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दिल्ली के बाद 'आप' के निशाने पर अब उत्तराखंड
अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 29 Dec 2013 12:51 PM IST
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अरविंद केजरीवाल की अगुवाई में आम आदमी पार्टी (आम आदमी पार्टी) ने दिल्ली को अपनी राजनीतिक प्रयोगशाला बनाकर धमाकेदार कामयाबी पाई। अब आप की पैनी नजर उत्तराखंड जैसे राज्यों पर है।
रविवार को आप की देहरादून में होने वाली बैठक से यहां के सियासी माहौल में नई सरगर्मी पैदा होने की उम्मीद है।
दिल्ली के जैसा है उत्तराखंड
आप के सिपहसालार पहले हरियाणा, उत्तराखंड जैसे छोटे राज्यों को अपना लक्ष्य बनाना चाहते हैं। इस लिहाज से उत्तराखंड की सियासी स्थिति कमोबेश दिल्ली जैसी ही है।
उत्तराखंड में भी दिल्ली की तर्ज पर कांग्रेस और भाजपा का वर्चस्व रहा है। उक्रांद जैसे दल की तीसरा विकल्प देने की कोशिश दम तोड़ चुकी है। इस लिहाज से आप के लिए राज्य में बेहद ‘उर्वर’ जमीन तैयार है।
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दिल्ली से दूसरी भी कई समानताएं हैं। दोनों राज्यों में 70-70 सीटें हैं। अलबत्ता लोकसभा की सीट सात केमुकाबले पांच ही है। राज्य की आबादी (लगभग एक करोड़ 10 लाख) भी दिल्ली से थोड़ी ही कम है।
प्रदेश में है व्यापक समर्थन
अन्ना के जन लोकपाल आंदोलन को उत्तराखंड से व्यापक समर्थन मिला था। अन्ना से अलग होकर केजरीवाल ने जब सियासत की राह चुनी तो एक ठहराव सा आ गया। दिल्ली चुनावों में आप की धमाकेदार कामयाबी के बाद प्रदेश के लोगों में आप के प्रति एकाएक क्रेज बढ़ गया है।
हरिद्वार, रुड़की, देहरादून समेत गढ़वाल के दूसरे जिलों में बाकायदा काउंटर लगाकर आप की सदस्यता का अभियान चलाया गया। लोगों ने भी इसमें खूब दिलचस्पी दिखाई। यहां के लोग ऑन लाइन सदस्यता भी बड़ी संख्या में ले रहे हैं।
लोकसभा में दिखाएगी ताकत
नई टिहरी जैसे पहाड़ी जिले में चंद दिनों में एक हजार लोगों को आप से जोड़ने वाले जिला संयोजक औतार सिंह राणा ने बताया कि पार्टी आगामी लोकसभा चुनाव में पूरी ताकत के साथ शिरकत करेगी।
इसके अलावा फार्म भरकर उत्तरकाशी में दो सौ, रुड़की में लगभग साढ़े छह सौ, हरिद्वार में छह सौ, देहरादून में एक हजार से ज्यादा आप के सदस्य चंद दिनों बने हैं।
ऑनलाइन सदस्यता भी जारी
ऑन लाइन सदस्यता भी काफी लोगों ने ली है। आप के जिला संयोजकों की नियुक्ति की जा चुकी है। ब्लाक और पंचायत स्तर पर भी पार्टी के प्रसार की कोशिशें जारी हैं। आप नेता अशोक चौधरी की मानें तो पंचायत चुनावों में भी आप शिरकत करेगी।
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रविवार को आप की देहरादून में होने वाली बैठक से यहां के सियासी माहौल में नई सरगर्मी पैदा होने की उम्मीद है।
दिल्ली के जैसा है उत्तराखंड
आप के सिपहसालार पहले हरियाणा, उत्तराखंड जैसे छोटे राज्यों को अपना लक्ष्य बनाना चाहते हैं। इस लिहाज से उत्तराखंड की सियासी स्थिति कमोबेश दिल्ली जैसी ही है।
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उत्तराखंड में भी दिल्ली की तर्ज पर कांग्रेस और भाजपा का वर्चस्व रहा है। उक्रांद जैसे दल की तीसरा विकल्प देने की कोशिश दम तोड़ चुकी है। इस लिहाज से आप के लिए राज्य में बेहद ‘उर्वर’ जमीन तैयार है।
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दिल्ली से दूसरी भी कई समानताएं हैं। दोनों राज्यों में 70-70 सीटें हैं। अलबत्ता लोकसभा की सीट सात केमुकाबले पांच ही है। राज्य की आबादी (लगभग एक करोड़ 10 लाख) भी दिल्ली से थोड़ी ही कम है।
प्रदेश में है व्यापक समर्थन
अन्ना के जन लोकपाल आंदोलन को उत्तराखंड से व्यापक समर्थन मिला था। अन्ना से अलग होकर केजरीवाल ने जब सियासत की राह चुनी तो एक ठहराव सा आ गया। दिल्ली चुनावों में आप की धमाकेदार कामयाबी के बाद प्रदेश के लोगों में आप के प्रति एकाएक क्रेज बढ़ गया है।
हरिद्वार, रुड़की, देहरादून समेत गढ़वाल के दूसरे जिलों में बाकायदा काउंटर लगाकर आप की सदस्यता का अभियान चलाया गया। लोगों ने भी इसमें खूब दिलचस्पी दिखाई। यहां के लोग ऑन लाइन सदस्यता भी बड़ी संख्या में ले रहे हैं।
लोकसभा में दिखाएगी ताकत
नई टिहरी जैसे पहाड़ी जिले में चंद दिनों में एक हजार लोगों को आप से जोड़ने वाले जिला संयोजक औतार सिंह राणा ने बताया कि पार्टी आगामी लोकसभा चुनाव में पूरी ताकत के साथ शिरकत करेगी।
इसके अलावा फार्म भरकर उत्तरकाशी में दो सौ, रुड़की में लगभग साढ़े छह सौ, हरिद्वार में छह सौ, देहरादून में एक हजार से ज्यादा आप के सदस्य चंद दिनों बने हैं।
ऑनलाइन सदस्यता भी जारी
ऑन लाइन सदस्यता भी काफी लोगों ने ली है। आप के जिला संयोजकों की नियुक्ति की जा चुकी है। ब्लाक और पंचायत स्तर पर भी पार्टी के प्रसार की कोशिशें जारी हैं। आप नेता अशोक चौधरी की मानें तो पंचायत चुनावों में भी आप शिरकत करेगी।