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गर्भवती को घर के पास ही मिलेगी प्रसव की सुविधा
Updated Wed, 24 Oct 2018 02:08 AM IST
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गर्भवती को घर के पास ही मिलेगी प्रसव की सुविधा
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। ग्रामीण क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं को अब प्रसव के लिए दूरदराज स्थित जिला अस्पतालाें अथवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में नहीं जाना पड़ेगा। इन महिलाओं को गांव के पास स्थित उपकेंद्रों पर प्रसव की सुविधा मुहैया कराई जाएगी। राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत गांवों के निकटतम उपकेंद्रों को उच्चीकृत किया जाएगा। इस संबंध में राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम के परियोजना निदेशक ने सभी सीएमओ समेत आला अफसराें की बैठक ली।
स्वास्थ्य महानिदेशालय सभागार में आयोजित बैठक में राज्य परियोजना निदेशक युगल किशोर पंत ने कहा कि गर्भवती को प्रसव कराने के लिए दूरदराज न जाना पड़े, इसके लिए उपकेंद्राें को क्रियाशील बनाया जाए। साथ ही सभी सीएमओ को हिदायत दी कि मातृ मृत्यु एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए योजनाआें की समय समय पर समीक्षा की जाए।
मिशन निदेशक ने इस बात पर भी जोर दिया कि सुरक्षित प्रसव के लिए प्रसव पूर्व जांचों की संख्या बढ़ायी जाए। गर्भवती महिला के हीमोग्लोबिन जांच के आधार पर एनीमिया के स्तर में सुधार लाया जाए। राष्ट्रीय पोषण कार्यक्रम और एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम के संचालन के लिए आंगनबाड़ी व एएनएम के बीच बेहतर समन्वय बनाने की जरूरत है। अपर सचिव स्वास्थ्य ने एनएचएम की योजनाओं को धरातल पर क्रियान्वित करने के लिए ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता एवं पोषण समितियों की बैठकों में ब्लाक एवं जिला स्तरीय अधिकारियों द्वारा प्रतिभाग करने की बात कही। बैठक में निदेशक एनएचएम डॉ. अंजलि नौटियाल, एपीडी डॉ. अभिषेक त्रिपाठी, अपर निदेशक राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम डॉ. सरोज नैथानी, संयुक्त निदेशक डॉ. बागीश काला, डॉ. वीएस टोलिया, डॉॅ. अमित शुक्ल समेत तमाम जिलों के सीएमओ व विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। ग्रामीण क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं को अब प्रसव के लिए दूरदराज स्थित जिला अस्पतालाें अथवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में नहीं जाना पड़ेगा। इन महिलाओं को गांव के पास स्थित उपकेंद्रों पर प्रसव की सुविधा मुहैया कराई जाएगी। राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत गांवों के निकटतम उपकेंद्रों को उच्चीकृत किया जाएगा। इस संबंध में राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम के परियोजना निदेशक ने सभी सीएमओ समेत आला अफसराें की बैठक ली।
स्वास्थ्य महानिदेशालय सभागार में आयोजित बैठक में राज्य परियोजना निदेशक युगल किशोर पंत ने कहा कि गर्भवती को प्रसव कराने के लिए दूरदराज न जाना पड़े, इसके लिए उपकेंद्राें को क्रियाशील बनाया जाए। साथ ही सभी सीएमओ को हिदायत दी कि मातृ मृत्यु एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए योजनाआें की समय समय पर समीक्षा की जाए।
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मिशन निदेशक ने इस बात पर भी जोर दिया कि सुरक्षित प्रसव के लिए प्रसव पूर्व जांचों की संख्या बढ़ायी जाए। गर्भवती महिला के हीमोग्लोबिन जांच के आधार पर एनीमिया के स्तर में सुधार लाया जाए। राष्ट्रीय पोषण कार्यक्रम और एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम के संचालन के लिए आंगनबाड़ी व एएनएम के बीच बेहतर समन्वय बनाने की जरूरत है। अपर सचिव स्वास्थ्य ने एनएचएम की योजनाओं को धरातल पर क्रियान्वित करने के लिए ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता एवं पोषण समितियों की बैठकों में ब्लाक एवं जिला स्तरीय अधिकारियों द्वारा प्रतिभाग करने की बात कही। बैठक में निदेशक एनएचएम डॉ. अंजलि नौटियाल, एपीडी डॉ. अभिषेक त्रिपाठी, अपर निदेशक राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम डॉ. सरोज नैथानी, संयुक्त निदेशक डॉ. बागीश काला, डॉ. वीएस टोलिया, डॉॅ. अमित शुक्ल समेत तमाम जिलों के सीएमओ व विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।
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