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‘आपदाओं से निपटने के ठोस उपाय नहीं’
Updated Fri, 13 Jul 2018 02:04 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
बादल फटने से प्रभावित इलाकों का जायजा लेने के बाद उत्तराखंड क्रांति दल के पदाधिकारियों ने सरकार पर जमकर हमला बोला। उनका कहना है कि प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए सरकार के पास ठोस कार्ययोजना नहीं है। राजधानी में अव्यवस्था का आलम यह है कि आपदा के कई घंटे बाद भी अधिकारी, कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचते हैं। पीड़ित परिवारों को अभी तक कोई ठोस ठोस सहायता नहीं मिल पाई है।
उक्रांद महानगर इकाई के एक प्रतिनिधिमंडल ने बृहस्पतिवार को सीमा द्वार, हिल व्यू कॉलोनी, गांधी ग्राम, शास्त्री नगर खाला आदि क्षेत्रों में भ्रमण कर नुकसान का जायजा लिया और पीड़ित परिवाराें का हाल जाना। उक्रांद के महानगर अध्यक्ष संजय क्षेत्री ने आक्रोश जताते हुए कहा कि मानसून की पहली भारी बारिश ने ही सरकार के इंतजामों की कलई खोल दी है। समय रहते भाजपा और कांग्रेस की सरकारों ने व्यवस्थित तरीके से बस्तियों को बसाया होता तो ऐसी हृदय विदारक हादसा नहीं होता। वरिष्ठ नेता लताफत हुसैन ने कहा कि इतनी बड़ी घटना के बाद भी मलिन बस्तियों में रहने वालों की सुरक्षा के लिए कोई उपाय नहीं किए जा रहे हैं। अब भी कई परिवारों पर आपदा का खतरा मंडरा रहा है, लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। प्र्रतिनिधिमंडल में उक्रांद के संरक्षक बीडी रतूड़ी, केंद्रीय महामंत्री जयप्रकाश उपाध्याय, सुरेंद्र रावत, मनीष लखेड़ा, आलम सिंह नेगी और कैलाश राणा समेत आदि शामिल थे।
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बादल फटने से प्रभावित इलाकों का जायजा लेने के बाद उत्तराखंड क्रांति दल के पदाधिकारियों ने सरकार पर जमकर हमला बोला। उनका कहना है कि प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए सरकार के पास ठोस कार्ययोजना नहीं है। राजधानी में अव्यवस्था का आलम यह है कि आपदा के कई घंटे बाद भी अधिकारी, कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचते हैं। पीड़ित परिवारों को अभी तक कोई ठोस ठोस सहायता नहीं मिल पाई है।
उक्रांद महानगर इकाई के एक प्रतिनिधिमंडल ने बृहस्पतिवार को सीमा द्वार, हिल व्यू कॉलोनी, गांधी ग्राम, शास्त्री नगर खाला आदि क्षेत्रों में भ्रमण कर नुकसान का जायजा लिया और पीड़ित परिवाराें का हाल जाना। उक्रांद के महानगर अध्यक्ष संजय क्षेत्री ने आक्रोश जताते हुए कहा कि मानसून की पहली भारी बारिश ने ही सरकार के इंतजामों की कलई खोल दी है। समय रहते भाजपा और कांग्रेस की सरकारों ने व्यवस्थित तरीके से बस्तियों को बसाया होता तो ऐसी हृदय विदारक हादसा नहीं होता। वरिष्ठ नेता लताफत हुसैन ने कहा कि इतनी बड़ी घटना के बाद भी मलिन बस्तियों में रहने वालों की सुरक्षा के लिए कोई उपाय नहीं किए जा रहे हैं। अब भी कई परिवारों पर आपदा का खतरा मंडरा रहा है, लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। प्र्रतिनिधिमंडल में उक्रांद के संरक्षक बीडी रतूड़ी, केंद्रीय महामंत्री जयप्रकाश उपाध्याय, सुरेंद्र रावत, मनीष लखेड़ा, आलम सिंह नेगी और कैलाश राणा समेत आदि शामिल थे।
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