राप्त है। जिसमें व्यक्ति को अपने धर्म के अनुसार धार्मिक क्रियाकलाप, पूजा-पाठ, कर्मकांड आदि करने का अधिकार प्राप्त है।

यह सामान्य स्थलों के साथ ही वनक्षेत्र, राजाजी नेशनल पार्क, सेंचुरी आदि में भी प्रभावी है। ऐसे में इन स्थलों पर प्रतिबंध लगाया जाना मूल और धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकारों का हनन है।

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वन अधिनियम 1972 की धारा 24 (1) और (2) क, ख में जिलाधिकारी को और धारा 24 (2) के (ग) में मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को ऐसे वन क्षेत्रों में धार्मिक क्रियाकलापों की अनुमति देने का अधिकार प्राप्त है। मगर लोगों का कहना है कि जिला प्रशासन ऐसे प्रकरणों को पार्क प्रशासन पर टाल देता है, जबकि पार्क के अफसर कानून का भय दिखाने लगते हैं।

हमारे गुरु महावीर दास टाट वाले बाबा उक्त गुफा में 1930 से रहते थे। जबकि 19वीं सदी में स्थापित गुफा में इससे पूर्व उनके गुरु जगन्नाथ दास साधना करते थे। पार्क प्रशासन ने 1995 में गुफा को सील कर साधना और पूजा-अर्चना पर रोक लगा दी।
- स्वामी शंकर दास (टाट वाले बाबा के शिष्य)

पार्क प्रशासन को स्थानीय ग्रामीणों के साथ ही वन क्षेत्र में स्थापित प्राचीन स्थलों को भी इससे मुक्त करना चाहिए। ऐसे स्थल आम आदमी की आस्था के प्रतीक हैं।
- चंद्रमोहन सिंह नेगी, सामाजिक कार्यकर्ता

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