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नशीली दवा खिलाने के आरोपी डॉ. गुप्ता की मंशा पर फिरा पानी
संजय त्रिपाठी/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 18 Jul 2016 08:28 AM IST
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आयुर्वेदिक दवाइयों के नाम पर मिर्गी रोगियों को नशीली दवाइयां खिलाने के आरोपी डॉ. आरके गुप्ता का दांव फेल हो गया है। उसने अपने ऊपर दर्ज नारकोटिक्स एक्ट के मुकदमे को वापस लेने की अर्जी मुख्यमंत्री को दी थी, जिसे न्याय विभाग ने सिरे से खारिज कर दिया है।
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साथ ही मुकदमा वापसी न किए जाने की संस्तुति करते हुए फाइल वापस गृह विभाग को भेज दी है। गौरतलब है कि गुपचुप तरीके से चल रही मुकदमा वापसी की इस प्रक्रिया का पर्दाफाश अमर उजाला ने बीते माह किया था।
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ऋषिकेश में नीरज क्लीनिक का संचालन करने वाला डॉ. आरके गुप्ता एक विशेष दवा से मिर्गी रोग के सफल उपचार का दावा करता था। इस झांसे में फंसकर देश भर से हजारों की संख्या में मिर्गी रोगी यहां उपचार के लिए आने लगे। यहां उन्हें ऊंचे दाम पर दवाइयां दी जाती थीं, जिन पर किसी ब्रांड का रैपर नहीं होता था।
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एक शिकायत पर अगस्त 2004 में नीरज क्लीनिक पर राज्य ड्रग कंट्रोलर और प्रशासनिक अफसरों ने छापेमारी की। छानबीन में अफसरों ने पाया गया कि एलोपैथिक दवाइयों में प्रतिबंधित साइकोथैरेपिक दवाइयां फिम्सोबार, इपिलॉन, क्लोरोडाई और फिनोबारबिटॉन आदि को मिलाकर मरीजों को खिलाया जाता था।
इससे कुछ समय के लिए उन्हें दौरे तो आना बंद हो जाते थे, मगर वे इन गोलियों के आदी हो जाते थे। दवाइयों को खाने से उनके शरीर और दिमाग पर तमाम साइड इफेक्ट हो रहे थे। इन दवाइयों को सीज करने के साथ ही डॉ. आरके गुप्ता के विरुद्ध ऋषिकेश कोतवाली में एनडीपीएस एक्ट एवं धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की गई थी।
डॉ. गुप्ता ने जोड़तोड़ करके अपने ऊपर दर्ज मुकदमों को वापस लेने की अर्जी मुख्यमंत्री को दी। यहां से मामला गृह विभाग को गया, जहां पुलिस और प्रशासन से रिपोर्ट मंगाई गई। जिला प्रशासन ने पूर्व में ही इस मुकदमे की वापसी पर आपत्ति जताई थी, इसके बाद अब न्याय विभाग ने भी मुकदमा वापसी की अर्जी को खारिज कर दिया है।
गृह विभाग को वापस भेजी गई इस फाइल में कहा गया है कि मुकदमा कोर्ट में ट्रायल पर है। वहीं हाईकोर्ट द्वारा एनडीपीएस एक्ट के एक मामले में डॉ. आरके गुप्ता को मिली राहत के खिलाफ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर रखी है। ऐसे तमाम तथ्यों का हवाला देते हुए न्याय विभाग की ओर से कहा गया है कि इस मुकदमे को वापस लिया जाना संभव नहीं है।