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Dehradun News: जिले में प्रधानाचार्य के 916 पद खाली, शिक्षण कार्य हो रहा प्रभावित
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जिले भर में 916 प्रधानाचार्य-प्रधानाध्यापकों के पद खाली हैं, जिससे विद्यालयों की जिम्मेदारी अस्थायी रूप से शिक्षकों को सौंपी गई है। ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग की 2024-25 की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। ऐसे में प्रभारी शिक्षक विभागीय सूचनाओं, मध्याह्न भोजन, और अन्य प्रशासनिक कार्यों में उलझकर अपनी शिक्षण जिम्मेदारियों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। इससे छात्रों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।
एकल शिक्षक विद्यालयों में तो हालात और भी बदतर हैं। यहां शिक्षकों को निजी छुट्टियों में भी विद्यालय से जुड़े काम निपटाने पड़ते हैं। प्रधानाचार्य के अभाव में स्कूलों में अनुशासन की कमी और शिक्षण गुणवत्ता में गिरावट देखी जा रही है। शिक्षकों का कहना है कि प्रधानाध्यापक के पद खाली रहने से विद्यालयों की शैक्षिक उपलब्धियां भी प्रभावित हो रही हैं। ऐसे में न सिर्फ छात्रों का भविष्य दांव पर लग रहा है, बल्कि विद्यालयों की समग्र प्रगति भी बाधित हो रही है।
प्रधानाचार्य के नेतृत्व के बिना विद्यालय का सफल संचालन मुश्किल है। पद रिक्त होने के कारण छात्रों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। ऐसे में विभाग को चाहिए कि जल्द से जल्द इन पदों पर पदोन्नति की जाए। - अर्जुन सिंह पंवार, जिलामंत्री, राजकीय शिक्षक संघ देहरादून
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प्रधानाचार्य-प्रधानाध्यापक की जिम्मेदारी संभालने वाले प्रभारी शिक्षकों को विभाग या तो अतिरिक्त मानदेय दे या फिर जल्द ही इन पदों पर नियुक्ति की जाए। इस तरह शिक्षकों का शोषण गलत है। - धर्मेंद्र सिंह रावत, जिलाध्यक्ष राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ
पदोन्नति का मामला वर्तमान समय में उच्च न्यायालय में चल रहा है। जैसे ही न्यायालय के पदोन्नति के आदेश दिए जाएंगे रिक्त पदों पर भर्ती शुरू कर दी जाएगी। - प्रेमलाल भारती, जिला शिक्षाधिकारी, बेसिक
Iइन स्कूलों में खाली हैं पदI
कक्षा एक से पांच तक के स्कूलों में 580, छह से आठ तक के स्कूलों में 248, कक्षा छह से 10 तक स्कूलों में 37, कक्षा छह से 12 तक के स्कूलों में 23, नौ और 10 तक के स्कूल में 26, कक्षा नौ से 12 और 11 से 12 तक स्कूल में एक-एक पद खाली हैं।
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एकल शिक्षक विद्यालयों में तो हालात और भी बदतर हैं। यहां शिक्षकों को निजी छुट्टियों में भी विद्यालय से जुड़े काम निपटाने पड़ते हैं। प्रधानाचार्य के अभाव में स्कूलों में अनुशासन की कमी और शिक्षण गुणवत्ता में गिरावट देखी जा रही है। शिक्षकों का कहना है कि प्रधानाध्यापक के पद खाली रहने से विद्यालयों की शैक्षिक उपलब्धियां भी प्रभावित हो रही हैं। ऐसे में न सिर्फ छात्रों का भविष्य दांव पर लग रहा है, बल्कि विद्यालयों की समग्र प्रगति भी बाधित हो रही है।
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प्रधानाचार्य के नेतृत्व के बिना विद्यालय का सफल संचालन मुश्किल है। पद रिक्त होने के कारण छात्रों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। ऐसे में विभाग को चाहिए कि जल्द से जल्द इन पदों पर पदोन्नति की जाए। - अर्जुन सिंह पंवार, जिलामंत्री, राजकीय शिक्षक संघ देहरादून
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प्रधानाचार्य-प्रधानाध्यापक की जिम्मेदारी संभालने वाले प्रभारी शिक्षकों को विभाग या तो अतिरिक्त मानदेय दे या फिर जल्द ही इन पदों पर नियुक्ति की जाए। इस तरह शिक्षकों का शोषण गलत है। - धर्मेंद्र सिंह रावत, जिलाध्यक्ष राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ
पदोन्नति का मामला वर्तमान समय में उच्च न्यायालय में चल रहा है। जैसे ही न्यायालय के पदोन्नति के आदेश दिए जाएंगे रिक्त पदों पर भर्ती शुरू कर दी जाएगी। - प्रेमलाल भारती, जिला शिक्षाधिकारी, बेसिक
Iइन स्कूलों में खाली हैं पदI
कक्षा एक से पांच तक के स्कूलों में 580, छह से आठ तक के स्कूलों में 248, कक्षा छह से 10 तक स्कूलों में 37, कक्षा छह से 12 तक के स्कूलों में 23, नौ और 10 तक के स्कूल में 26, कक्षा नौ से 12 और 11 से 12 तक स्कूल में एक-एक पद खाली हैं।